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Mridul Tripathi
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Do hard work positively and get your destiny
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कलियुग की रामायण का राम चला गया.. मेरे देश का कलाम चला गया... जो देता था एकता का पैगाम वोह कलाम चला गया ....जिनसे हुई🇪🇬 दुश्मनो की नींद हराम वोह कलाम चला गया ...जिसने दिया देश को परमाणु सलाम वोह कलाम चला गया क्या बताऊ दोस्तों वतन का सबसे बड़ा हमनाम चला गया ...मेरा कलाम चला गया.. हमारा कलाम चला गया...
🇪🇬🇪🇬For .Dr. Kalam

अब पता चला
आसमान बरस नहीं
रो रहा था
वो जानता था
एक फरिश्ता आज
हमेशा के लिए
सो रहा था

वो "कलाम" नहीं कमाल थे...
"मिसाइलमैन" वो बेमिसाल थे.....!!
उनकी खूबियां
करती रहेगीं पथ प्रदर्शन मेरा...
वो मेरी मातृभूमि की ढाल थे...!!!

भावपूर्ण श्रद्धांजली😔



Don't declare holiday on my death,
Instead work an extra day if u love me..
"Dr. Kalam"

मेरे मन में मेरे सभी भारतीय भाई बहिनों के लिये कुछ प्रश्न हैं जिनके उत्तर में काफी समय से खोज रहा हूँ परंतु अब मैं उन प्रश्नों के उत्तर खोजने में आप सब की सहायता लेना चाहता हूँ क्या आप मेरी सहायता करने के लिये तैयार हैं?
1. क्यों हम भारतीय विश्वा के समस्त समुदाय के त्यौहारों को उत्साह के साथ मनाते हैं जबकि हम अपने ही त्योहार भूल जाते हैं और विश्वा के किसी भी देश के समुदाय के व्यक्ती हमारे त्योहार नहीँ मनाता फ़िर हम क्यों ? 
2. क्यों हम भारतीय विश्वा के समस्त समुदायों की खुशी में ख़ुश होते हैं जबकि वो हमे ख़ुश होते हुये नहीँ देखना चाहते फ़िर हम क्यों ? 
3. क्यों हम भारतीय विश्वा के समस्त समुदायों मेंसे किसी के भी दुखी होने पर दुखी हो जाते हैं जबकि वो सब के सब हमारे दुखी होने पर खुशियाँ मनाते हैं फ़िर हम क्यों ? 
मेरे जिस किसी भी भारतीय भाई बहिन के पास मेरे प्रश्नों के उत्तर हो तो वह शीघ्र ही व्याख्या वाले खंड में मेरे प्रश्नों की व्याख्या करे ! 
धन्यवाद

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पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है...
अभी तो आए है जमीं पर...
आसमान की उडान अभी बाकी है...
अभी तो सुना है लोगो ने सिर्फ मेरा नाम...
अभी इस नाम कि पहचान बनाना बाकी है...

बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर...
क्योंकि मुझे अपनी औकात
अच्छी लगती है..






मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में
रहना ।।







चाहता तो हु की
ये दुनिया
बदल दू
पर दो वक़्त की रोटी के
जुगाड़ में फुर्सत नहीं मिलती
दोस्तों





महँगी से महँगी घड़ी पहन कर देख ली,
वक़्त फिर भी मेरे हिसाब से
कभी ना चला ...!





युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे ..
पता नही था की, 'किमत
चेहरों की होती है!!'






अगर खुदा नहीं हे तो उसका ज़िक्र
क्यों ??
और अगर खुदा हे तो फिर फिक्र
क्यों ???




"दो बातें इंसान को अपनों से दूर कर
देती हैं,
एक उसका 'अहम' और
दूसरा उसका 'वहम'......





" पैसे से सुख कभी खरीदा नहीं जाता
और दुःख का कोई खरीदार नहीं होता।"




मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी मे लोग जीने नहीं देते।



माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"






दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है
या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नही




ज़िन्दगी में ना ज़ाने कौनसी बात
"आख़री" होगी,
ना ज़ाने कौनसी रात "आख़री" होगी ।
मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक
दूसरे से,
ना जाने कौनसी "मुलाक़ात"
आख़री होगी ....।।।।



अगर जींदगी मे कुछ पाना हो तो
तरीके बदलो,....ईरादे नही....||


ग़ालिब ने खूब कहा है :
ऐ चाँद तू किस मजहब का है !!
ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा!!
Dedecated to all people's

"झूम ले, हंस बोल ले, प्यारी अगर है ज़िन्दगी,
सांस के बस एक झोंके का सफ़र है ज़िन्दगी,
ज़िन्दगी में जो भी करना चाहता है कर गुजर,
क्या पता बरसों कि है, या लम्हा भर है ज़िन्दगी."

इतना आसान हुँ कि हर किसी को समझ आ जाता हुँ !
शायद तुमने ही पन्ने छोङ छोङ कर पढा मुझे !

दो मशहूर शायरों के
अपने-अपने अंदाज़ ...
🔻
पहले मिर्ज़ा गालिब :

"उड़ने दे इन परिंदों को
आज़ाद फिजां में 'गालिब'
जो तेरे अपने होंगे
वो लौट आएँगे..."
🔻
शायर इकबाल का उत्तर -

"ना रख उम्मीद-ए-वफ़ा
किसी परिंदे से ...
जब पर निकल आते हैं ...
तो अपने भी
आशियाना भूल जाते हैं..."

एक ख़याल बस यूँ ही .... मैंने ज़िन्दगी को खेल समझा ,और उसने ,मुझे खिलौना बना दिया !अब लोग आते हैं ,खेलकर चले जाते हैं !डर लगता है ...कहीं किसी हाथ से छूट न जाऊं कहीं किसी रोज़ टूट न जाऊं ...... !!

जब बचपन था, तो जवानी एक ड्रीम था...
जब जवान हुए, तो बचपन एक ज़माना था... !!

जब घर में रहते थे, आज़ादी अच्छी लगती थी...

आज आज़ादी है, फिर भी घर जाने की जल्दी रहती है... !!

कभी होटल में जाना पिज़्ज़ा, बर्गर खाना पसंद था...

आज घर पर आना और माँ के हाथ का खाना पसंद है... !!!

स्कूल में जिनके साथ ज़गड़ते थे, आज उनको ही इंटरनेट पे तलाशते है... !!

ख़ुशी किसमे होतीं है, ये पता अब चला है...
बचपन क्या था, इसका एहसास अब हुआ है...

काश बदल सकते हम ज़िंदगी के कुछ साल..

.काश जी सकते हम, ज़िंदगी फिर एक बार...!!


 जब हम अपने शर्ट में हाथ छुपाते थे
और लोगों से कहते फिरते थे देखो मैंने
अपने हाथ जादू से हाथ गायब कर दिए
|

✏जब हमारे पास चार रंगों से लिखने
वाली एक पेन हुआ करती थी और हम
सभी के बटन को एक साथ दबाने
की कोशिश किया करते थे |

 जब हम दरवाज़े के पीछे छुपते थे
ताकि अगर कोई आये तो उसे डरा सके..👥


जब आँख बंद कर सोने का नाटक करते
थे ताकि कोई हमें गोद में उठा के बिस्तर तक पहुचा दे |


सोचा करते थे की ये चाँद
हमारी साइकिल के पीछे पीछे
क्यों चल रहा हैं |


🔦On/Off वाले स्विच को बीच में
अटकाने की कोशिश किया करते थे |


🍏🍑🍈 फल के बीज को इस डर से नहीं खाते
थे की कहीं हमारे पेट में पेड़ न उग जाए |


 बर्थडे सिर्फ इसलिए मनाते थे
ताकि ढेर सारे गिफ्ट मिले |

🔆फ्रिज को धीरे से बंद करके ये जानने
की कोशिश करते थे की इसकी लाइट
कब बंद होती हैं |


🎭 सच , बचपन में सोचते हम बड़े
क्यों नहीं हो रहे ?


और अब सोचते हम बड़े क्यों हो गए ?


ये दौलत भी ले लो..ये शोहरत भी ले लो💕


भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी...

मगर मुझको लौटा दो बचपन
का सावन ....k.

वो कागज़
की कश्ती वो बारिश का पानी..
..............
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