Profile cover photo
Profile photo
Rajeev Sharma
7 followers
7 followers
About
Posts

Post has attachment
क्यों भूल गया जो था सहा
  मुझे याद क्यूँ ना कुछ रहा भूल गया क्यूँ कल का सहा पानी मे वो प्रतिबिम्ब था प्रतिबिम्ब मुझसे कहा जो तुझमे है वो उड़ेल दे हर्फों के सबको खेल दे तेरी वेदना या चेतना उसमे हो तेरा लिखा सना जो पाया मैंने संचय किया लिखने बैठा जो था सहा पर हाय रे यह क्या हुआ फिर भ...
Add a comment...

Post has attachment
हाँ पुस्तकें पुरानी है
आज भीतर जब झाँका धूल पुस्तकें दबा
रही  थी उनमे छपी हर
व्याख्या डरी सहमी सी पड़ी थी बाबा पुस्तकें
पुरानी है मै चौंका, आवाज़ सहम
गई माँ कहती है, धीमे
स्वर बोला बात संभाली और समझाई बिलकुल नई बस थोड़ी
धुल तले सोयी भीतर छपे ज्ञान की
परिभाषा न खोई    कबाड़ी वाला इसका...
Add a comment...

Post has attachment
संभालो मुझको
तुम भरे भरे से रहते
हो बिन बोले सब कहते हो खुश होते तब भी बहते
हो दुःख में भी संग
रहते हो सागर से लगे रिश्ता
गहरा छलके लगे मोती है ठहरा कभी मिलाई कभी जुदाई बिन तुम्ह्रारे कभी
न आई        भोले भाले नयन हमारे कभी कुछ न कहते
हो निकलते और बहते हो भीड़ है तन्हा र...
Add a comment...

Post has attachment
दुविधा विकट
नित खोजूं आने का कारण पर जाने का समय निकट दुविधा विकट रिश्ते थे हम जग में चलते हमारे उनपर संकट दुविधा विकट बना बनाया सब छुटेगा संग क्या जाये ये कटकट दुविधा विकट भेजा था भेजा न भेजा भेजे में भरते रहा मै चिरकुट दुविधा विकट 
Add a comment...

Post has attachment
दिल की अनसुनी
चिंगारी नफरत की
भीतर लिये फिरते रहे    रिश्ते खाक कर दोष
रिश्तों पर मढ़ते रहे तुम तो सदा तुम थे
हम समझ ना सके आइना समझा और अस्क हम
ढूढ़ते रहे संभल कर चले उम्रभर कहीं
गिर न जाएँ गिरे तो उठाने को तुम्हे
खुदा समझते रहे तुम संग थे फिर
क्यों जुदाई का अहसास दिल की ...
Add a comment...

Post has attachment

Post has attachment
ताबूत में ओढ़े कफ़न
ताबूत से पहले बुत लिये चला चलन बुत खड़ा निहारे बुत बुत का काटे कफन बुत तराश धरा से लेकर उसके संचयन यूँ चलावे हाथ ज्यूँ बुत बोले वचन प्राण संग बुत बुत रहे जगा ताबूत
में ओढ़े कफ़न 
Add a comment...

Post has attachment
अंतिम हंसी
मुझको न समझाया किसी ने ना ही था बतलाया चढा मै घोड़ी अंतिम हंसी संग बीबी रोती लाया रास्ते भर सोचता आया संगनी क्यूँ थी रोती सबको गले लगाती चलती मुझे देख चुप होती पूछा सबसे है पहली शादी वजह मुझे बतलाओ सबने दी सांत्वना कहा समय पर जग जायो धीरे धीरे समय चला समझ मु...
Add a comment...

Post has attachment
चंद विचार
बहता पानी और नए नए विचार स्वास्थ्य और समाज दोनों के लिए लाभदायक है .......... कुछ पाना है तो जो हाथ में पकडे हो उसे छोड़ो ..... जीवन में नियम उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना नदी को नदी कहलाने में दो किनारे ........... दुर्बल मानसिकता वाला व्यक्ति सबसे अधिक शार...
Add a comment...

Post has attachment
मेरी भौर हो गयी
देखो मेरी भौर हो गयी   एक डाली पर
चिडिया चहके दिवार सहारे
तुम ना चहकना वो
भूलती ना ही चहकना तुम उसके सुर या तुम्हारे
सुर ना कुछ अंतर
विशेष है   बस तुम दोनों
की चहक मेरा हर दिवस
में प्रवेश है   मौसम बांध
सके ना दोनों ना दोनों की
मीठी बोली   उठ जा अब न
तोड़ चा...
Add a comment...
Wait while more posts are being loaded