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http://www.bakhani.com/mypoems
A new era of the collection of hindi poems is start now.
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इस हिन्दी कविता के बारे में जो भी सोंचते हो इस कविता को पढनें के बाद अपनें मन के भावों को जरूर व्यक्त करें। ....

बखानी संग्रह उन बातों का,
जिन बातों को सब जानते हैं,
अच्छा बुरा पहचानते हैं,
फिर भी बातें नहीं मानते हैं।
http://bakhani.com/mypoems/bakhani-introduction/
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इस हिन्दी कविता के बारे में जो भी सोंचते हो इस कविता को पढनें के बाद अपनें मन के भावों को जरूर व्यक्त करें। ....

मन अशांत पक्षी का कलरव।
पतझड़ फैला फूला शेमल, हलचल फैली फुदक गिलहरी,
कोयल कूके गीत सुहाना, देख अचंभित प्रकृति का रव ,
मन अशांत पक्षी का कलरव।
http://bakhani.com/mypoems/un-calmed-bird/
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इस हिन्दी कविता के बारे में जो भी सोंचते हो इस कविता को पढनें के बाद अपनें मन के भावों को जरूर व्यक्त करें। ....
आज के बेटे दुनिय की चका- चौन्ध मे, मा से यू हि लड जाते,
फिर थोडा सा झटका लगने से, यू ठोकर खा कर गिर जाते ।
तब भी मा बेटे से यह ही कहती है :-
उठ बेटा दुनिय देख, दुनिया देख रही तुझको,
मत जा ज्यादा दूर मा से, ममता कह रही तुझको ।
http://bakhani.com/mypoems/maa-beta/
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