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Vikash Kumar
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हम जो अपनी शायरी से दूर हो गए
हम जो अपनी शायरी से दूर हो गए गोया कि मौत आयी , मज़बूर हो गए   इश्क़ में अश्क़ो के बिन मानी नहीं मिलता पानी के छींटे मार तुम , मंसूर हो गए   दर्द - ए - हिज्राँ में बने नाक़ाबिले ज़िकर तुम मिले और मुहल्ले में मशहूर हो गए   हाथ जोड़े बोलते , चुन लो हमें चुन ल...

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होगा
होगा. कभी होगा. मेरे और तुम्हारे बीच.  अनगिन समान्तर दुनियाओं की  किसी न किसी एक दुनिया में, किसी न किसी काल में. वक्त के वृक्ष में  इतनी जो सम्भावनाएँ हैं, इतनी जो शाखाएं हैं -  उनमें कहीं न कहीं  मेरे और तुम्हारे साथ होने की  संभावनाओं से उपजा फल - होगा. ...

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मैं एक कविता लिखना चाहता हूँ
1. मैं एक कविता लिखना चाहता हूँ - जिसमें खूबसूरत वादियों का, झरनों का जिक्र हो जिसमें बारिश की बूँदें हो, ओस हो, दूब हो, हरियाली हो. जिसमें एक लड़की झूले पे बैठी गीत गाती हो जिसमें लड़के छुप के प्रेम की कवितायें लिखें। पर हर कोशिश उगल देती है बंजर हुए खेत, लु...

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मैं एक कविता लिखना चाहता हूँ
1. मैं एक कविता लिखना चाहता हूँ - जिसमें खूबसूरत वादियों का, झरनों का जिक्र हो जिसमें बारिश की बूँदें हो, ओस हो, दूब हो, हरियाली हो. जिसमें एक लड़की झूले पे बैठी गीत गाती हो जिसमें लड़के छुप के प्रेम की कवितायें लिखें। पर हर कोशिश उगल देती है बंजर हुए खेत, लु...

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तुम्हारे असमंजस से मरा हूँ मैं
१. जब तुम अपने घरों में बंद देख रहे होते थे बड़ी जगमगाती स्क्रीनों पे खबर मेरे घरों पे गिरते बमों की और कर रहे थे तय कौन सही है कौन गलत - किसकी भर्त्सना करनी है और किसको सही ठहराना है. तब उनके बारूद से ज्यादा - तुम्हारे असमंजस से मरा हूँ मैं. २. मेरे युद्ध म...

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अनजान
जब बहुत बहुत वक्त बीत चुका होगा जब हमें एक दूसरे के नाम के अलावा कुछ पता नहीं होगा जब जाने पहचाने लम्हों, जगहों, कहानियों, कवितायों और फिल्मों के ऊपर जम चुकी होगी धूल जब तुम और मैं बिलकुल अनजाने हो जायेंगे। तब मैं चाहता हूँ मिलना तुमसे एक बार फिर और जानना च...

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उससे पहले कि मैं बीत जाऊँ
एक कटोरा काढ़ मुझे रख लो उससे पहले कि मैं बीत जाऊँ। उससे पहले कि कोई चिड़ियाँ मुझे ले उड़े या हवा झिटक दे कहीं दूर या ढँक दें पत्ते अपने पीलेपन से या रात की सर्दी में रीत जाऊँ। कैद कर लो इतिहास होते कंकाल को उससे पहले कि मैं बीत जाऊँ। तुम्हारे चेहरे पे जमी ...

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