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Vidyarthi LalQitab Haresh Pancholi
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http://www.lalqitab.com
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लालकिताब पर चर्चा करने के लिए एक नया प्लेटफोर्म तैयार कीया गया है जो की हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध है।
वेबसाइट पर फोरम वाले सेक्शन में जाकर रजीस्टरेशन करे। आप की डीटैल पुरी भरे आधे अधुरे नाम या शोर्ट नाम वालो को रजीस्टर नहीं किया जायेगा।

यह प्लेटफोर्म लालकिताब को समजने के लिए बनाया गया है जहा पर लालकिताब की अनसुलजी पहेलीओं को सुलजाने का प्रयास किया जायेगा और लालकिताब को आसानी से समजा जायेगा।

www.lalqitab.com/forum

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With Sukhwinder Sharma at Pandit Shri Rupchand Joshi Ji's baithak in April 2016. Lalkitab(LalQitab)
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First volume of LalQitab, named as "LalQitab ke Farman 1939" was published in 1939. This is the first page of original Urdu Qitab.
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First volume of LalQitab, named as "LalQitab ke Farman 1939" was published in 1939. This is the first page of original Urdu Qitab.
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in love with #lalqitab  

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वैसे पिछले एक या दो साल में कई बार कह चुका हु की माता-पिता के पैर छु कर आप अपनी ज़िंदगी बढ़िया बना सकते हो, आज सुबह उठते ही दिमाग़ में खयाल आया की शायद मैं या मेरे कुछ लालकिताब करने वाले दोस्त जानते है की माता-पिता के पैर छूने से आशीर्वाद लेने से कैसे और क्यूँ ज़िंदगी बहतर होने लगती है।
पर मेरे जो लालकिताब नहीं जानते और वो सब इस बात को सिर्फ एक अच्छी सलाह मान कर अपने काम में लग जाते है और शायद ही कोई होगा पढ़ने वालों में से जो इस सलाह पर अमल कर के अपनी ज़िंदगी को बहतर बनाने की कोशिश में लगता है।
आज माता-पिता के पैर छु कर उन के आशीर्वाद लेना कैसे और कहां पर असर करता है वो पूरी बात मुझ से जितना हो सकता है आसानी से समझाने की कोशिश कर सकता हूँ आज करूंगा।
ये सब करने की वजह ये नहीं की मुझे यहा से कोई professional benefit मिले, बल्कि मेरा असल मक़सद यह है की अगर मुझे पढ़ने वाले लोगों में से अगर 4-5 बंदे ये शुरू करेंगे तो उन का जीवन अच्छा करने का शुकुन मिलेगा।
नीचे दी हुई कुंडली में लालकिताब के अनुसार लगन को खाना नंबर 1 देकर पूरी कुंडली के 12 खाने लिख दिए गए है।
लालकिताब के अनुसार हर एक कुंडली के खाना के दो तरह के मालिक होते है, एक उस ज़मीन का मालिक दूसरा उस ज़मीन पर बने हुए मकान का मालिक।
कुंडली के 12 खानों में से सिर्फ खाना नंबर 4,9 और 10 ऐसे खाने हैं जिन के ज़मीन और मकान के मालिक एक ही है।
खाना नंबर ज़मीन का मालिक मकान का मालिक
1 सूरज मंगल
2 गुरु शुक्र
3 मंगल बुध
4 चंद्र चंद्र
5 गुरु सूरज
6 केतू बुध
7 बुध/शुक्र शुक्र
8 मंगल/शनि मंगल (बद)
9 गुरु गुरु
10 शनि शनि
11 गुरु शनि
12 राहू गुरु

ज़मीन को राशि माने और मकान को उस खाना नंबर का मालिक।

"लालकिताब" के मुताबिक ग्रह के रिश्तेदार इस प्रकार है।

गुरु - दादा, पिता, घर के बुजुर्ग

सूरज - खुद कुंडली वाला,

चंद्र - माता, माता के हैसियत वाली औरत

शुक्र - पत्नी/पति, (आज के दौर में girl friend boy friend इस में गिने जाएंगे)

मंगल - दोस्त, भाई, बहनोई, मामा

बुध - बहन, बुआ, फूफी, बेटी

सनीचर - चाचा, ताया

राहू - ससुराल (सिर्फ मर्दों के लिए - क्यूंकी "लालकिताब" के अनुसार शादी के
बाद स्त्री का घर ही उस का ससुराल हो जाता है)

केतू - बेटा, भांजा भतीजा

अब हर बार माता-पिता को पैर छु कर आशीर्वाद लेना कहा गया है उस की वजह और उस के पीछे का लॉजिक या तर्क समझते है।
माता-पिता यानि गुरु और चंद्र। ऊपर दी गई टेबल में चंद्र और गुरु जिस के मालिक है ऐसे खाने देखे तो वो इस प्रकार है -
खाना नंबर 2-4-5-8-9-10-11-12
(इस में मैंने जान बुझ कर खाना नंबर 8 लीआ है हालांकि वो चंद्र नीच का घर है ना ही इस घर का चंद्र मालिक है ना ही इस की ज़मीन का)
अब देखते है की कौन सा खाना नंबर किस चीज के लिए है और उस खाना से संबंधित कौन सी चीज कुंडली वाले को मिलती है?
खाना खाना नंबर 2 :- ये खाना कुटुंब परिवार का है साथ में मर्द का ससुराल भी यहा से पता चल सकता है। इस घर को आज का समय यानि की अंग्रेजी में कहे तो present कहा गया है या माना गया है।
खाना नंबर 4:- ये खाना सुख, शांति और समृद्धि का है।
खाना नंबर 5:- ये खाना विद्या-अभ्यास, संतान और आने वाले समय का है। (आनेवाला समय इस लिए कहा गया है की कुंडली वाले की संतान अभी आने वाली है या उस का समय यहा से देखा जाता है)
खाना नंबर 9:- यह खाना पिछला समय बताता है, पिछले समय से तात्पर्य कुंडली वाले के बुजुर्गो के हालात जिसे हम Past से जानते है।
खाना नंबर 10:- यह खाना कर्म का या अपने जॉब धंधे वगैरह का है। यहा से पिता का सुख और शादी का समय भी ("लालकिताब" के अनुसार) देखि जाता है।
खाना नंबर 11:- "लालकिताब" के अनुसार इसे रोजाना कमाई का खाना माना गया है, ये वह खाना है जहा से हरेक चीज का आना (birth or occurrence of an event) माना गया है।
खाना नंबर 12:- यह खाना परिवार बढ़ाने व परिवार की परवरिश का है। जिसे शायद वैदिक ज्योतिष में मोक्ष का खाना नंबर मानते है। (मोक्ष पर फिर किसी दिन अच्छे मूड में होने पर थोड़ी फिलसूफ़ी आप सब के सिर पर मारुंगा, :P)
"लालकिताब" के अनुसार जिस खाना नंबर का मालिक (चाहे ज़मीन का चाहे मकान का) अच्छा हो उस खाना नंबर के अच्छे फल प्राप्त होते है।
अब गौर से देखे तो कुंडली के 12 खानों में से 8 खाने है ऐसे है जिन पर किसी न किसी तरह सिर्फ दो ग्रह का असर मिलता है। वो दो ग्रह है गुरु और चंद्र।
अब आप ही सोचे की अगर सिर्फ दो ग्रह से आप अपनी कुंडली के 8 खाने को सिर्फ माता-पिता के पैर छू कर आशीर्वाद लेने से अच्छे कर सकते हो तो क्या जरूरत रह गई किसी ज्योतिष के पास जाने की या दुख सहन करने की?
अब यह आप पर निर्भर करता है की आप रोज़ रोते हुए जीना चाहते हो या हसते हसते अच्छी जिंदगी जीना चाहते हो?
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Many many happy returns of the day happy birthday Abhishek Shukla.
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With group member Shri Sukhwinder Sharma Ji at Pandit Shri Rupchand Joshi Ji's baithak.
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