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Vijay Krishna Mishra
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16 साल बाद कांग्रेस के हाथ में रेल मंत्रालय आया, जरा अंदाज़ा लगाये, कांग्रेस यहाँ कितने लाखो करोडो का घोटाला कर सकती है .......

धर्म- सत्य, न्याय एवं नीति को धारण करके उत्तम कर्म करना व्यक्तिगत धर्म है । धर्म के लिए कर्म करना, सामाजिक धर्म है । धर्म पालन में धैर्य, विवेक, क्षमा जैसे गुण आवश्यक है ।  लोकतंत्र में न्यायपालिका भी धर्म के लिए कर्म करती है । धर्म संकट- सत्य और न्याय में विरोधाभास की स्थिति को धर्मसंकट कहा जाता है । उस परिस्थिति में मानव कल्याण व मानवीय मूल्यों की दृष्टि से सत्य और न्याय में से जो उत्तम हो, उसे चुना जाता है । अधर्म- असत्य, अन्याय एवं अनीति को धारण करके, कर्म करना अधर्म है । अधर्म के लिए कर्म करना भी अधर्म है । कत्र्तव्य पालन की दृष्टि से धर्म (किसी में सत्य प्रबल एवं किसी में न्याय प्रबल) - राजधर्म, राष्ट्रधर्म, मंत्रीधर्म, मनुष्यधर्म, पितृधर्म, पुत्रधर्म, मातृधर्म, पुत्रीधर्म, भ्राताधर्म इत्यादि । जीवन सनातन है परमात्मा शिव से लेकर इस क्षण तक एवं परमात्मा शिव की इच्छा तक रहेगा । धर्म एवं मोक्ष (ईश्वर के किसी रूप की उपासना, दान, तप, भक्ति) एक दूसरे पर आश्रित, परन्तु अलग-अलग विषय है ......

भ्रस्टाचारी नेताओ के लिए सिर्फ एक ही सजा ----

लस्त घूसा कमर मद्धे, चापाटिका मुख भंजनम.
चरण दासी ले उदासी, बारम बार भड़ा भड्म..........

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है, "हम ओसामा बिन लादेन की पहचान के लिए उसका डीएनए टेस्ट करवाने वाले थे, लेकिन इस डर से रुक गए कि कहीं वह नारायण दत्त तिवारी का बेटा न निकले...

झुकते है पर्वत कभी कभी, रुकते है दरिया कही कही.
पर रुकती नहीं रवानिया, और झूकती नहीं जवानिया....  
योगेश्वर कृष्णा की कसम, जब तक भारत से अन्याय और अनीति का शासन ख़तम नहीं होगा, तब तक युवा शक्ति चैन से नहीं बैठेगी..... 

देह शिवा वर मोहे एह ..

दशमेश गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज द्वारा स्थापित, सिख कौम का एक अनुवांशिक एवं उत्कर्ष इतिहास रहा है ! देश,धर्म एवं समाज को समर्पित "सिख कौम" किसी
परिचय की मोहताज नहीं है ! किन्तु देश के एक उच्चपद पर स्थापित "सिख साहिबान" के कारण पूरे सिख समाज को लज्जित होना पड़ रहा है ?

शेरे पंजाब के नाम से जाने जाने वाला शेर आज "नाकारा" और "एक औरत" के हाथ की "कटपुतली" के नाम से पुकारा जाता है ?

इससे पहले की "Singh is King" रिंग मास्टर की ऊँगली पर  और नाचे "सिंह समाज" को कुछ सोचना होगा !

पुर्जा पुर्जा कट मरे, कभू ना छाडे खेत ! .....

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"क्रिश्न्वंतो विस्वमार्ज्यामी" --- Salute to our Divine master..."Yogiraj Krishna"..........Hare Rama Hare Krishna.  

राम सेतु - लाभ या समस्या --

राम सेतु, राम सेतु हाय राम सेतु , आज कल कोई इसे तोड़ने के लिए लड़ रहा है तो कोई बचाने के लिए,लेकिन इसमें ऐसा है क्या जो सबकी की चिंता का विषय बना हुआ है । चलिए आज मैं इससे सम्बंधित प्रत्यक्ष लाभ तथा संभावित समस्याओ का विश्लेषण करूँगा, जो की बिन्दुबार निम्नलिखित है- लाभ-

१-धार्मिक आस्था - राम सेतु सनातन धर्म में मुख्य स्थान रखता है जिसके अनुसार राम सेतु का निर्माण श्री राम जी की सेना के द्वारा लंका विजय के लिए किया गया था जिसके प्रमाण सनातन ग्रंथो में दिए है तथा इसकी पुष्टि भी नासा ने की है । इस्लाम और इसाई धर्म में इसका उल्लेख "आदम के ब्रिज" के नाम से किया गया है और यही नाम हमारी सरकार ने इतिहास और भूगोल में वर्णन के लिए चुना है । 

२- आर्थिक महत्व- राम सेतु से सम्बंधित पूरे क्षेत्र में थोरियम प्रचुर मात्र में पाया जाता है जो की नाभिकीय ऊर्जा का मुख्य श्रोत है जिससे लगभग भारत १५० वर्षो तक बिजली का उत्पादन कर सकता है जो की आजकल भारत सरकार यूरेनियम के लिए कभी आस्ट्रेलिया तो कभी कनाडा से भीख मांगती है की यूरेनियम दे दो बिजली बनानी है, और इस थोरियम के कचरे को पाने के लिए अमेरिका लार टपका रहा है जिसे हमारे बिके हुए शीर्ष नेता पेट्रोल, डीज़ल बचत के नाम पर अमेरिका को देना चाहते है । चूकि किसी भी देश का महाशक्ति बनाने में उसका ऊर्जा में आत्मनिर्भर होना आवश्यक होता है अत: अमेरिका जैसे देश मित्रता के नाम पर देशद्रोहियों के साथ मिलकर भारत की रीढ़ तोड़ना चाहते है । अब दूसरा आर्थिक महत्त्व मछुवारो से जुड़ा है चूकि यह एक हस्तक्षेप रहित क्षेत्र है तो यहाँ मछलिया अधिक मात्र में पायी जाती है जो की मछुवारो का मुख्य रोज़गार है और भारत के निर्यात का मुख्य अंग जिससे हमें विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है ।तीसरा आर्थिक महत्व मन्नार की खाड़ी एक जैव विविधता संरक्षित क्षेत्र है जिसमें कई विलुप्त प्राय: समुद्री जीवो का संरक्षण किया जा रहा है जिनका जीवन समुद्र के संतुलन के लिए आवशयक है ।

३- राजनैतिक महत्व- रामसेतु , भारत तथा श्री लंका के मध्य एक बांध का काम करता है जो की भारत को किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से भारत को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है और भारतीय जल सेना पर दबाब कम होता है , और बंगाल की खाड़ी को जाने वाले जहाजों को पूरा श्री लंका घूम के जाना पड़ता है जो की पूर्वी घाट के क्षेत्रो को विदेशी तथा आतंकी हस्तक्षेप से प्रत्यक्ष रूप से सुरक्षा प्रदान करता है, और भारत की एकता और अखंडता के लिए सहायक है ।
4- प्राक्रतिक आपदाओ से बचाव- प्रक्रति के रौद्र रूप के सामने सभी कृत्रिम संसाधन बेबस हो जाते है पर रामसेतु सुनामी जैसी आपदा को रोकने और उसकी विनाशक शक्ति को कम करने का काम करता है जिससे दक्षिण भारत के कई राज्यों को प्राक्रतिक रूप इन अपदाओ से सुरक्षा मिलती है , और इसका प्रमाण २००४ में आई सुनामी में मिल चुका है । 

समस्या- 

अब बात करते है समस्याओ की - १- आर्थिक समस्या - रामसेतु के हटाने से और वहां से एक अन्तररास्ट्रीय मार्ग बनाने से थोरियम का नुकसान होगा, जो की भारत के भविष्य के ऊर्जा हितो के विरुद्ध है ।मछलिया नहीं रहेगी जो की मछुवारो का मुख्य रोज़गार है जिससे बेरोज़गारी बढेगी और साकार का काम रोज़गार देना है छिनना नहीं । मन्नार की खाड़ी का जैव विविधिता क्षेत्र नस्ट हो जाएगा जिससे समुद्र की जैव विविधिता में असंतुलन उत्पन्न होगा जो की भविष्य में एक बहुत बड़े विनाश का कारण बनेगा । 

२- राजनैतिक समस्या- राम सेतु से अन्तररास्ट्रीय मार्ग गुजरने से विदेशी जहाजों की उपस्थिति बढेगी जिससे भारतीय जल सेना पर दबाब बढेगा , पूर्वी घाट असुरक्षित होगे और मुंबई जैसी घटनाये पूर्वी तटों से लगे शहरों में हो सकती है।

३- अपदाओ की समस्या- राम सेतु हटाने से सुनामी जैसी अपदाओ से भारत असुरक्षित रहेगा तथा सभी दखिन भारतीय राज्यों को खतरा उत्पन्न हो जाएगा जिससे होने वाली क्षति निचित रूप से भयंकर और अगणनीय होगी ।

निष्कर्ष - यदि भारत सरकार राम सेतु को हटती है तो संभावना है की उसे रोज़ १० करोड़ का फायदा हो लेकी निश्चित रूप से उसे १००० करोड़ का रोज़ नुकसान होगा और भविष्य में अनेक विकराल समस्याओ को दावत दी जा रही है। अमेरिका , फ़्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भारत सरकार की पीठ जरुर थपथपाए लेकिन इसकी भरपाई भारत की जनता और आने वाली पीढियां करेगी ।

भारतवर्ष को प्राचीन ऋषियों ने"हिन्दुस्थान" नाम दिया था जिसका अपभ्रंश "हिन्दुस्तान" है।

"बृहस्पतिआगम" के अनुसार:

हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥

अर्थात, हिमालय से प्रारम्भ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है।हिन्दू शब्द उस समय धर्म की बजाय राष्ट्रीयता के रुप में प्रयुक्त होता था। चूँकि उस समय भारत में केवल वैदिक धर्म को ही माननेवाले लोग थे, बल्कि तब तक अन्य किसी धर्म का उदय नहीं हुआ था इसलिये"हिन्दू" शब्द सभी भारतीयों के लिये प्रयुक्त होता था। भारत में केवल वैदिक धर्मावलम्बियों (हिन्दुओं) के बसने के कारण कालान्तर में विदेशियोंने इस शब्द को धर्म के सन्दर्भ में कहना शुरु कर दिया।

संक्षेप में, हिन्‍दुत्‍व के प्रमुख तत्त्व निम्नलिखित हैं-हिन्दू-धर्म हिन्दू-कौन?-- गोषु भक्तिर्भवेद्यस् यप्रणवे च दृढ़ा मतिः। पुनर्जन्मनि विश्वासः स वै हिन्दुरिति स्मृतः।। अर्थात-- गोमाता में जिसकी भक्ति हो, प्रणव जिसका पूज्य मन्त्र हो, पुनर्जन्म में जिसका विश्वास हो-वही हिन्दू है। मेरुतन्त्र ३३ प्रकरण के अनुसार ' हीनं दूषयति स हिन्दु ' अर्थात जो हीन ( हीनता या नीचता ) को दूषित समझता है (उसका त्याग करता है) वह हिन्दु है। लोकमान्य तिलक के अनुसार असिन्धोः सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारतभूमिका। पितृभूः पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरिति स्मृतः।। अर्थात्- सिन्धु नदी के उद्गम-स्थान से लेकर सिन्धु (हिन्द महासागर) तक सम्पूर्ण भारत भूमि जिसकी पितृभू (अथवा मातृ भूमि) तथा पुण्यभू ( पवित्र भूमि) है, ( और उसका धर्म हिन्दुत्व है ) वह हिन्दु कहलाताहै। हिन्दु शब्द मूलतः फा़रसी है इसकाअर्थ उन भारतीयों से है जो भारतवर्ष के प्राचीन ग्रन्थों, वेदों, पुराणों में वर्णित भारतवर्ष की सीमा के मूल एवं पैदायसी प्राचीन निवासी हैं। कालिका पुराण, मेदनी कोष आदि के आधार पर वर्तमान हिन्दू ला के मूलभूत आधारों के अनुसार वेदप्रतिपादित रीतिसे वैदिक धर्म में विश्वास रखने वाला हिन्दू है।

पारसी समाज के एक अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थ में लिखा है कि, "अक्नुम बिरह्मने व्यास नाम आज हिंद आमद बस दाना कि काल चुना नस्त"। अर्थात व्यास नमक एक ब्र्हामन हिंद सेआया जिसके बराबर कोई अक्लमंद नही था। इस्लाम के पैगेम्बर मोहम्मद साहब से भी १७०० वर्ष पुर्व लबि बिन अख्ताब बिना तुर्फा नाम के एक कवि अरब में पैदा हुए। उन्होंने अपने एक ग्रन्थ में लिखा है!!!

"अया मुबार्केल अरज यू शैये नोहा मिलन हिन्दे। व अरादाक्ल्लाह मन्योंज्जेल जिकर्तुं॥

अर्थात हे हिंद कि पुन्य भूमि! तू धन्य है,क्योंकि ईश्वर ने अपने ज्ञान के लिए तुझे चुना है।

१० वीं शताब्दी के महाकवि वेन .....अटल नगर अजमेर,अटल हिंदव अस्थानं ।

महाकवि चन्द्र बरदाई.........जब हिंदू दल जोर छुए छूती मेरे धार भ्रम ।

जैसे हजारो तथ्य चीख-चीख कर कहते है की हिंदू शब्द हजारों-हजारों वर्ष पुराना है।

इन हजारों तथ्यों के अलावाभी लाखों तथ्य इस्लाम के लूटेरों ने तक्ष शिला व नालंदा जैसे विश्व -विद्यालयों को नष्ट करके समाप्त कर दिया।

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भारत माता के कोख बड़ी ऊर्वरक है, इसमें खर पतवार से लेकर सिंह तक पैदा हुए है,  उन्ही सिंहो  में से एक थे ----- "बाप्पा रावल" जिनका नाम सुनकर ही मलेक्छो के हाथ पाँव ठन्डे पड़ जाते थे और उनका शरीर पीला पड़ जाता था.  भारत माता के इस सिंह पुत्र की हुंकार सुनकर मलेच्छो की स्त्रिओ का गर्भपात हो जाता था ......  ऐसे महावीर योद्धा बाप्पा रावल को मेरा सत सत नमन  .......   
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