Profile cover photo
Profile photo
Dinesh Thakkar
133 followers
133 followers
About
Posts

Post has attachment
Add a comment...

Post has attachment
रामनामियों की रामनवमी
रामनामियों की रामनवमी -------------------------- 17 अप्रैल, 1994 को जनसत्ता, दिल्ली के रविवारी अंक में "रामनामियों की रामनवमी" शीर्षक से मेरा आलेख प्रकाशित हुआ था. इसकी कतरन आज भी मेरे संग्रह में सुरक्षित रखी हुई है, जो कि मेरे लिए धरोहर स्वरूप है. सुधि पाठ...
Add a comment...

Post has attachment

Post has attachment
यादें : जनसत्ता दिल्ली के रविवारीय
अंक में रामनामियों पर मेरा आलेख
महानदी के तटवर्ती ग्राम ओड़काकन में आयोजित होने वाला रामनामियों का मेला और संत समागम छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोक संस्कृति और आस्था का प्रतिनिधित्व करता है। इसी विषय पर आधारित मेरा आलेख १७ अप्रैल १९९४ को जनसत्ता, दिल्ली के रविवारीय परिशिष्ट में प्रमुखता से शामिल किया गया था। इसकी कतरन मेरे संग्रह में सुरक्षित है। इसकी छाया प्रति सुधि पाठक मित्रों के लिये सादर प्रस्तुत है। जनसत्ता के कोलकाता संस्करण के प्रारंभ काल में उप संपादक और फिर उसके बाद मुम्बई संस्करण में अनुबंधित संवाददाता-लेखक बतौर कार्य करने का अवसर प्रधान संपादक श्रद्धेय प्रभाष जोशी के स्नेहमयी आशीर्वाद के फलस्वरूप ही मिला था। उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित है। .
Photo
Add a comment...

Post has attachment
उतार चढ़ाव
--------------
लाल बत्ती को उन्होंने
सिर से उतार ही दिया
मुखौटा उतारा उन्होंने
सूट बूट भी उतार दिया
शाही शानशौकतजादे
नौकरशाह साहबजादे
सबने ये दिखावा किया

उन्हें जिसने चढ़ा लिया
वह भ्रष्टाचार था
उन्हें जिसने अपनाया
वह मालदार रिश्वत थी
उन्हें जिसने चिपकाया
वह रौबदार कुर्सी थी !

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र गूगल से साभार)
http://dineshkeeduniya.blogspot.in/2017/05/blog-post_2.html#links
Photo
Add a comment...

Post has attachment

Post has attachment
उतार चढ़ाव
लाल बत्ती को उन्होंने सिर से उतार ही दिया मुखौटा उतारा उन्होंने सूट बूट भी उतार दिया शाही शानशौकतजादे नौकरशाह साहबजादे सबने ये दिखावा किया उन्हें जिसने चढ़ा लिया   वह भ्रष्टाचार था   उन्हें जिसने अपनाया   वह मालदार रिश्वत थी   उन्हें जिसने चिपकाया   वह रौबदा...
Add a comment...

Post has attachment
गिद्ध ग्रास
------------
प्रतीक्षा कर कर रहा गिद्धों का झुंड
कि शव में कब परिवर्तित हो श्रम
ताकि बनाया जा सके अपना ग्रास
और नोंच खाएं उसका अंग प्रत्यंग

एक दिन
उधार की सांसें भी गंवा देता है श्रम
टूट पड़ते हैं गिद्ध उसकी लाश पर
और उसे अपना ग्रास बना कर
एकजुट होकर नोंच खाने के बाद
उड़ जाते हैं नए शव की तलाश में !

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र गूगल से साभार)
http://dineshkeeduniya.blogspot.in/2017/05/blog-post_27.html#links
Photo
Add a comment...

Post has attachment
गिद्ध ग्रास
------------
निरंतर शोषण से मर्माहत होकर
अंतिम सांसें गिनने लगा है श्रम
दुखी होकर शोषित पसीना
सिसकने लगा छिली त्वचा पर
दिन प्रतिदिन
सभी सीमाएं लांघने लगा शोषण
और होने लगा गिद्धों का जमावड़ा

उखड़ती सांसों को समेटते हुए श्रम
हो रहा है अश्रुपूरित
होता जा रहा है समाप्त
शोषित पसीने से नमक
खून तो पहले ही चूसा जा चुका है !

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र गूगल से साभार)
http://dineshkeeduniya.blogspot.in/2017/05/blog-post_27.html#links
Photo
Add a comment...

Post has attachment
Wait while more posts are being loaded