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Yeshe Rabgye
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Our mind projects all kinds of things that are pure fantasy. We then believe these fantasies and start to blindly follow them. This causes us a huge amount of mental suffering.

Let's look at an example. You have arranged to meet a loved one at a certain time, but they are late because of traffic. But your mind projects that “You are late, because you don’t love me anymore,” or "You are with someone else." Because of our insecurity and attachment we become unhappy. When they finally show up, you get angry with them and you don’t even give them a chance to explain.

These types of prjections happen all of the time. We believe these projections to be 'reality' which creates more and more sufferings and problems for ourselves, and for others.

Be mindful and don't blindly believe everything your mind projects.

मन सब प्रकार की चीज़ों का प्रक्षेपण करता है जो कि शुद्ध कल्पना होती हैं। हम इन कल्पनाओं पर विश्वास करते हैं और उनका अंधाधुंध अनुसरण करना शुरू कर देते हैं। यह हमारे लिए अत्यंत मानसिक पीड़ा का कारण बनता है।

चलिए एक उदाहरण को देखते हैं। आपने एक विशेष समय एक चाहने वाले से मुलाकात का प्रबंध किया है, किन्तु वह ट्रैफिक की वजह से समय पर नहीं हैं। किन्तु आपका मन यह प्रक्षेपण करता है कि " तुम समय पर नहीं हो क्योंकि अब तुम मुझे प्रेम नहीं करते", अथवा " तुम किसी और के साथ हो"। अपनी असुरक्षा और आसक्ति की भावना की वजह से हम दुखी हो जाते हैं। और जब वे वास्तव में पहुंचते हैं, आप उनसे क्रोधित हो जाते हैं और आप उन्हें स्प्ष्टीकरण का भी अवसर नहीं देते।

इस प्रकार के प्रक्षेपण हर समय घटित होते रहते हैं। हम इन प्रक्षेपणों को वास्तविक समझते हैं जिससे हमारे लिए एवं दूसरों के और अधिक पीड़ा एवं समस्याएं पैदा होती हैं।

सजग रहें और मन द्वारा प्रायोजित प्रत्येक चीज़ पर अंधाधुंध विश्वास मत करें।
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Dalai Lama talks about the 3 R's - respect for self, respect for others and responsibility.

The main one here is responsibility. When we take responsibility for our actions, we automatically show respect to ourselves and others.

It is so easy for us to blame others for our moods, failings, emotions and life. But the truth is, we have choices. We can decide to be miserable or not, decide to be angry or not, decide what path to follow in life. Once we have made a decision, we should take responsibility for the outcome, whether it turns out good or bad. This is how we show respect to ourselves and others.

दलाई लामा 3R's के बारे में बात करते हैं- स्वयं के प्रति सम्मान, दूसरों के प्रति सम्मान और उत्तरदायित्व।

यहां सबसे महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है। जब हम अपने कृत्यों का उत्तरदायित्व लेते हैं, हम स्वत: ही स्वयं एवं अन्य के प्रति सम्मान का प्रर्दशन करते हैं।

हमारे लिए यह अत्यंत सरल होता है कि हम अपनी मनोदशा, असफलताओं, भावनाओं और जीवन के लिए अन्य लोगों पर दोषारोपण करें। किन्तु सत्य यह है, हम चयन कर सकते हैं। हम दयनीय होने अथवा न होने का चयन कर सकते हैं, क्रोधित होने या न होने का निर्णय कर सकते हैं, यह निर्णय कर सकते हैं कि जीवन में किस मार्ग का चयन करना है। एक बार जब हम निर्णय ले लेते हैं, हमें उसके परिणाम का उत्तरदायित्व भी लेना चाहिए, चाहे परिणाम अच्छा या बुरा हो। इस प्रकार हम स्वयं और दूसरों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हैं
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Speaking before you think is a bad habit that can get you into trouble and hurt the people you are talking to.

Your words are a reflection of who you are. If your words are getting you into trouble, you’re showing others the worst parts of you.

To break the habit of speaking without thinking you need to understand that it is up to you to control your tongue. You need to be mindful and take responsibility for what comes out of your mouth. So, ensure you engage your brain before you open your mouth.

सोचने से पहले बोलना एक बुरी आदत है जो आपको मुसीबत में डाल सकती है और जिन लोगों से आप बात कर रहे हैं उन्हें आहत कर सकती है।

आपके शब्द एक प्रतिबिंब हैं कि आप कौन हैं। यदि आपके शब्द आपको परेशानी में डाल रहे हैं, तो आप दूसरों को अपने सबसे बुरे हिस्से दिखा रहे हैं।

बिना विचारे बोलने की आदत तोड़ने के लिए आपको यह समझने की जरूरत है कि केवल अपनी जीभ को नियंत्रित करना केवल आप पर निर्भर है। आपको सजग रहना चाहिए और अपने मुंह से निकलने वाले हर शब्द की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। तो, सुनिश्चित करें कि आप अपना मुंह खोलने से पहले अपने मस्तिष्क को संलग्न करें।
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There is a big difference between being alone and being lonely. Being alone is a fact and a positive state of mind. It's where we are content with our own company and not craving for outside stimulation. It is a place of tranquility and peace.

Loneliness is an emotion and not necessarily a fact. It is where we are searching for someone to make us feel whole. We are not happy with our own company and need someone to be there with us. It is a sad emotion and one that will ultimately disturb our minds. It is a place of sadness and pain.

Spend time on your own and get to know yourself better. Be alone, but not lonely.

अकेले होने और असहाय होने के बीच एक बड़ा अंतर है। अकेले होना एक तथ्य और मन की सकारात्मक स्थिति है। यह वह स्थिति है जहां हम अपने स्वयं के साथ संतुष्ट हैं और बाहरी उत्तेजना के लिए लालसा नहीं चाहते हैं। यह अक्षोभ और शांति का एक स्थान है।

अकेलापन अथवा असहाय होना एक भावना है और जरूरी नहीं कि एक तथ्य है। यह वह जगह है जहां हम किसी को पूरी तरह महसूस करने के लिए खोज रहे हैं। हम अपनी स्वयं के साथ से खुश नहीं हैं और किसी को हमारे साथ रहने की जरूरत है। यह एक दुखद भावना है और वह अंततः हमारे मन को विचलित करेगा। यह उदासी और पीड़ा का एक स्थान है।

अपने आप के साथ समय बिताएं और खुद को बेहतर तरीके से जानें। अकेले रहो, लेकिन अकेला अथवा असहाय नहीं।
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I believe that if we want to understand our minds, we need to understand our consciousness. For more about this topic, listen to Lama Yeshe's latest podcast.

https://soundcloud.com/buddhism_guide/understanding-consciousness
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We humans are always dissatisfied, always looking for something bigger, better, brighter. We are always coveting what others have. But the truth is, grass is only greener where it has been watered. If you put in the effort, your grass will become green. If you just envy other people's grass, yours is going to wither and die.

हम मानव सदैव असंतुष्ट रहते हैं, सदा कुछ बड़ा, बेहतर और उज्जवल ढूंढते हैं। हम सदैव जो दूसरों के पास है, उसके प्रति लोभी रहते हैं। किन्तु सत्य यह है कि घास केवल उसी जगह हरी होती है जहां उसे पानी दिया गया है। यदि आप प्रयत्न करेंगे, आपकी घास हरी हो जाएगी। यदि आप दूसरों की घास देखकर इर्ष्या करेंगे, आपकी घास मुरझा कर नष्ट हो जाएगी।
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If we believe it is impossible for us to do something, we will never do it. If we believe it is impossible for us to be something, we won't. If we believe we are not good enough, we will never be good enough. The only limitations we have are the ones we impose on ourselves. Open your mind and you will open yourself to a world of possibilities.

अगर हम मानते हैं कि हमारे लिए कुछ करना असंभव है, तो हम इसे कभी नहीं करेंगे। अगर हम मानते हैं कि हमारे लिए कुछ असंभव है, तो हम नहीं करेंगे। अगर हम मानते हैं कि हम बहुत अच्छे नहीं हैं, तो हम कभी भी अच्छे नहीं बन पाएंगे। हमारे पास केवल वही सीमाएं हैं जिन्हें हम खुद पर लगाते हैं। अपना दिमाग खोलें और इस प्रकार आप स्वयं को संभावनाओं की दुनिया में खोलेंगे।
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When we make commitments to ourselves, such as practicing yoga, turning vegan or entering a spiritual path, they should not be taken lightly. It means you are learning a new routine, taking responsibility for your life and even helping to inspire others.

If you can keep commitments to yourself, you are more likely to hold others to the same standards, because you know how important it is to stand by your word.

When you decide to become accountable to yourself, it is important to keep those promise. It can obviously become difficult at times to keep our commitments, but it is at these times we need to make more effort.

जब हम अपने आप को वचनबद्ध करते हैं, जैसे योग का अभ्यास करना, शाकाहारी भोजन करना या आध्यात्मिक मार्ग में प्रवेश करना, उन्हें हल्के से नहीं लिया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि आप एक नया दिनचर्या सीख रहे हैं, अपने जीवन की ज़िम्मेदारी ले रहे हैं और यहां तक कि दूसरों को प्रेरित करने में भी मदद कर रहे हैं।

यदि आप स्वयं को वचनबद्ध रख सकते हैं, तो आप दूसरों को समान मानकों पर रखने की अधिक संभावना रखते हैं, क्योंकि आप जानते हैं कि आपके शब्द पर खड़ा होना कितना महत्वपूर्ण है।

जब आप अपने आप को उत्तरदायी बनने का फैसला करते हैं, तो उस प्रण को रखना महत्वपूर्ण है। कभी-कभी हमारी प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है, लेकिन ऐसे समय हमें और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।
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In his latest video, Yeshe Rabgye teaches about cause & effect and making a commitment to your spiritual wellbeing.
https://youtu.be/QgxDl-SyNUk
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One Million Plays

My podcasts have been played over one million times. I want to thank you all for your continued support. If you haven't subscribed to the Buddhism Guide podcasts, you can do so here.
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