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atoot bandhan
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"बदलें विचार ,बदलें दुनिया "
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इको जिंदगी की
सरिता जैन  एक बच्चे ने अपने पिता से पूंछा ," पिताजी ये जिन्दगी क्या है | और ये हम सब के प्रति अलग - अलग व्यवहार क्यों करती है |नन्हें बेटे के मुँह से ये प्रश्न सुन कर पिताजी सोंच में पड़ गए | आखिरकार उन्होंने बच्चे को जीवन की पाठशाला से सिखाने का मन बनाया | ...

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बरसने की जरुरत न पड़े
रंगनाथ द्विवेदी या खुदा-------------- उसके रोने से धुल जाये मेरी लाश इतनी,
कि बदलियो को घिर-घिर के बरसने की जरुरत न पड़े।
वे तड़पे इतना जितना ना तड़पी थी मेरे जीते,
ताकि मेरी लाश पे किसी गैर के तड़पने की जरुरत न पड़े। या खुदा---------- वे मेहंदी और चुड़ियो से इतन...

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सफल व्यक्ति ~आखिर क्या है इनमें ख़ास
पंकज प्रखर   मानव ईश्वर की अनमोल कृति है लेकिन
मानव का सम्पूर्ण जीवन पुरुषार्थ के इर्दगिर्द ही रचा बसा है गीता जैसे महान ग्रन्थ
में भी श्री कृष्ण ने मानव के कर्म और पुरुषार्थ पर बल दिया है रामायण में भी आता
है “कर्म प्रधान विश्व रची राखा “ अर्थात बिना पुरुष...

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मां ने कभी हारने नहीं दिया - पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मरियप्पन थंगावेलु के जीवन का साहस भरा जज्बा तथा जुनून
संकलन-प्रदीप कुमार सिंह मरियप्पन का जन्म तमिलनाडु के सेलम जिले से 50 किलोमीटर दूर पेरियावादागामपट्टी गांव में हुआ । बचपन में ही पिता परिवार छोड़कर चले गए। परिवार मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। चार बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी अकेले मां पर आ गई। गुजर-बसर करने के...

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लड़का हो या लड़की मकसद होता है हराना जीना इसी का नाम है - जमुना बोडो: महिला बाॅक्सर
संकलन - प्रदीप कुमार सिंह             असम के शोणितपुर जिले में छोटा सा गांव है बेलसिरि। यह ब्रह्नमपुत्र नदी के किनारे बसा आदिवासी इलाका है। घने जंगलों व प्राकृतिक
नजारों से भरपूर इस इलाके में रोजगार के नाम पर लोगों को मेहनत-मजदूरी का काम ही
मिल पाता है। कुछ...

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क्या आप वास्तव में खुश रहना चाहते हैं? :) :)
सीताराम गुप्ता कौन है जो प्रसन्न रहना नहीं चाहता? हम सभी प्रसन्न रहना चाहते हैं। प्रसन्न रहने के लिए क्या कुछ नहीं करते लेकिन फिर भी कई बार सफलता नहीं मिलती। जितना प्रसन्नता की तरफ़ दौड़ते हैं प्रसन्नता और हममें अंतर बढ़ता जाता है। यदि जीवन में सचमुच प्रसन्न र...

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मिताली ने डाइनिंग टेबल पर अपनी सारी फाइलें फैला ली और हिसाब किताब करने लगी | आखिर गलती कहाँ हो रही है जो उसे घाटा हो रहा है | कुछ समझ में नहीं आ रहा है | एक तो काम में घाटा ऊपर से कामवाली का टेंशन | महारानी खुद तो गाँव चली गयीं और अपनी जगह किसी को लगा कर नहीं गयीं | पड़ोस की निधि से कहा तो है की अपनी कामवाली से कह कर किसी को भिजवाये | पर चार दिन हो गए अभी तो दूर – दूर तक कोई निशान दिखाई नहीं दे रहे हैं | आखिर वो क्या – क्या संभाले ? अपने ख्यालों को परे झटक कर मिताली फिर हिसाब में लग गयी | तभी दिव्य कमरे में आये | उसे देख कर बोले ,” रहने दो मिताली तुमसे नहीं होगा | ये बात मिताली को तीर की तरह चुभ गयी | दिव्य को देख कर गुस्से में चीखती हुई बोली ,” क्या कहा ? मुझसे नहीं होगा ... मुझसे , मैं MBA हूँ | वो तो तुम्हारी घर गृहस्थी के चक्कर में इतने साल खराब हो गए , वर्ना मैं कहाँ से कहाँ होती | वो ठीक हैं मैडम पर आपके इस प्रोजेक्ट के चक्कर में मेरा बैंक बैलेंस कहाँ से कहाँ जा रहा है | दिव्य ने हवा में ऊपर से नीचे की और इशारा करते हुए कहा | मिताली कुछ कहने ही वाली थी की तभी बाहर से आवाज़ आई ,” लली “

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लली
मिताली ने डाइनिंग टेबल पर अपनी सारी फाइलें  फैला ली और हिसाब किताब करने लगी | आखिर गलती
कहाँ हो रही है जो उसे घाटा हो रहा है | कुछ समझ में नहीं आ रहा है | एक तो काम
में घाटा ऊपर से कामवाली का टेंशन | महारानी खुद तो गाँव चली गयीं और अपनी जगह
किसी को लगा कर न...
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