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Ravindra Pandey
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सफ़र में है अभी जिन्दगी....
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और कितनी कुरबानी दें...
चौड़ी छाती है वीरों की, गगनभेदी हुँकार है... नाम धनंजय, रुद्र, विनोद, करतम, माझी, करतार है... अब तो कोई जतन करे, कोई तो समाधान हो... ऐसा ना हो सुंदर बस्तर, खुशियों का शमशान हो... दारुण दुःख सहते सहते, देखो पीढ़ी गुज़र रही... बारूदों के ढेर में बैठी, साल की बगि...
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क्यों तेरी आँखें नम हैं?....
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पतझड़ का मौसम है...
जो भी हो जाए कम है, क्यों तेरी आँखें नम है? देते हैं  ज़ख्म  अपनें, मिले गैरां से मरहम है। तू अपनी राह चला चल, पीकर अपमान हलाहल। या मोड़ दिशा हवाओं के, गर तुझमें भी कुछ दम है। न्याय सिसक कर रोए, अन्याय की करनी धोए. यहाँ झूठ, फ़रेब के क़िस्से, नित लहराते परचम है...
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इंकलाब हूँ ज़हीन सा....
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शायद वही मशाल हूँ...
जल के जल रहा है जो, शायद वही मशाल हूँ... जवाब हूँ मैं सवाल का, या ख़ुद ही एक सवाल हूँ... किसी को क्या बताऊँ मैं, मंज़िल भी कैसे पाऊँ मैं... नज़र भी क्या उठाऊँ मैं, ये सर भी कैसे झुकाऊँ मैं... इंकलाब हूँ ज़हीन सा, या महज एक बवाल हूँ... जल के जल रहा है जो... शायद...
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Happy Friendship Day....
जन्नत हो गयी ये क़ायनात...
जो साथ रहे परछाई सा, उस पाक दुआ की बात है क्या... जन्नत हो गयी ये क़ायनात, देखो यारों का साथ है क्या... कुछ अलबेले मस्ताने हैं, कुछ मस्ती भरे खजाने हैं... मन सराबोर हो झूम उठा, महके-महके जज़्बात  हैं  क्या... ये सुबह नई मुस्काई है, संदेशा उनका लायी है... बिन ...
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जन्नत हो गयी ये क़ायनात...
जो साथ रहे परछाई सा, उस पाक दुआ की बात है क्या... जन्नत हो गयी ये क़ायनात, देखो यारों का साथ है क्या... कुछ अलबेले मस्ताने हैं, कुछ मस्ती भरे खजाने हैं... मन सराबोर हो झूम उठा, महके-महके जज़्बात  हैं  क्या... ये सुबह नई मुस्काई है, संदेशा उनका लायी है... बिन ...
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तुम जो मिले.... ये गुल खिले....
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तुम जो मिले, ये गुल खिले...
तुम जो मिले, ये गुल खिले, तुम जो मिले, ये गुल खिले, दूरियां फ़ना हुई, मिटे फासले... दूरियां फ़ना हुई, मिटे फासले... तुम जो मिले... बेचैन था ये दिल,  अरमान धुआँ-धुआँ, चैन कहीं पायें ना, जाएं भला हम कहाँ, हरदम सताये हमें, शिकवे गिले... तुम जो हमें, ये गुल खिले....
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