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Amit Srivastava
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" एक सुनहरी सुबह बनाम अधखुले नयन ......"
क्षितिज पर टिकी सुनहरी सुबह ये  और उससे भाप रौशनी की उठते हुये   जैसे अधखुले नयन हों तेरे  और पलकों की क्षितिज पर ठहरी निगाहें  हवाएं चलीं जब कुछ हौले से यूं  कुछ तो कहा है तुम्हारे लबों ने जैसे  बाहें फैलाए समेट न लूँ इन फ़िज़ाओं को  जैसे घुल जाता था मै तेरे...
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" बदतमीज कौन ......"
मुझे शिक्षण कार्य को करते हुए लगभग तीस वर्ष हो गए | एक किस्सा अक्सर याद आ जाता है | मेरी कक्षा में तीन विद्यार्थी अत्यंत मेधावी थे | तीनो ही अपने विषयों को भलीभांति पढ़ते एवं समझते थे | प्रदेश स्तर पर उनके द्वारा रैंक प्राप्त करने की संभावनाओं को देखते हुए उ...
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" ज़िंदगी का तर्जुमा ....."
Not forever does the bulbul sing In balmy shades of bowers, Not forever lasts the spring Nor ever blossom the flowers. Not forever reigneth joy, Sets the sun on days of bliss, Friendships not forever last, They know not life,who know not this. ~Khushwant Si...
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" खरोंच ....."
वास्ता रोज़ ही होता है, गुफ़्तगू मगर नही होती। जुगनू तो मचलते रोज़, मगर रोशनी नही होती। मुख्तलिफ अंदाज़ उनके, मुख्तसर सी ज़िन्दगी अपनी। दुआओं में तो रखते खूब, कहर भी वो मेरे नाम करते। मोहब्बत की खरोंच सारी अब, जिस्म पे मेरे सरेआम कर दी।
" खरोंच ....."
" खरोंच ....."
amit-nivedit.blogspot.com
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" मिड नाईट इंक ...."
नींद का क्या है जब आएगी तब आएगी, ख्वाब तो उनके तस्व्वुर का पलकों पे है। जान का क्या है जब जाएगी तब जाएगी, खयाल तो एक शाम उनका होने का है। उसूलों की बात जब होगी तब होगी, रिवाज़ तो अभी मोहब्बत निभाने का है। नाम उनकी जुबां पे जब होगा तब होगा, हिचकी मेरे ख़्याल स...
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" बारिश ......"
'बादल' जब सागर का समर्पण संजोते संजोते थक जाते हैं और हवाएं भी साथ नही देती तो 'बारिश' बन फना हो जाते हैं। लफ़्ज़ों का समर्पण संजोते संजोते आंखें थक जाती हैं और पिघल कर पैमाना बन जाती हैं। लम्हों का समर्पण संजोते संजोते काल खंड फना हो जाते हैं। समर्पित हों जा...
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" गुरु पूर्णिमा ....."
खरी खरी -------------- मुझे शुरुआती पढ़ाई से लेकर प्रोफेशनल पढ़ाई तक कोई भी शिक्षक ऐसा नही मिला जिसने कोई ऐसी किताबी शिक्षा दी हो या जीवन का मंत्र दिया हो जिसके लिये उन्हें याद रख सकूँ या श्रद्धा उमड़ पड़े। जो भी शिक्षक मिले ,वे सारे आम लोगों की तरह ही पढ़ने वाल...
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झुकी निगाहें........"
डूबता सूरज झुकी निगाहें तासीर एक सी बादलों की ओट पलकों का आगोश मद्धम सा उजाला बिखरी सी किरणे खुशबू सी नज़रें खिंचती सी लकीर ज़ुल्फें आड़ी तिरछी जैसे आसमान का कगार डूबती रही शाम लिए लाल से होंठ जैसे लालिमा सूरज की।
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" मै ,तुम और हम ......."
लोग बारिश की तमन्ना रखते हैं, हम तो ओस में ही महक उठते हैं। लकीरें थी तो अमीरी की मेरे हाथों में, इश्क में उनके इश्क फकीरी से कर बैठे। जानकर जान का हाल जानते नही वो, जान जाती उनकी भी है मेरी जान पर। सलामत रहे वो अपनी दरों दीवार में, हम उनकी खुशबुओं में तसल्...
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" वो नाम एक.........."
लिखो कुछ .... उसने कहा। ----------------------------------------- लिखा तो कितनी बार वो नाम एक मिटाया कितनी बार वो नाम एक महक जाती हैं अंगुलियाँ मेरी जब जब लिखता वो नाम एक मन्त्र सुना तो नही मन्त्र पढ़ा भी नही पर मन्त्र तो है वो नाम एक गुनगुनाता हूँ जब वो नाम...
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