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Sunita Shanoo
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साहित्य अमृत में प्रकशित-- पर उपदेश कुशल बहुतेरे
साहित्य अमृत के नये अंक में पढिये मेरा एक व्यंग्य... पर उपदेश कुशल बहुतेरे,  नसीहतबाज़ कहें या पर-उपदेशक इन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता, आजकल ये सारे के सारे उपदेशानन्द व्हाट्स एप्प और फ़ेसबुक बाबा के घर बैठे नजर आते हैं, सुबह जैसे ही मोबाइल ओपन किया तपाक से एक नस...

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अतुल्य भारत अभियान का स्वप्न
पहरेदारी मुल्क की सौंप हमारे हाथ .. सारा भारत चैन से सोये सारी रात . भारतीय सेना के एक ऑफ़िसर विजेंद्र शर्मा की यह पंक्तियाँ बरबस ही याद आ रही हैं, आप भी सोचिये इस विषय में। हमारे बुजूर्ग कहा करते थे, "पर उपदेश कुशल बहुतेरे" यानि जिनकी कथनी और करनी में फ़र्क ...

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प्रेम की पराकाष्ठा
मेरी नर्म हथेली पर  अपने गर्म होंठों के अहसास छोड़ता  चल पड़ता है वो और मै अन्यमनस्क सी देखती हूँ अपनी हथेली काश वक्त रूक जाये, बस जरा सा ठहर जाये लेकिन तुम्हारे साथ चलते  घड़ी की सुईयां भी दौड़ती सी लगती है  धीरे से मेरा हाथ मेरी गोद में रखकर, हौले से पीठ ...

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खत
खत बहुत दिन हुए नहीं लिख पाई लिखती तो तुम भी जान पाते वो हजारों अनकही बातें जो रात दिन बुनती हैं ख्वाब ख्वाब जिसमें होते हो तुम और तुम्हारा खयाल जब हम मिले थे पिछली दफ़ा मेरे खयालों की पोटली सिमट गई थी चुपचाप खामोशी के साथ लेकिन मै मै नहीं रह पाई थी खामोश बत...

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तुम से "मै"
दिन बहुत हुये... दिन नहीं साल हुये हैं हाँ सालों की ही बातें है जाने कितनी मुलाक़ातें है गिन सकते हैं हम उँगलियों पर लेकिन दिन...महिने...साल... गिन लेने के बाद भी गिनकर बता सकोगे! बाल से भी बारीक उन लम्हों को  जो बिताये है तुम्हारे साथ  और साथ बिताने के इंत...

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हाँ मै व्रत रखती हूँ...
जब बहुत छोटी थी तब माँ को देखा करती थी करवाचौथ का व्रत करते हुयें. माँ सजधज कर जब बहुत सारे पकवान बनाया करती थी, हम बच्चे आश्चर्य करते थे कि माँ ने पानी तक नहीं पिया है कहीं गिर न जाये, पिता माँ का पूरा ख्याल रखते थे, यहाँ तक की आटा लगाना सब्जी काटना जैसे क...

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बाढ़ की सम्भावनायें सामनें हैं...
                                बाढ़ की सम्भावनायें सामनें हैं/ और नदिया के किनारे घर बने हैं... आप सोच रहे होंगे कि उस शख्स को तो फिर डूब ही जाना पड़ेगा।  लेकिन नहीं ऎसा नहीं है, आप अपने घर की दीवारे वाटर प्रूफ़ बनाईये, बाहर कुछ नाव बाँधकर रखिये, कुछ टायर ट्य...

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हा हा! भैंस दुर्दशा देखी न जाई (आज नवभारत टाइम्स में प्रकाशित एक टिप्पणी)
भैंस बहुत ही परेशान है, करे... तो क्या करे? या तो किसी तालाब में डूब मरे, लेकिन वो तो तैरना जानती है सो आत्महत्या भी नहीं कर पा रही है। कल तक पच्चीस किलो दूध और चार टाइम गोबर करके घर वालों के लिये दूध और उपलों का इंतजाम भैंस के द्वारा हो रहा था कि अचानक एक ...

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