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Balsanskar Kannada
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ಸುಸಂಸ್ಕಾರಯುತ ಮತ್ತು ಆದರ್ಶ ಪೀಳಿಗೆಯೇ ದೇಶದ ಭವಿಷ್ಯ !
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सूर्यनमस्कार करनेके लाभ !
अ. सभी महत्त्वपूर्ण अवयवोंमें रक्तसंचार बढता है ।
आ. हृदय व फेफडोंकी कार्यक्षमता बढती है ।
इ. बाहें व कमरके स्नायु बलवान हो जाते हैं ।
ई. कशेरुक व कमर लचीली बनती है ।

सूर्यनमस्कारकी पद्धति यहा देखिए - http://balsanskar.com/hindi/lekh/13.html
मराठीत वाचा - http://balsanskar.com/marathi/lekh/13.html
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श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्र
अथ श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्रम् ।
श्रीगणेशाय नमः ॥ पद्मे पद्मपलाशाक्षि जय त्वं श्रीपतिप्रिये ।
जयमातर्महालक्ष्मि संसारार्णवतारिणि ॥१॥
महालक्ष्मि नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि ।
हरिप्रिये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥२॥

संपूर्ण स्तोत्र वाचा - 
http://balsanskar.com/marathi/lekh/894.html
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नव वर्ष ३१ दिसंबरको नहीं, अपितु गुढीपाडवाको मनाकर हिंदु संस्कृति की रक्षा करें !
हिंदू संस्कृतिके अनुसार हम संवत्सरारंभपर नववर्ष मनाते हैं । वह इसलिए कि इस दिन ब्रह्मदेवने सृष्टिकी रचना की थी । यदि इतिहासके पन्ने पलटकर देखेंगे, तो इसी दिन रामने रावणका वध कर अयोध्यामें प्रवेश किया । इसीलिए इस दिन हम नया वर्ष मनाते हैं । 

अधिक जानकारी पढे - http://balsanskar.com/hindi/lekh/487.html
For English - http://balsanskar.com/english/lekh/398_gudi-padwa-not-31-dec.html

Join us - www.Balsanskar.com/sampark/hindi
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शांती मंत्र !
ॐ सह नाववतु | सह नौ भुनक्तु |
सहवीर्यं करवावहै |
तेजस्विनावधीतमस्तु | मा विद्विषावहै ||
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ||

अधिक मंत्र येथे वाचा - http://balsanskar.com/marathi/lekh/cid_96.html

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सत्सेवाका महत्त्व !
प्रभु श्रीरामने रावणकी कैदसे सीताको छुडाने हेतु लंकाकी ओर प्रस्थान किया । रास्तेमें बडा सागर था । उसे पार करके लंका पहुंचना था । किंतु सागर पार करके लंका कैसे जाएं ? अत: वानरसेना तथा हनुमानजीने तय किया कि हम सागरमें पत्थर डालकर सेतु बनाएंगे तथा उसपर चलके लंका पहुंचेंगे । 

संपूर्ण कथा पढे - http://balsanskar.com/hindi/lekh/616_stories-of-lord-rama.html
मराठीत वाचा - http://balsanskar.com/marathi/lekh/97.html
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काशी विश्वनाथ मंदिर प्रतिष्ठापनादिन !
वाराणसीको बनारस तथा काशीके नामसे भी जाना जाता है, यह उत्तर प्रदेश राज्यका प्रमुख शहर है । पवित्र नदी गंगाके किनारे स्थित इस शहरका हिंदुओंके लिए अत्यंत धार्मिक महत्त्व है । वाराणसीमें भगवान शिवजीका विश्वनाथ मंदिर है जहां बारह ज्योतिर्लिंगोंमें से एक ज्योतिर्लिंग स्थापित है ।

अधिक जानकारी यहा पढे - http://balsanskar.com/hindi/lekh/376.html

Visit - www.Balsanskar.com/hindi/
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संत गोरक्षनाथ प्रकटदिन !
गुरु गोरखनाथ को गोरक्षनाथ भी कहा जाता है। गोरखनाथ नाथ साहित्य के आरम्भकर्ता माने जाते हैं। गोरखपंथी साहित्य के अनुसार आदिनाथ स्वयं भगवान शिव को माना जाता है। शिव की परम्परा को सही रूप में आगे बढ़ाने वाले गुरु मत्स्येन्द्रनाथ हुए। गोरखनाथ ने अपनी रचनाओं तथा साधना में योग के अंग क्रिया-योग अर्थात तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणीधान को अधिक महत्व दिया है। इनके माध्‍यम से ही उन्होंने हठयोग का उपदेश दिया ।

उनकी कथा यहा पढे - http://balsanskar.com/hindi/lekh/372.html
मराठीत वाचण्यासाठी - http://balsanskar.com/marathi/lekh/416.html
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Purandar Fort !
The history of the Purandar fort goes back to the 13th century. The Bahamani Sultans in the 14th century built here some walls and bastions. From 1484 AD, for about a hundred years, the fort remained in the hands of the Nizamshahi rulers. In 1596 AD, the fort was given as Jagir to Maloji Bhosale, grandfather of Shivaji. At the lower fort a statue of Murar Baji Prabhu has been installed in his memory. 

Read More about this fort here - http://balsanskar.com/english/lekh/177.html

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प्राणिमात्रमें आत्मियताका भाव अनुभव करनेवाली पार्वती ! 
पार्वतीने भगवान शंकरकी प्राप्ति हेतु तपश्चर्या की । भगवान शंकर प्रकट हुए तथा दर्शन दिए । उन्होंने पार्वतीसे विवाह करना स्वीकार किया तथा वे अदृश्य हो गए । इतनेमें कुछ अंतरपर तालाबमें मगरमच्छने एक लडकेको पकड लिया । लडकेके चिल्लानेकी आवाज आई । पार्वतीने ध्यानसे सुना, तो वह लडका अत्यंत दयनीय स्थितिमें चिल्ला रहा था,  ‘‘ बचाओ  .. मेरा कोई नहीं है ... बचाओ  .. !’’ लडका चिल्ला रहा है, जोरसे रो रहा है ।  पार्वतीका हृदय द्रवित हो गया । - See more at: http://balsanskar.com/hindi/lekh/679.html#sthash.IeKkxN0k.dpuf

पुरी कथा यहा पढे  - http://balsanskar.com/hindi/lekh/679.html
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नई कलाएं सीखकर छुट्टीको सार्थक करें ! 
छुट्टी अपने व्यक्तित्त्वको सुंदर आकार देनेवाली एवं नए-नए कलाकौशल सीखनेकी मुक्त पाठशाला ही है । इस छुट्टीमें मस्ती करनी ही है; परंतु साथमें नई कलाएं भी सीखनी हैं । 

अधिक जानकारी हेतु पढे:  http://balsanskar.com/hindi/lekh/519.html 
मराठीत वाचण्यासाठी:  http://balsanskar.com/marathi/lekh/1222.html
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