Profile cover photo
Profile photo
Nirmala prasad
3 followers
3 followers
About
Nirmala prasad's posts

Post has shared content
 शिव को प्रसन्न करने के उपाय💐
भगवान शिव को आशुतोष (तत्काल प्रसन्न 
होने वाले) कहा गया है। वे जल व बिल्वपत्र 
से ही प्रसन्न होने वाले देवता हैं। "शिव महा
पुराण" में कहा गया है कि 
त्रि दलम्‌ त्रि गुणाकारम्‌, 
त्रि नेत्रम्‌ च त्रयायुधम्‌।
त्रि जन्म पाप संहारम्‌, 
एक बिल्व शिर्वापणम्॥
अर्थात् - तीन दलों (पत्तियों) से युक्त एक 
बिल्वपत्र जो हम शिव को अर्पण करते हैं, 
वह हमारे तीन जन्मों के पापों का नाश 
करता है तथा त्रिगुणात्मक शिव की कृपा 
भौतिक संसाधनों से युक्त होती है । अत: 
श्रावण मास में भगवान भोले को इनके 
अर्पण करने से अधिक फल प्राप्त होता 
है । श्रावण माह के प्रत्येक सोमवार को 
शिवलिंग पर शिवामुट्ठी चढ़ाई जाती है । 
जिसमें :
* प्रथम सोमवार को कच्चे चावल एक 
मुट्ठी चढ़ाना शुभ होता है।
* दूसरे सोमवार को सफेद तिल्ली एक 
मुट्ठी चढ़ाया जाता है।
* तीसरे सोमवार को खड़े मूंग की एक 
मुट्ठी चढ़ाना चाहिए।
* चौथे सोमवार को जौ एक मुट्ठी चढ़ाने 
का महत्व है।
* श्रावण मास में अगर पांचवां सोमवार 
भी आ जाता है, तो सतुआ चढ़ाने का 
महत्व हैं ।
भगवान शिव का व्रत सभी मनोकामनाओं 
को पूर्ण करने वाला है।
पवित्र सावन मास के शुभारम्भ के अवसर 
पर आप सभी को अनन्त शुभकामनाये...
भगवान भोलेनाथ,माँ पार्वती सहित समस्त 
देवी देवताओं की कृपा आप पर बरसे.....|
Photo

Post has shared content
 शिव को प्रसन्न करने के उपाय💐
भगवान शिव को आशुतोष (तत्काल प्रसन्न 
होने वाले) कहा गया है। वे जल व बिल्वपत्र 
से ही प्रसन्न होने वाले देवता हैं। "शिव महा
पुराण" में कहा गया है कि 
त्रि दलम्‌ त्रि गुणाकारम्‌, 
त्रि नेत्रम्‌ च त्रयायुधम्‌।
त्रि जन्म पाप संहारम्‌, 
एक बिल्व शिर्वापणम्॥
अर्थात् - तीन दलों (पत्तियों) से युक्त एक 
बिल्वपत्र जो हम शिव को अर्पण करते हैं, 
वह हमारे तीन जन्मों के पापों का नाश 
करता है तथा त्रिगुणात्मक शिव की कृपा 
भौतिक संसाधनों से युक्त होती है । अत: 
श्रावण मास में भगवान भोले को इनके 
अर्पण करने से अधिक फल प्राप्त होता 
है । श्रावण माह के प्रत्येक सोमवार को 
शिवलिंग पर शिवामुट्ठी चढ़ाई जाती है । 
जिसमें :
* प्रथम सोमवार को कच्चे चावल एक 
मुट्ठी चढ़ाना शुभ होता है।
* दूसरे सोमवार को सफेद तिल्ली एक 
मुट्ठी चढ़ाया जाता है।
* तीसरे सोमवार को खड़े मूंग की एक 
मुट्ठी चढ़ाना चाहिए।
* चौथे सोमवार को जौ एक मुट्ठी चढ़ाने 
का महत्व है।
* श्रावण मास में अगर पांचवां सोमवार 
भी आ जाता है, तो सतुआ चढ़ाने का 
महत्व हैं ।
भगवान शिव का व्रत सभी मनोकामनाओं 
को पूर्ण करने वाला है।
पवित्र सावन मास के शुभारम्भ के अवसर 
पर आप सभी को अनन्त शुभकामनाये...
भगवान भोलेनाथ,माँ पार्वती सहित समस्त 
देवी देवताओं की कृपा आप पर बरसे.....|
Photo

Post has shared content
🎀 जानिए कैसे मनाए रक्षाबंधन
का पर्व💃

🎀रक्षाबंधन के पर्व की वैदिक विधि💫

👏वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि🙇

👉इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है।

(१) दूर्वा (घास)
(२) अक्षत (चावल)
(३) केसर
(४) चन्दन
(५) सरसों के दाने (वास्तव में पिला दाना वाला सरसों कहलाती है)

👉 इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें,
फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।

👉इन पांच वस्तुओं का महत्त्व👇

(१) दूर्वा-जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो ।

सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बदता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए ।

(२) अक्षत-हमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।

(३) केसर-की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो ।

(४) चन्दन-की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।

(५) सरसों के दाने की प्रकृति तीक्ष्ण होती है। अर्थात इससे यह संकेत मिलता है, कि समाज के दुर्गुणों को,
कंटकों को समाप्त करने में हम
तीक्ष्ण बनें । इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम। भगवान या गुरुजी की चित्र पर अर्पित करें ।

फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने
बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ
संकल्प करके बांधे । इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं। हम पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सूखी रहते हैं ।

🎀राखी बाँधते समय बहन यह मंत्र बोले👇

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल: | तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल ||

🎀 शिष्य गुरु को रक्षासूत्र बाँधते समय👇

‘अभिबन्धामि ‘ के स्थान पर ‘रक्षबन्धामि’| कहे!

🍫चाकलेट 🍖 ना खिलाकर भारतीय 🍧 मिठाई या गुड से मुहं मीठा कराएँ। अपना देश अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति अपनी भाषा आदि का गौरव बढ़ाएँ।

💥हिन्दू सभ्यता की जय👏
Photo

Post has shared content
गुरुवार का दिन बृहस्पति आराधना के लिए नियत है जो आपकी तकदीर और घर की तस्वीर को तुरंत बदल सकता है यदि आप श्रद्धापूर्व मन में पूर्ण विश्वास के साथ कर रहे है
जब किसी व्यक्ति को हर मनचाहा सुख मिलता है, तब वह स्वयं को खुशकिस्मत मानता है। किंतु थोड़ा ही कष्ट मिलने पर वह स्वयं की किस्मत को कोसने लगता है। तब वह उनसे छुटकारे के लिए तरह-तरह से धार्मिक उपायों को अपनाता है। किंतु कोई भी व्यक्ति दैनिक देव उपासना से ऐसी बदकिस्मती और परेशानियों से दूर रह सकता है। इसी कड़ी में गुरुवार का दिन बृहस्पति आराधना के लिए नियत है। जानते हैं गुरुवार को बृहस्पति पूजा की आसान विधि - - गुरुवार के दिन सुबह स्नान करें। पीले वस्त्र पहनें। - पीला वस्त्र पर गुरु बृहस्पति की प्रतिमा को रखकर देवगुरु चार भुजाधारी मूर्ति का पंचामृत स्नान यानि दही, दुध, शहद, घी, शक्कर कराएं। स्नान के बाद गंध, अक्षत, पीले फूल, चमेली के फूलों से पूजा करें। - पीली वस्तुओं जैसे चने की दाल से बने पकवान, चने, गुड़, हल्दी या पीले फलों का भोग लगाएं। - बृहस्पति मंत्र ऊँ बृं बृहस्पते नम: का जप करें। बृहस्पति आरती करें। क्षमा प्रार्थना कर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें। - पीले रंग की सामग्री और दक्षिणा देनी चाहिए। - धार्मिक दृष्टि से गुरुवार के दिन व्रत-पूजा से गुरु गृह की कृपा से सुख-समृद्धि के साथ खासतौर पर कार्य और कामनासिद्धि की बाधाएं दूर हो जाती है।
Photo

Post has shared content
. Very nice msg.. Read twice..
जिंदगी में दो चीज़ें हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं:
"सांस और साथ"
सांस टूटने से तो इंसान 1 ही बार मरता है;
पर किसी का साथ टूटने से इंसान पल-पल मरता है।
🌿🌿🌿
जीवन का सबसे बड़ा अपराध -
किसी की आँख में आंसू आपकी वजह से होना।
और
जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि -
किसी की आँख में आंसू आपके लिए होना।
🌿🌿🌿
जरुरत के मुताबिक जिंदगी जिओ - ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं।
क्योंकि जरुरत तो फकीरों की भी पूरी हो जाती है;
और ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है।
🌿🌿🌿
मनुष्य सुबह से शाम तक काम करके उतना नहीं थकता;
जितना क्रोध और चिंता से एक क्षण में थक जाता है।
🌿🌿🌿
दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी है।
जैसे:
दरिया - खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ - खुद अपना फल नहीं खाते।
सूरज - अपने लिए हररात नहीं देता।
फूल - अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते।
मालूम है क्यों?
क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असली जिंदगी है।
🌿🌿🌿
मांगो तो अपने रब से मांगो;
जो दे तो रहमत और न दे तो किस्मत;
लेकिन दुनिया से हरगिज़ मत माँगना;
क्योंकि दे तो एहसान और न दे तो शर्मिंदगी।
🌿🌿🌿
कभी भी 'कामयाबी' को दिमाग और 'नकामी' को दिल में जगह
नहीं देनी चाहिए।
क्योंकि,
कामयाबी दिमाग में घमंड और नकामी दिल में
मायूसी पैदा करती है।
🌿🌿🌿
कौन देता है उम्र भर का सहारा।
लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं।
🌿🌿🌿
♻ सुखी जीवन के ६ मन्त्र ♻
☑ अगर 'पूजा' कर रहे हो - तो 'विश्वास' करना सीखो !
☑ 'बोलने' से पहले - 'सुनना' सीखो !
☑ अगर 'खर्च' करना है - तो 'कमाना' सीखो !
☑ अगर 'लिखना' है - तो 'सोचना' सीखो !
☑ 'हार' मानने से पहले - फिर से 'कोशिश' करना सीखो !
☑ 'मरने' से पहले - खुल के 'जीना'


Post has shared content
हमारे साथ वैसा ही होता है जैसा हम मानते है और विश्वास करते है
विश्वास ही सत्य है| अगर भगवान पर विश्वास करते है तो हमें हर पल उनकी अनुभूति होती है और अगर हम विश्वास नहीं करते तो हमारे लिए उनका कोई अस्तित्व नहीं?
एक बार एक व्यक्ति नाई की दुकान पर अपने बाल कटवाने गया| नाई और उस व्यक्ति के बीच में ऐसे ही बातें शुरू हो गई और वे लोग बातें करते-करते “भगवान” के विषय पर बातें करने लगे|
तभी नाई ने कहा – “मैं भगवान  के अस्तित्व को नहीं मानता और इसीलिए तुम मुझे नास्तिक भी कह सकते हो”
“तुम ऐसा क्यों कह रहे हो”  व्यक्ति ने पूछा|
नाई ने कहा –  “बाहर जब तुम सड़क पर जाओगे तो तुम समझ जाओगे कि भगवान का अस्तित्व नहीं है| अगर भगवान  होते, तो क्या इतने सारे लोग भूखे मरते? क्या इतने सारे लोग बीमार होते? क्या दुनिया में इतनी हिंसा होती? क्या कष्ट या पीड़ा होती? मैं ऐसे निर्दयी ईश्वर की कल्पना नहीं कर सकता जो इन सब की अनुमति दे”
व्यक्ति ने थोड़ा सोचा लेकिन वह वाद-विवाद नहीं करना चाहता था इसलिए चुप रहा और नाई की बातें सुनता रहा|
नाई ने अपना काम खत्म किया और वह व्यक्ति नाई को पैसे देकर दुकान से बाहर आ गया| वह जैसे ही नाई की दुकान से निकला, उसने सड़क पर एक लम्बे-घने बालों वाले एक व्यक्ति को देखा जिसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी और ऐसा लगता था शायद उसने कई महीनों तक अपने बाल नहीं कटवाए थे|
वह व्यक्ति वापस मुड़कर नाई की दुकान में दुबारा घुसा और उसने नाई से कहा – “क्या तुम्हें पता है? नाइयों का अस्तित्व नहीं होता”
नाई ने कहा – “तुम कैसी बेकार बातें कर रहे हो? क्या तुम्हे मैं दिखाई नहीं दे रहा? मैं यहाँ हूँ और मैं एक नाई हूँ| और मैंने अभी अभी तुम्हारे बाल काटे है|”
व्यक्ति ने कहा –  “नहीं ! नाई नहीं होते हैं| अगर होते तो क्या बाहर उस व्यक्ति के जैसे कोई भी लम्बे बाल व बढ़ी हुई दाढ़ी वाला होता?”
नाई ने कहा – “अगर वह व्यक्ति किसी नाई के पास बाल कटवाने जाएगा ही नहीं तो नाई कैसे उसके बाल काटेगा?”
व्यक्ति ने कहा –  “तुम बिल्कुल सही कह रहे हो, यही बात है| भगवान भी होते है लेकिन कुछ लोग भगवान पर विश्वास ही नहीं करते तो भगवान उनकी मदद कैसे करेंगे|”
Photo

Post has shared content
🚩 ""देवताओं के वाहन ""🚩

👉अक्सर आपने नास्तिकों और मुस्लिमों को 🚩हिन्दु देवी देवताओं 🚩के वाहनों के बारे में अपशब्द कहते सुना होगा आज आपको बता रहवी हूॅ 🚩🌷हिन्दु देवी देवताओं 🌷🚩के वाहनों का क्या रहस्य है?

👉🚩⛺हिन्दु देवी देवताओं ⛺🚩का 📚पुराणों मे जो वर्णन है उसके अनुसार🌺 देवी देवताओं 🌺के पास ऐसी शक्तीयाॅ हैं जिससे वो पलक झपकते ही सम्पुर्ण ब्रह्मांड में कहीं भी जा सकते थे तो फिर उन्हें पशु पक्षियों को वाहन बनाने की क्या आवश्यकता थी?......

👉असलियत में 🚩देवी देवताओं 🚩के साथ जो उनके वाहनों के चित्र होते हैं वो उन🌻 देवताओं 🌻की विशेषताओं के प्रतीक हैं इसलिऐ चित्रकार 🍁देवी देवताओं 🍁के साथ उनके वाहनों के तौर पर उनके चित्र अंकित करते हैं.........

👉क्या आप जानते हैं किस🌷 देवता 🌷का वाहन कौन है और क्यों?

👉🚩🎪हिंदू धर्म 🎪🚩में विभिन्न🌻 देवताओं का स्वरूप अलग-अलग बताया गया है। हर देवता का स्वरूप उनके आचरण व व्यवहार के अनुरूप ही हमारे📚 धर्म ग्रंथों में वर्णित है। स्वरूप के साथ ही 🌹देवताओं के वाहनों में विभिन्नता देखने को मिलती है। 📚धर्म ग्रंथों के अनुसार अधिकांश देवताओं के वाहन पशु ही होते हैं। 🌼देवताओं 🌼के वाहन के रूप में ये पशु किसी न किस रूप में हमें लाइफ मैनेजमेंट का पाठ भी पढ़ाते हैं। आप भी जानिए किस देवता का वाहन क्या है और क्यों है-

🚩🐁भगवान श्रीगणेश का वाहन मूषक🐁🚩

👉🌷भगवान श्रीगणेश 🌷का वाहन है🐁मूषक अर्थात चूहा। 🐁चूहे की विशेषता यह है कि यह हर वस्तु को कुतर डालता है। वह यह नही देखता की वस्तु आवश्यक है या अनावश्यक, कीमती है अथवा बेशकिमती। इसी प्रकार कुतर्की भी यह विचार नही करते की यह कार्य शुभ है अथवा अशुभ। अच्छा है या बुरा। वह हर काम में कुतर्कों द्वारा व्यवधान उत्पन्न करते हैं।🚩🌺 श्रीगणेश बुद्धि 🌺🚩एवं ज्ञान हैं तथा कुतर्क मूषक है। जिसको 🌼गणेशजी 🌼ने अपने नीचे दबा कर अपनी सवारी बना रखा है। यह हमारे लिए भी शिक्षा है कि कुतर्कों को परे कर उनका दमन कर ज्ञान को अपनाएं।

👉🐂🌿भगवान शंकर का वाहन बैल🌿🍀🐂

👉📚धर्म ग्रंथों में 🚩🌺🍀भगवान शंकर🍀🌺 का वाहन 🐂बैल बताया गया है। 🐂बैल बहुत ही मेहनती जीव होता हैं। वह शक्तिशाली होने के बावजूद शांत एवं भोला होता है। वैसे ही 🚩🍀🌿भगवान शिव 🌿🍀🚩भी परमयोगी एवं तप के बल पर शक्तिशाली होते हुए भी परम शांत एवं इतने भोले हैं कि उनका एक नाम ही भोलेनाथ जगत में प्रसिद्ध है। 🚩🌷🍀भगवान शंकर🍀🌷 ने जिस तरह काम को भस्म कर उस पर विजय प्राप्त कि थी उसी तरह उनका वाहन भी कामी नही होता। उसका काम पर पूरा नियंत्रण होता है।

🚩🌼🐯देवी का वाहन शेर🐯🌼🚩

👉📚शास्त्रों में 🌺देवी 🌺का वाहन 🐯सिंह यानी 🐯शेर बताया गया है। शेर एक संयुक्त परिवार में रहने वाला प्राणी होता हैं। वह अपने परिवार की रक्षा करने के साथ ही सामाजिक रूप से वन में रहता है। वह वन का सबसे शक्तिशाली प्राणी होता है किंतु अपनी शक्ति को व्यर्थ में व्यय नही करता, आवश्यकता पडऩे पर ही उसका उपयोग करता हैं। यह संदेश 🌷देवी 🌷के इस वाहन से मिलता है कि घर की मुखिया स्त्री को अपने परिवार को जोड़कर रखना चाहिए तथा व्यर्थ के कार्यों में अपनी बुद्धि को नही लगाकर घर को सुखी बनाने के लिए ही लगातार प्रयास करना चाहिए।

👉🌷लक्ष्मी🌷 का वाहन🐘 हाथी एवं 🐽उल्लू

👉🌷माता लक्ष्मी 🌷का वाहन सफेद रंग का हाथी होता है। हाथी भी एक परिवार के साथ मिल-जुलकर रहने वाला सामाजिक एवं बुद्धिमान प्राणी होता हैं। उनके परिवार में मादाओं को प्राथमिकता दी जाती हैं तथा उनका सम्मान किया जाता हैं। 🐘हाथी हिंसक प्राणी नही होता। उसी तरह अपने परिवार वालों को एकता के साथ रखने वाला तथा अपने घर की स्त्रियों को आदर एवं सम्मान देने वालों के साथ 🌼लक्ष्मी🌼 का निवास होता है।
🌺लक्ष्मी 🌺का वाहन 🐽उल्लू भी होता हैं। ऊल्लू सदा क्रियाशील होता हैं। वह अपना पेट भरने के लिए लगातार कर्मशील होता है। अपने कार्य को पूरी तन्मयता के साथ पूरा करता हैं। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति रात-दिन मेहनत करता है, 🌷लक्ष्मी 🌷सदा उस पर प्रसन्न होती है तथा स्थाई रूप से उसके घर में निवास करती है।

🚩🚩🌼सरस्वती 🌼का वाहन हंस🚩🚩

👉🌷मां सरस्वती 🌷का वाहन हंस है। हंस का एक गुण होता है कि उसके सामने दूध एवं पानी मिलाकर रख दें तो वह केवल दूध पी लेता हैं तथा पानी को छोड़ देता है। यानी वह सिर्फ गुण ग्रहण करता है व अवगुण छोड़ देता है। देवी 🌺सरस्वती विद्या की देवी हैं। गुण व अवगुण को पहचानना तभी संभव है जब आपमें ज्ञान हो। इसलिए माता🌼 सरस्वती 🌼का वाहन हंस है।

🚩🌷हनुमानजी🌷🚩का आसन 👻पिशाच👻

👉🚩🌷हनुमानजी 🌷🚩प्रेत या👻 पिशाच को अपना आसन बनाकर उस पर बैठते हैं। इसी को वह अपने वाहन के रूप में भी प्रयोग करते हैं। 👻पिशाच या प्रेत बुराई तथा दूसरों का भय एवं कष्ट देने वाले होते हैं। इसका अर्थ है कि हमें कभी भी बुराई को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए।

🚩🚩🌞सूर्य का वाहन रथ🌞🚩🚩

👉🚩🌞भगवान सूर्य 🌞🚩का वाहन रथ है। इस रथ में सात घोड़ें होते हैं। जो सातों वारों का प्रतीक हैं। रथ का एक पहिया एक वर्ष का प्रतीक है जिसमें बाहर आरे होते हैं तथा छ: ऋतु रूपी छ: नेमीयां होती हैं। 🚩🌞भगवान सूर्य 🌞🚩का वाहन रथ इस बात का प्रतीक होता है कि हमें सदैव क्रियाशील रहना चाहिए तभी जीवन में प्रकाश आता है।

🚩🐃यमराज का वाहन भैंसा🐃🚩

👉यमराज🐃 भैंसे को अपने वाहन के रूप में प्रयोग करते हैं। 🐃भैसा भी सामाजिक प्राणी होता हैं। वह सब मिलकर एक दूसरे की रक्षा करते हैं। एकता द्वारा अपनी एवं अपने परिवार के रक्षक होते हैं। उनका रूप भयानक होता हैं। अत: 🚩यमराज उसको अपने वाहन के तौर पर प्रयोग करते हैं।

🚩🌷भगवान कार्तिकेय 🌷🚩का वाहन मोर🌻

👉🚩🌿भगवान शिव 🌿🚩के पुत्र 🌺कार्तिकेय देवताओं के सेनापति कहे जाते हैं। इनका वाहन मोर है। 📚धर्म ग्रंथों के अनुसार कार्तिकेय ने 👿असुरों से युद्ध कर देवताओं को विजय दिलाई थी। अर्थात इनका युद्ध कौशल सबसे श्रेष्ठ हैं। अब यदि इनके वाहन मोर को देखें तो पता चलता है कि इसका मुख्य भोजन 🐍सांप है। 🐍सांप भी बहुत खतरनाक प्राणी है इसलिए इसका शिकार करने के लिए बहुत ही स्फूर्ति और चतुराई की आवश्यकता होती है। इसी गुण के कारण मोर सेनापति 🌷कार्तिकेय 🌷का वाहन है।

🚩🌺🐊गंगा का वाहन मगर🐊🌺🚩

👉📚धर्म ग्रंथों में 🚩माता गंगा 🚩का वाहन 🐊मगरमच्छ बताया गया है। इससे अभिप्राय है कि हमें जल में रहने वाले हर प्राणी की रक्षा करनी चाहिए। अपने निजी स्वार्थ के लिए इनका शिकार करना उचित नहीं है क्योंकि जल में रहने वाला हर प्राणी पारिस्थितिक तंत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनकी अनुपस्थिति में पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ सकता है।

🚩🚩🐉नाग🐉🚩🚩

👉मिथक 📚साहित्य में 🐉सर्प अनेक तत्त्वों का प्रतिनिधित्व करता है। मणि से सुसज्जित होने के कारण वह धन का प्रतीक है। 'जहां 🐉सर्प कुण्डली मारकर बैठा हो, वहां 🌏पृथ्वी में धन गड़ा है'- ऐसा माना जाता है। 🐉सर्प की टेढ़ी-तिरछी चाल उसे राजनीतिक निपुणता का प्रतीक भी बना देती है- किंतु सर्वाधिक मान्य रूप 'काल' के प्रतीक में मिलता है। 🐉सर्प की गति जल, स्थल, वायु सभी स्थानों में है। उड़नेवाले 🐉सर्प, 🌏पृथ्वी में बिल बनाकर रहनेवाले 🐍सर्प तथा जल में निवास करनेवाले 🐉नाग इस बात के प्रतीक हैं कि 'काल' सर्वव्यापी है। जगत की उत्पत्ति से पूर्व केवल जल में 🐍नाग शेष था- इसी से 🚩🐉शेषनाग🐉🚩 कहा गया। उसकी कुण्डली की शय्या पर🚩🌷 विष्णु 🌷🚩ने निवास किया तथा उसके एक सहस्त्र फन 🌺विष्णु के मस्तक पर छत्र की भांति विद्यमान थे। इस चित्र के माध्यम से स्पष्ट हुआ कि राजनीतिक निपुणता पर आसीन 🌺विष्णु 🌺'काल-रक्षित' थे, अर्थात उसको घेरकर काल शत्रुओं से उन्हें पूर्ण सुरक्षा प्रदान कर रहा था।

🚩🚩 🌷""जय महाकाल""🌷🚩🚩
Photo

Post has shared content
आज कल का जिवन

गर ख़ुशी है लोंगों के दामन में ,

पर एक हंसी के लिये वक़्त नहीं .

दिन रात दौड़ती दुनिया में ,

ज़िन्दगी के लिये ही वक़्त नहीं .

सारे रिश्तों को तो हम मार चुके,

अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं ..

सारे नाम मोबाइल में हैं ,

पर दोस्ती के लिये वक़्त नहीं .

गैरों की क्या बात करें ,

जब अपनों के लिये ही वक़्त नहीं .

आखों में है नींद भरी ,

पर सोने का वक़्त नहीं .

दिल है ग़मो से भरा हुआ ,

पर रोने का भी वक़्त नहीं .

पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े,

कि थकने का भी वक़्त नहीं .

पराये एहसानों की क्या कद्र करें ,

जब अपने सपनों के लिये ही वक़्त नहीं

तू ही बता ऐ ज़िन्दगी ,

इस ज़िन्दगी का क्या होगा,

कि हर पल मरने वालों को ,

जीने के लिये भी वक़्त नहीं
Animated Photo

Post has shared content
Ek line maa ke naam.... dil se....

एक विवाहित बेटी का पत्र उसकी माँ के नाम"माँ तुम बहुत याद आती हो"अब मेरी सुबह 6 बजे होती हैऔर रात 12 बज जाती है, तब"माँ तुम बहुत याद आती हो"सबको गरम गरम परोसती हूँ,और खुद ठंढा ही खा लेती हूँ,तब"माँ तुम बहुत याद आती हो"जब कोई बीमार पड़ता है तोएक पैर पर उसकी सेवा में लग जाती हूँ,और जब मैं बीमार पड़ती हूँतो खुद ही अपनी सेवा कर लेती हूँ,तब"माँ तुम बहुत याद आती हो"जब रात में सब सोते हैं,बच्चों और पति को चादर ओढ़ाना नहीं भूलती,और खुद को कोई चादर ओढाने वाला नहीं, तब"माँ तुम बहुत याद आती हो"सबकी जरुरत पूरी करते करते खुद को भूल जाती हूँ,खुद से मिलने वाला कोई नहीं,तब"माँ तुम बहुत याद आती हो"यही कहानी हर लड़की की शायद शादी के बाद हो जाती है कहने को तो हर आदमी शादी से पहले कहता है"माँ की याद तुम्हें आने न दूँगा"पर, फिर भी क्यों?"माँ तुम बहुत याद आती हो" ।
Photo

Post has shared content
"एक बेटे ने पिता से पूछा - पापा ये 'सफल जीवन' क्या होता है ?

पिता, बेटे को पतंग उड़ाने ले गए।
बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था...

थोड़ी देर बाद बेटा बोला,
पापा.. ये धागे की वजह से पतंग और ऊपर नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !!
ये और ऊपर चली जाएगी...

पिता ने धागा तोड़ दिया ..

पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आइ और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई...

तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया .,,,,

बेटा..
'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं..
हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं
जैसे :
घर,
परिवार,
अनुशासन,
माता-पिता आदि
और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं...
वास्तव में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस पर बना के रखते हैं..
इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे
परन्तु
बाद में हमारा वो ही हश्र होगा जो
बिन धागे की पतंग का हुआ...'

"अतः जीवन में यदि तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.."
" धागे और पतंग जैसे जुड़ाव के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही 'सफल जीवन' कहते हैं बेटा"aap sab ko Munna ka ram.ram ji
Photo
Wait while more posts are being loaded