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युवा कवि सुशील कुमार की ताजा कविताओं का नियमित प्रकाशन -
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डी एम मिश्र की गजलों की जनपक्षधरता और समकालीनता – सुशील कुमार
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डी एम मिश्र की गजलों की जनपक्षधरता और समकालीनता – सुशील कुमार
जनधर्मी तेवर
के एक प्रतिनिधि गजलकार डी एम मिश्र की गजलों पर मेरा एक लेख  --- एम मिश्र डी की गजलों की   जनपक्षधरता और समकालीनता  –  सुशील कुमार  - हिंदी साहित्‍य की   गजल परम्‍परा पर विशेष दखल रखने वाली पत्रिका --- अलाव संपादक वरिष्‍ठ गजलकार
(रामकुमार कृषक) ...
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शब्द और काव्यभाषा - एक आलोचनातामक निबंध -सुशील कुमार
शब्द
और काव्यभाषा शब्द भाषा का भाव से जो सम्बन्ध
है , उस पर कवि-मन को लगातार काम करने की जरूरत है। शब्द  घिसते हैं , चलते-चलते उनके भाव पुराने और उबाऊ हो जाते हैं। इसलिए एक समय के बाद उक्तियाँ , मुहावरे आदि अभिव्यक्ति के ढंग में सन्निहित भाव को बदलना पड़ता ह...
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फ़रहत दुर्रानी 'शिकस्ता की गजलें
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फ़रहत दुर्रानी 'शिकस्ता की गजलें
फ़रहत
दुर्रानी ' शिकस्ता' की  सात गजलें 1. . मुल्क
से प्यार है तो इसको बचाया जाए। अस्ल
दुश्मन को सबक़ डटके सिखाया जाए। जश्न
गणतंत्र का किस तरह मनाया जाए। जब
प्रजा को ही सलीबों पे चढ़ाया जाए। है
फ़क़त शक्ति प्रदर्शन चुने गणमान्यों का ताकि
जनतंत्र को रौंदा औ ...
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कुलीन लोक से मुठभेड़ करती कविताएँ - उमाशंकर सिंह परमार
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कुलीन लोक से मुठभेड़ करती कविताएँ - उमाशंकर सिंह परमार
युवा आलोचक उमाशंकर सिंह परमार की नई आलोचना-पुस्तक है - 'पाठक का रोजनामचा' जो डायरी विधा में लिखी गई है । उन्हीं के किताब से उसका अध्याय सप्तम है जो सुशील कुमार की कविताई पर केन्द्रित है । यह जितनी समीक्षा है उतनी ही आलोचना। जितनी आलोचना है उतनी ही डायरी , य...
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'पाठक का रोजनामचा' आलोचना की किताब से उनका पूर्वकथन - "अभिप्राय "
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'पाठक का रोजनामचा' आलोचना की किताब से उनका पूर्वकथन - "अभिप्राय "
युवा आलोचक उमाशंकर सिंह परमार की नई आलोचना-पुस्तक है - 'पाठक का रोजनामचा' । उन्हीं के किताब से उनका पूर्वकथन -  अभिप्राय  साहित्य को समय के सन्दर्म में देखना समझना केवल साहित्य के लिए नहीं समय को
परखने के लिए बेहद जरूरी है । समय और साहित्य एक दूसरे के पूरक ...
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