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yashoda agrawal
एक अच्छी पाठिका बनने की ख्वाहिश
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उनके दीदार की उम्मीद बस लगाए हुए
कब से बैठे हैं उनकी राह में हम आए हुए।

दिल में जलते हुए चरागो को हवा देते है
कि अपनी ज़िद से बैठे हैं शम्आ जलाए हुए ।

मेरी हरसत का आइना सवाल करता है
ये किसका चहरा हैं आप चहरे मे छुपाए हुए ।

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उसके बाद बेटे ने जो कुछ कहा उसे सुनकर पिताजी को ऐसा लगा जैसे वे वैसी ही अवस्था मे पहुंच जैसी अवस्था किसी समय उनके बेटे की हो गई थी

बेटे ने कहा था..पिताजी मेरी दुकान आठ दिनों तक बन्द रही थी. उसका क्या?
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उसके बाद बेटे ने जो कुछ कहा उसे सुनकर पिताजी को ऐसा लगा जैसे वे वैसी ही अवस्था मे पहुंच जैसी अवस्था किसी समय उनके बेटे की हो गई थी

बेटे ने कहा था..पिताजी मेरी दुकान आठ दिनों तक बन्द रही थी. उसका क्या?

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शुभ प्रभात....
खामोशियाँ बोल उठती
उदासियाँ खिलखिलाती जब
लगता गुनगुनी धूप
निकल आई हो कोहरे के बाद
अहसासों के बादल छँटते जब भी
कलम चलती तो फिर
समेट लाती ख्‍यालों के आँगन में
एक-एक करके सबको !!!!

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शुभ प्रभात....
खामोशियाँ बोल उठती
उदासियाँ खिलखिलाती जब
लगता गुनगुनी धूप
निकल आई हो कोहरे के बाद
अहसासों के बादल छँटते जब भी
कलम चलती तो फिर
समेट लाती ख्‍यालों के आँगन में
एक-एक करके सबको !!!!
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शुभ प्रभात....
जो तनहा, नहीं सरगोशियाँ थीं, कई मंजरो की,
तमाम गुजरे, पलों की फ़साने दफ़्न कर..

जिंदगी की राहों से जो गुज़री हो
जो ज़मीन न तलाश कर सकी ,
मसाइलों की क्या बात करें...
ये उम्र के हर दौर से गुज़रती है.

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शुभ संध्या..
अंजुरी में कितना जमा हो जिंदगी
बूँद बूँद पल हर पल फिसल रहे है

ख्वाहिशो की भीड़ से परेशान दिल
और हसरतें आपस में लड़ रहे है

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शुभ संध्या..
अंजुरी में कितना जमा हो जिंदगी
बूँद बूँद पल हर पल फिसल रहे है

ख्वाहिशो की भीड़ से परेशान दिल
और हसरतें आपस में लड़ रहे है
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शुभ प्रभात....
तेरी ख़ातिर आहिस्ता,
शायद क़ामिल हो जाऊँगा।
या शायद बिखरा-बिखरा,
सब में शामिल हो जाऊँगा॥

शमा पिघलती जाती है,
जब वो यादों में आती है।
शायद सम्मुख आएगी,
जब मैं आमिल हो जाऊँगा॥
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शुभ प्रभात....
तेरी ख़ातिर आहिस्ता,
शायद क़ामिल हो जाऊँगा।
या शायद बिखरा-बिखरा,
सब में शामिल हो जाऊँगा॥

शमा पिघलती जाती है,
जब वो यादों में आती है।
शायद सम्मुख आएगी,
जब मैं आमिल हो जाऊँगा॥
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