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saket suryesh
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I think. I write. Wrote collection of non-fiction Essays- If Truth Were To Be Told and a collection of Poems- Songs of Desperation, Love and Hope. Currently working on a novel on Love, tentatively titled A Difficult Love. Constant blogger at www.saketsuryesh.net
I think. I write. Wrote collection of non-fiction Essays- If Truth Were To Be Told and a collection of Poems- Songs of Desperation, Love and Hope. Currently working on a novel on Love, tentatively titled A Difficult Love. Constant blogger at www.saketsuryesh.net

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Know the Naxals- A brief look at the History
There have been many debates of late on the television, in the wake of the arrests of those who are now increasingly mentioned as the Urban Naxals. I am both shocked and amused at the same time to look at the audacity of the sympathizers of Naxal terrorism,...
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बुद्धिजीवियों की बारात
बुद्धिजीवियों की बारात शरद जी रिटायर हो चुके थे। आधार का भय आधारहीन मान कर आधार बनवा चुके थे, और पेंशन प्राप्त कर के भोपाल मे जीवनयापन कर रहे थे। एक बार बिहार जा कर शरद जी नरभसा चुके थे, पुन: नरभसाने का कोई इरादा था नहीं, सो मामाजी के राज में स्वयं को सीमित...
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Remembering the Forgotten - On 15th of August
The year is 2018. It is 72 years since we made the tryst with destiny. Pt. Jawaharlal Nehru made that tryst with destiny, and as it turned out, with the passage of time it became a tryst with dynasty. The history was appropriated with a clinical precision. ...
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क़र्ज़ की पीते थे मय
धर्म संकट में है, धर्म ध्वजा धूलि-धूसरित हवा में कटी छिपकली की पूँछ की तरह फड़फड़ा रही है। लेनदारों के भय से,चेहरे पर रूमाल बाँध कर पिछवाड़े के रास्ते से घर से पलायन करने वाले भी राह चलतों को पकड़ कर दरयाफ़्त करते हैं - भई, देश का क्या होगा। उदारीकरण के पथप...
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महाभियोग पर महाभारत
Cartoon from Emergency with due credits- Congress hasn't changed much   भारत बहुत ही मज़ेदार राष्ट्र है, सुप्रीम कोर्ट ने खाप पर प्रतिबंध लगाया। अब खाप जुटा है सर्वोच्च न्यायालय पर प्रतिबंध लगाने में । भारत में जनतंत्र आरंभ से ही ख़तरे में रहा है। कभी यह सत...
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बच्चों में कोई भेद नहीं
बच्चों में कोई भेद नहीं  अनदेखे ख़्वाबों की दो आँखें, जिन्होंने स्वप्न देखने की आयु से पूर्व दु:स्वप्न देख आँखें मूँद लीं। जो क़दम अभी चलना ही सीखे थे, लड़खड़ा कर थम गए। बचपन के घुटने की हर खरोंच, व्यस्कों के गाल पर एक तमाचा है। धर्म के आडंबरों से अछूता बाल...
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अनशन के आवश्यक अंश
अनशन के आवश्यक अंश भारतीय राजनीति में भूख का अभूतपूर्व स्थान है। बँग-भंग के समय से भूख भारतीय राजनीति की दशा का निर्धारण करती रही है और राजनीति के रथ के पहिए की धुरी रही है। एक प्लेट पूड़ी सब्ज़ी राजनैतिक जनसभाओं की सफलता का, और ग़रीबों की थाली में सजी भूख ...
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बसेसर कुछ नहीं समझता
बसेसर कुछ नहीं समझता इमेज : मालगुडी डेज : दूरदर्शन  स्मार्टफ़ोन की पिछले साल खुली फ़ैक्टरी से बाहर आकर उसने टैक्सी पकड़ ली। आज तनख़्वाह मिली थी। इस महीने घर के लिए ज़्यादा पैसे भेजने थे। जानता था पिताजी के चेहरे पर पिछले दशकों से गिरी झुर्रियों के कैक्टस मे...
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Night and Day- By Virginia Woolf- Book Review
Literature doesn't levitate over the messy mayhem of life. It is not a flower which blooms in isolation. Stories begin to breathe in the cusp of social context and the characters of the story. The delicate balance between the data and the desire, statistics...
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