Profile cover photo
Profile photo
हरीश अरोड़ा
996 followers
996 followers
About
हरीश's posts

Post has attachment

Post has attachment
Photo
Photo
02/12/2016
2 Photos - View album

Post has attachment
तब मानूँगा मैं दीवाली
मावस की काली रातों में
रोशनियों के अंकुर बोते
मन के अंधियारे की चादर
आशाओं के दीपक धोते
तारों से दिपदिपती गलियां
जगमग जगमग हो उजियाली
तब मानूँगा मैं दीवाली।

रंगोली से सजा के देहरी
बीच प्यार का दीपक धर दे
स्नेह भरे मधुरिम दीपों में
खुशियों का उजियारा भर दे
...

Post has shared content

Post has attachment
पी जी डी ए वी कॉलेज (सांध्य)
दिल्ली विश्वविद्यालय
और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त तत्वावधान में 12-13 फ़रवरी को दो दिवसीय राष्ट्रिय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। मैं अपने सभी मित्रों से आग्रह करता हूँ कि इस संगोष्ठी के लिए अपने आलेख 7 फ़रवरी 2016 तक मुझे अवश्य भेज दें। कॉलेज कई वर्षों से नियमित रूप से सफल संगोष्ठियों का आयोजन करता रहा है। आपकी सहभागिता इस संगोष्ठी के लिए महत्वपूर्ण होगी। इसलिए व्यक्तिगत रूप से आपसे आलेखों के लिए आग्रह कर रहां हूँ। शेष जानकारी निम्नलिखित है

विषय : बदलता भारतीय परिदृश्य और स्वातंत्र्योत्तर हिंदी नाटक

सत्र विषय :
1  स्वतंत्रता के बाद का परिवेश और हिंदी नाटक तथा नई रंग चेतना
2  हिंदी रंगमंच की मौजूदा चुनौतियाँ और नए विमर्श
3  नाटक का रंगमंच और रंगमंच का नाटक
4  पाठ की रंगमंचीयता का संकट और पार्श्व की भूमिका

अन्य संभावित विषय
1  स्वातंत्र्योत्तर हिंदी रंगमंच और दलित विमर्श
2  आदिवासी अस्मिता और स्वातंत्र्योत्तर हिंदी रंगमंच
3  स्वातंत्र्योत्तर हिंदी नाटकों में राजनितिक विमर्श
4  पुरानी रचनायें : नई रंग चेतना
5  लोक नाट्य परम्पराओं की सार्थकता
6  लोक नाट्य परंपरा और नई रंग दृष्टि
7  स्वातंत्र्योत्तर हिंदी नाटक : पाठ और पुनर्प्रतिपाठ
8 स्त्री अस्मिता केंद्रित समकालीन हिंदी नाटक
9  समकालीन रंगमंच : नए विमर्श
10  वैश्विक रंग चेतना और हिंदी रंगमंच
11  अभिनय और अभिनेता
12  नए रंग उपादान और अभिनय
13  संवाद के भीतर का संवाद : प्रतीकात्मक नाटक
14 रंगमंच की बदलती परिभाषा और कहानी का रंगमंच
15 कविता का नाट्य रूपांतरण : नई रंग चुनौती
16 नुक्कड़ नाटक : नए प्रतिरूप

लेखक मुख्य विषय तथा सत्र के विषयों से सम्बंधित अन्य उपविष्यों को केंद्र में रखकर किसी अन्य विषय पर भी अपना आलेख लिख सकरे हैं।
आप अपने आलेख davseminar@gmail.com अथवा arora7300@ymail.com पर  7⃣फ़रवरी 2⃣0⃣1⃣6⃣ तक कृतिदेव, वॉकमैन चाणक्य 901-905 अथवा यूनिकोड में वर्ड फ़ाइल में भेज सकते हैं। आलेख ISBN नंबर अंकित पुस्तक में प्रकाशित होंगे।

संगोष्ठी में भाग लेने के लिए शुल्क
अध्यापक : ₹400/- (आलेखों की पुस्तक का मूल्य भी शामिल)
शोधार्थी : ₹300/- (आलेखों की पुस्तक का मूल्य भी शामिल)
विद्यार्थी : ₹100/-

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
डॉ हरीश अरोड़ा
9968723222
9811687144

12 फ़रवरी को प्रातः 9 बजे पंजीकरण

चयनित प्रतिभागियों को 10 मिनट का समय अपने प्रपत्र वाचन या अपने विचार रखने के लिए दिया जायेगा
Photo

Post has attachment

Post has attachment
✨दीपावली पर एक नवगीत✨

मावस की काली रातों में
रोशनियों के अंकुर बोते
मन के अंधियारे की चादर
आशाओं के दीपक धोते
तारों से दिपदिपती गलियां
जगमग जगमग हो उजियाली
तब मानूँगा मैं दीवाली।
रंगोली से सजा के देहरी
बीच प्यार का दीपक धर दे
स्नेह भरे मधुरिम दीपों में
खुशियों का उजियारा भर दे
और सजाकर बंदनवारें
घर आँगन में दो उजियाली
तब मानूँगा मैं दीवाली।
अधरों पर हैं हँसती किरणें
फुलझरियों सी ज्यों फुलवारी
मीठी-सी चुप्पी में गूंजें
आतिशियों की जो किलकारी
सतरंगीं कंदीलें झलकें
संबंधों की हो रखवाली
तब मानूँगा मैं दीवाली।
जब हर बेटी निर्भय होगी
अँधेरे पथ की राहों में
पढ़े व्याकरण उजियारे का
नन्ही किरणों की बाहों में
द्वार-द्वार चौखट चौखट पर
दमके जब रिश्तों की थाली
तब मानूँगा मैं दीवाली।

दीप पर्व की हार्दिक मंगलकामनाएं।

डॉ हरीश अरोड़ा
Photo

Post has attachment

My new book
Sent by WhatsApp
Photo

Post has attachment
Photo

Post has attachment
Meri nayi pustak. 
Photo
Wait while more posts are being loaded