इसका नित्य प्रातः और रात्री में सोते समय पांच पांच बार पाठ करने मात्र से ही समस्त शत्रुओं का नाशहोता है और शत्रुअपनी शत्रुता छोड़ कर मित्रता का व्यवहार करने लगतेहै.शुभमस्तु!!!!
"ॐ नमो भगवते महा - प्रतापाय
महा-विभूति - पतये , वज्र -देह
वज्र - काम वज्र - तुण्ड वज्र -नख
वज्र - मुख वज्र - बाहु वज्र - नेत्र वज्र -
दन्त वज्र - कर- कमठ भूमात्म -कराय ,
श्रीमकर - पिंगलाक्ष उग्र - प्रलय
कालाग्नि-रौद्र वीर
भद्रावतार पूर्ण - ब्रह्म परमात्मने ,
ऋषि - मुनि वन्द्य -शिवास्त्र
ब्रह्मास्त्र वैष्णवास्त्र
नारायणास्त्र काल -शक्ति
दण्ड - कालपाश- अघोरास्त्र-
निवारणाय , पाशुपातास्त्र -
मृडास्त्र- सर्वशक्ति-प रास्त-
कराय, पर -विद्या -निवारण
अग्नि दीप्ताय , अथर्व - वेद
ऋग्वेद- साम- वेद - यजुर्वेद-सिद्धि
-कराय , निराहाराय , वायु -वेग
मनोवेग श्रीबाल -
कृष्णः प्रतिषठानन्द -
करः स्थल -जलाग्नि - गमे मतोद् -
भेदि, सर्व - शत्रु छेदि - छेदि , मम
बैरीन् खादयोत्खादय ,
सञ्जीवन -पर्वतोच्चाटय ,
डाकिनी - शाक िनी - विध्वंस -
कराय महा - प्रतापाय निज -
लीला - प्रदर्शकाय निष्कलंकृत -
नन्द कुमार - बटुक - ब्रह्मचारी
निकुञ्जस्थ- भक्त - स्नेह-कराय
दुष्ट जन - स्तम्भनाय सर्व - पाप
ग्रह- कुमार्ग- ग्रहान् छेदय छेदय ,
भिन्दि - भिन्दि , खादय,
कण्टकान् ताडय ताडय मारय
मारय, शोषय शोषय, ज्वालय-
ज्वालय, संहारय -संहारय ,
( देवदत्तं ) नाशय नाशय , अति -
शोषय शोषय, मम सर्वत्र रक्ष
रक्ष, महा - पुरुषाय सर्व - दुःख -
विनाशनाय ग्रह - मण्डल- भूत-
मण्डल प्रेत -मण्डल पिशाच-मण्डल
उच्चाटन उच्चाटनाय अन्तर -
भवादिक ज्वर - माहेश्वर -ज्वर
वैष्णव- ज्वर- ब्रह्म ज्वर विषम -
ज्वर - शीत ज्वर -वात ज्वर- कफ-
ज्वर एकाहिक द्वाहिक-
त्र्याहिक चातुर्थिक - अर्द्ध
मासिक मासिक षाण्मासिक
सम्वत्सरादि - कर भ्रमि - भ्रमि ,
छेदय छेदय , भिन्दि भिन्दि ,
महाबल - पराक्रमाय महा -
विपत्ति - निवारणाय भक्र - जन-
कल्पना- कल्प- द्रुमाय- दुष्ट- जन-
मनोरथ - स्तम्भनाय क्लीं कृष्णाय
गोविन्दाय गोपी - जन-
वल्लभाय नमः।।
इसका नित्य प्रातः औररात्री में सोते समय पांच- पांचबार पाठ करने मात्र सेही समस्त शत्रुओंका नाशहोता है और शत्रुअपनी शत्रुता छोड़करमित्रता का व्यवहार करने लगतेहै.शुभमस्तु!!!!

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महावीर स्वामी जन्म कल्याणक पर गुरुदेव श्री के उद्गगार
1-आज मुक्ति के दिग्दर्शक भगवान् महावीर का जन्म दिवस है।
2-आज अहिंसा के अग्रदूत भगवान् महावीर का जन्म दिवस है।
3-आज आत्म आराधक महावीर का जन्म दिवस है
4-आज स्वभाव के साधक महावीर का जन्म दिवस है।
5-आज मोह विजयी महावीर का जन्म दिवस है।
6-आज शुद्धात्म रशिक महावीर का जन्म दिवस है।
7-आज राग द्वेष को जीतने वाले वीतरागी महावीर का जन्म दिवस है।
8-आज सिद्ध दशा को प्राप्त महावीर का जन्म दिवस है।
9-आज दुवारा कभी न जन्मने वाले महावीर का जन्म दिवस है।
10-आज अणु अणु की स्वतंत्रता बतानेवाले महावीर का जन्म दिवस है।
11-आज वर्तमान शासन के नायक महावीर का जन्म दिवस है
12-आज मोक्षमार्ग बतलानेवाले महावीर का जन्म दिवस है।
13-आज जगत के सर्वोत्कृष्ट जीव महावीर का जन्म दिवस है।
14-आज तीन लोक के नाथ महावीर का जन्म दिवस है।
15-आज नर से नारायण बननेवाले महावीर का जन्म दिवस है।
16-आज अष्ट कर्म का संहार करने वाले महावीर का जन्म दिवस है।
17-आज अंतिम तीर्थ के नाथ महावीर प्रभु का जन्म दिवस है।
18-आज हमारे मुक्त स्वरुप का परिचय कराने वाले महावीर का जन्म दिवस है।
19-आज हमारे मोक्षमार्ग प्रणेता महावीर का जन्म दिवस है।
20-आज हमारे अनंत दुखों को दूर करने वाले महावीर का जन्म दिवस है।
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१॰ “श्री शुक्ले महा-शुक्ले कमल-दलनिवासे श्री महालक्ष्मी नमो नमः। लक्ष्मी माई, सत्त की सवाई। आओ, चेतो, करोभलाई। ना करो, तो सात समुद्रों की दुहाई। ऋद्धि-सिद्धि खावोगी, तो नौ नाथचौरासी सिद्धों की दुहाई।”
विधि- घर से नहा-धोकर दुकान पर जाकरअगर-बत्ती जलाकर उसी से लक्ष्मी जी के चित्र की आरती करके, गद्दी पर बैठकर, १ माला उक्त मन्त्र की जपकर दुकान का लेन-देन प्रारम्भ करें। आशातीत लाभहोगा।
२॰ “भँवरवीर, तू चेला मेरा। खोल दुकान कहा कर मेरा।
उठे जो डण्डी बिके जो माल, भँवरवीर सोखे नहिं जाए।।”
विधि-१॰ किसीशुभ रविवार से उक्त मन्त्र की १० माला प्रतिदिन के नियम से दसदिनों में १०० माला जप कर लें। केवल रविवार के ही दिन इस मन्त्र का प्रयोगकिया जाता है। प्रातः स्नान करके दुकान पर जाएँ। एक हाथ में थोड़े-से कालेउड़द ले लें। फिर ११ बार मन्त्र पढ़कर, उन पर फूँक मारकर दुकान में चारोंओर बिखेर दें। सोमवार को प्रातः उन उड़दों को समेट कर किसी चौराहे पर, बिनाकिसी के टोके, डाल आएँ। इस प्रकार चार रविवार तक लगातार, बिना नागा किए, यह प्रयोग करें।
२॰ इसके साथ यन्त्र का भी निर्माण किया जाता है।इसे लाल स्याही अथवा लाल चन्दन से लिखना है। बीच में सम्बन्धित व्यक्ति कानाम लिखें। तिल्ली के तेल में बत्ती बनाकर दीपक जलाए। १०८ बार मन्त्र जपनेतक यह दीपक जलता रहे। रविवार के दिन काले उड़द के दानों पर सिन्दूर लगाकरउक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित करे। फिर उन्हें दूकान में बिखेरदें।

एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी..।

वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था..।

एक कुबड़ा व्यक्ति रोज़ उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा..।"

दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा..

वो कुबड़ा रोज रोटी लेके जाता रहा और इन्ही शब्दों को बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।"

वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी की- "कितना अजीब व्यक्ति है, एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है, और न जाने क्या-क्या बड़बड़ाता रहता है, मतलब क्या है इसका.।"

एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और बोली- "मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी.।"

और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में ज़हर मिला दिया जो वो रोज़ उसके लिए बनाती थी, और जैसे ही उसने रोटी को को खिड़की पर रखने कि कोशिश की, कि अचानक उसके हाथ कांपने लगे और रुक गये और वह बोली- "हे भगवन, मैं ये क्या करने जा रही थी.?" और उसने तुरंत उस रोटी को चूल्हे कि आँच में जला दिया..। एक ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी..।

हर रोज़ कि तरह वह कुबड़ा आया और रोटी ले के: "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा" बड़बड़ाता हुआ चला गया..।

इस बात से बिलकुल बेख़बर कि उस महिला के दिमाग में क्या चल रहा है..।

हर रोज़ जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह भगवान से अपने पुत्र कि सलामती और अच्छी सेहत और घर वापसी के लिए प्रार्थना करती थी, जो कि अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ था..। महीनों से उसकी कोई ख़बर नहीं थी..।

ठीक उसी शाम को उसके दरवाज़े पर एक दस्तक होती है.. वह दरवाजा खोलती है और भोंचक्की रह जाती है.. अपने बेटे को अपने सामने खड़ा देखती है..।

वह पतला और दुबला हो गया था.. उसके कपडे फटे हुए थे और वह भूखा भी था, भूख से वह कमज़ोर हो गया था..।

जैसे ही उसने अपनी माँ को देखा, उसने कहा- "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहाँ हूँ.. आज जब मैं घर से एक मील दूर था, मैं इतना भूखा था कि मैं गिर गया.. मैं मर गया होता..।

लेकिन तभी एक कुबड़ा वहां से गुज़र रहा था.. उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.. भूख के मरे मेरे प्राण निकल रहे थे.. मैंने उससे खाने को कुछ माँगा.. उसने नि:संकोच अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि- "मैं हर रोज़ यही खाता हूँ, लेकिन आज मुझसे ज़्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है.. सो ये लो और अपनी भूख को तृप्त करो.।"

जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी, माँ का चेहरा पीला पड़ गया और अपने आप को सँभालने के लिए उसने दरवाज़े का सहारा लीया..।

उसके मस्तिष्क में वह बात घुमने लगी कि कैसे उसने सुबह रोटी में जहर मिलाया था, अगर उसने वह रोटी आग में जला के नष्ट नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और अंजाम होता उसकी मौत..?

और इसके बाद उसे उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट हो चूका था- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।।


🍁" निष्कर्ष "🍁
==========
हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप को कभी मत रोको, फिर चाहे उसके लिए उस समय आपकी सराहना या प्रशंसा हो या ना हो..।
==========

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मैं आपसे दावे के साथ कह सकता हूँ कि ये बहुत से लोगों के जीवन को छुएगी व बदलेगी.।

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जीवन में जिसने आत्मा की दरकार नही की , उसकी भावना नही की और कहे की मैं मरण समय समाधि रखूँगा तो वह समाधि कहा से रखेगा? जैसे किसी ने अपने जीवन में बन्दूक़ हाथ में न ली हो और न निशान लगाना जानता हो वह लड़ाई में दुश्मन के समक्ष किस प्रकार खड़ा रहेगा ? ज़िन्दगी में अभ्यास किया होगा उसे समय पर काम आएगा ।इसलिए हे भाई ! प्रमाद छोड़कर दृढ़ वैराग्यपूरबक आत्मा की और एकमात्र आत्मा की भावना भा ।
- पूज्य गुरुदेव श्री
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24 Carat Gold Plated GOD - "URMI"
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किसी आत्मा की सबसे बड़ी गलती अपने असल रूप को ना पहचानना है , और यह केवल आत्म ज्ञान प्राप्त कर के ठीक की जा सकती है .
- भगवान महावीर
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