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Suraj Saxena
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In the last year of teenage! from like 5 years
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ठहर ज़रा
ज़रा ठहर ज़िन्दगी , अभी   तो आई है , जिस मोड़ पर थी ज़रूरत तेरी , तुने वहीँ से रुखसत पाई है , आ बैठ ज़रा , शतरंज की बाजियां हों , गुफ्तगू के दौर चलें , सुनने को आज तेरी मेरी कहानियां हो , पराजित तो कोई क्या कर सका तुझे , काफी बुलंद लगते तेरे इरादे होंगे , मात न ...
ठहर ज़रा
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ज़रा ठहर ज़िन्दगी , अभी   तो आई है , जिस मोड़ पर थी ज़रूरत तेरी , तुने वहीँ से रुखसत पाई है , आ बैठ ज़रा , शतरंज की बाजियां हों , गुफ्तगू के दौर चलें , सुनने को आज तेरी मेरी कहानियां हो , पराजित तो कोई क्या कर सका तुझे , काफी बुलंद लगते तेरे इरादे होंगे , मात न ...
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ज़रा ठहर ज़िन्दगी , अभी   तो आई है , जिस मोड़ पर थी ज़रूरत तेरी , तुने वहीँ से रुखसत पाई है , आ बैठ ज़रा , शतरंज की बाजियां हों , गुफ्तगू के दौर चलें , सुनने को आज तेरी मेरी कहानियां हो , पराजित तो कोई क्या कर सका तुझे , काफी बुलंद लगते तेरे इरादे होंगे , मात न ...
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ज़रा ठहर ज़िन्दगी , अभी   तो आई है , जिस मोड़ पर थी ज़रूरत तेरी , तुने वहीँ से रुखसत पाई है , आ बैठ ज़रा , शतरंज की बाजियां हों , गुफ्तगू के दौर चलें , सुनने को आज तेरी मेरी कहानियां हो , पराजित तो कोई क्या कर सका तुझे , काफी बुलंद लगते तेरे इरादे होंगे , मात न ...
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साया
क्या वजूद इसका , क्या कहानी है , इसके होने का अस्बाब क्या , मिला इसे ऐसा खिताब क्या , आलिमों फाज़िलों को भी , तस्सवुर नहीं इस राज़ का तन का यह असीर हो गया , मन का यह नसीर हो गया , तुम्हारी गलतियों को माफ़कर , तुम्हारी नादानियों को जानकर , तुम्हारी हर शर्त को म...
साया
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अंतिम संकल्प
विष बोली कर श्रवण मैं , सांस ना मिले इस पवन में , ऊंच नीच देख लोक काल , उलझाये मुझे मेरे स्वपन जाल , अगर उठाये मैंने वदन बचाव में , करना पड़ा सहन सभी इन घाव में , रख कर ख़ुशी सब ताक में , जब चला निर्भय तो मिल गया खाख में , देखूं दूर कहीं तलाश में , दोष खुदी म...
अंतिम संकल्प
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खत लिखता हूँ
गीली गंदली सी ज़मीन सोखे , मट मैले यह कपडे मेरे , थोड़ा रोके थोड़ा पीके आंसू , अपनी मुस्कान को मैं खत लिखता हूँ , जब होठ सुर्ख पड़ जाते है , और गला दर्द कर उठता है , लगता है इक दिन बीत गया , अब उठने को जी करता है , इन काली दीवारों से कुछ नहीं पता लगता है , जाके...
खत लिखता हूँ
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