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Amit Srivastava
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" मै ,तुम और हम ......."
लोग बारिश की तमन्ना रखते हैं, हम तो ओस में ही महक उठते हैं। लकीरें थी तो अमीरी की मेरे हाथों में, इश्क में उनके इश्क फकीरी से कर बैठे। जानकर जान का हाल जानते नही वो, जान जाती उनकी भी है मेरी जान पर। सलामत रहे वो अपनी दरों दीवार में, हम उनकी खुशबुओं में तसल्...

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" वो नाम एक.........."
लिखो कुछ .... उसने कहा। ----------------------------------------- लिखा तो कितनी बार वो नाम एक मिटाया कितनी बार वो नाम एक महक जाती हैं अंगुलियाँ मेरी जब जब लिखता वो नाम एक मन्त्र सुना तो नही मन्त्र पढ़ा भी नही पर मन्त्र तो है वो नाम एक गुनगुनाता हूँ जब वो नाम...

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" प्लीज़........."
आदरणीय/या प्रधानाचार्य/या आपने संकल्प दिलाया था कि आज पहली जुलाई को  # हिन्दीब्लॉगिंगदिवस  के रूप में मनाये जाने के उपलक्ष्य में ब्लॉग लेखन किया जाना अनिवार्य है। सादर अवगत कराना है कि कार्यालय में अचानक से व्यस्तता बढ़ जाने के कारण देर शाम लगभग रात साढ़े नौ ...

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"खामोश निगाहें...."
आंखों ने तेरी फिर बेचैन किया कभी तो इतने सवाल और कभी प्यार ही प्यार किया खामोश निगाहें और लरजते होंठ जैसे बन्द किताब कोई फड़फड़ाती हो कोने से यह काजल की लकीरें या नाँव में लिपटी रस्सी कोई खींच उसे क्यूँ तैरा न लूँ दिल मे अपने "आना करीब तुम कभी इतना काश बन्द प...

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" एक सिंदूरी सी शाम......."
एक सिंदूरी सी शाम थी, कुछ उजली सी यादें थीं, सामने समंदर था किनारा था, रेत थी भर नज़र नज़ारा था, लहरें उमड़ती पास उसके आती, दौड़ती पकड़ती वह उन्हें पांव से, पर लहरें ठहरी कब कहाँ, उन्हें तो जाना होता वापस न, किनारों से कर किनारा, फिर समंदर में ही शायद, प्यार भी ...

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"क्या लिखा मेरे लिए........"
सवाल उसका, क्या लिखा मेरे लिए, अश्क अश्क स्याही किया सिर्फ उसके लिए, सफों पर उसका, ज़िक्र जब भी किया, लफ़्ज़ों ने लफ़्ज़ों से, इश्क कर लिया, भूल न पाऊँ अब, कुछ वो ऐसा कर गया, सीने में मेरे, दिल अपना धर गया, सब्र से पी रहा था, ज़हर जिंदगी का, अमृत सा कहर, वह निगाह...

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" कितनी शामें बीत गई यूं......."
सो लो न आज कांधे पर, अरसा हुआ सहारा लिए, कुछ सांसे तुम्हारी हो, कुछ बीच मे हमारी हो, थाम अंगुलियां यूं हथेलियों में, कह जाओ सब वो ख्वाब अपने, कितनी शामें बीत गई यूं, बेचैनी में तब्दील हुए।

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" प्यार की प्रकृति ........."
सूने आसमान पे चाँद, उजले माथे पे बिंदिया, चाँद पर तैरते बादल, आँखों से रिसता काजल, बुलबुल की आवाज़, जल तरंग सी साज़, रेशम रेशम सी हवा, या अँगुलियों की थिरकन, प्रकृति सा प्यार है ये या प्यार की प्रकृति आसमां ताकते ताकते प्यारा धरा से हो गया।

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"योर नोज़ इज़ वेरी टेस्टी........"
उस उदास लड़के की अंगुलियाँ अपने हाथों में लिए यूं एक एक कर मोड़ तोड़ कर वह लड़की देख टटोल रही थी मानो वहां कहीं एक प्रेशर पॉइंट हो और उसे दबाते ही उस लड़के की उदासी गायब हो जायेगी। हुआ भी कुछ ऐसा ही। लड़के ने कहा,तुम्हारे हाथ में जादू है क्या, छूती तुम अंगुलियों ...

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