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Anju Sharma
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ऐसे जिंदा रहने से नफ़रत है मुझे
जिसमें हर कोई आए और मुझे अच्‍छा कहे
मैं हर किसी की तारीफ करता भटकता रहूं
मेरे दुश्‍मन न हों
और इसे मैं अपने हक़ में बड़ी बात मानूं...

चंद्रकांत देवताले की दस कविताएँ ........

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चंद्रकांत देवताले की कवितायें
    बेपता घर में    एक-दूसरे के बिना न रह पाने और ताज़िन्दगी न भूलने का खेल खेलते रहे हम आज तक हालाँकि कर सकते थे नाटक भी जो हमसे नहीं हुआ किंतु समय की उसी नोक पर कैसे सम्भव हमेशा साथ रहना दो का चाहे वे कितने ही एक क्यों न हों तो बेहतर होगा हम घर बना लें जग...

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किले में छेद (कहानी ) - रंजना जायसवाल
वरिष्ठ लेखिका रंजना जायसवाल कविता और गद्य दोनों विधाओं में सिद्धहस्त है!  उनकी नई कहानी  'किले में छेद' में  मानवीय संवेदनाओं और व्यवहार का सूक्ष्म विश्लेषण है!  जीवन में नैतिकता और जरूरतों के बीच का चुनाव सबके लिए इतना मुश्किल नहीं होता!  पढ़िए उनकी यह बहसत...

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जग्गा जासूस : बहुप्रतीक्षित सागा या म्यूज़िक का ओवर डोज़
कई चेतावनी वाली और कई "ठीक है मनोरंजक है ...लेकिन" वाली पोस्ट्स के बावजूद हम खुद को जग्गा जासूस देखने से रोक नहीं पाए।  रोकते भी कैसे इसकी सो कॉल्ड रिलीज लम्बे अरसे से हमारी चिंता का विषय रही है।  'बर्फी' के बाद से ही अनुराग बासु की इस फ़िल्म की बेसब्री से प...

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पत्ता टूटा डाल से
विश्व ब्लॉगर दिवस पर आज प्रस्तुत है मेरी एक कहानी...... " गामे की माँ ,
  कुछ सुना तूने , पाई
बीमार है बड़ा....."   ईश्वरी देवी ने अपने सिर की
सफ़ेद चुन्नी संभालते हुए , घुटनों पर हाथ रख , मंजी पर बैठते हुए ऐलान किया तो मंजी पर बैठी गामे
की माँ चौंक गई! " क्य...

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मुकेश के लिए
किसी शाम सोच ने करवट ली जब मन दार्शनिक हो गुनगुनाया तो गाया 'इक दिन बिक जाएगा माटी के बोल जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल' जीने की हर वजह से ऊपर यदि कोई वजह ढूंढने निकले तो कानों ने बारहा सुना, 'किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार किसी का दर्द ले सके तो ले उध...

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जड़ें : इस्मत चुगताई की कहानी
भारत पाकिस्तान विभाजन इस महाद्वीप की सबसे बड़ी घटना थी और  मुल्क के बंटवारे में जज़्बात को तकसीम होते देखना शायद उस पीढ़ी का सबसे बड़ा दुस्वप्न रहा होगा जो जमीन नहीं दिलों से जुडी हुई थी!  विभाजन की पृष्ठभूमि में रची गई जो  मार्मिक कहानियां जेहन पर आज भी काबिज़ ...

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फेसबुक पोस्ट : पर्दा
ईमानदारी से देखा जाए तो पर्दाप्रथा स्त्रियों से कहीं ज्यादा पुरुषों के आचरण पर सवाल उठाती है! सोचकर देखिये आपकी पुत्रवधू जो आपकी बेटी के समान है, परम्परा के नाम पर आपसे पर्दा करती है! जाहिर है आप उसके लिए पितातुल्य या बड़े भाईतुल्य नहीं हैं! होते तो आपसे यूँ...
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