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रौशन जसवाल विक्षिप्‍त
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कबिरा खड़ा बजार में मांगे सब की खैर । ना काहू से दोस्ती न काहू से वैर ॥
कबिरा खड़ा बजार में मांगे सब की खैर । ना काहू से दोस्ती न काहू से वैर ॥

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रौशन जसवाल's posts

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सीमा
सम्‍भव की सीमा जानने का एक ही तरीका है असम्‍भव से भी आगे निकल जाना । --- स्‍वामी विवेकानन्‍द

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तर्क
हमेशा तर्क करने वाला दिमाग सिर्फ धार वाले चाकू की तरह है जाे प्रयोग करने
वाले के हाथ से ही खून निकाल देता है ।-- रवीन्‍द्रनाथ टैगोर

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शब्‍द
शब्‍द कुछ अपने कुछ पराये, शब्‍द  कुछ छोटे कुछ बड़े, शब्‍द कुछ साथ कुछ अकेले, शब्‍द कुछ थुलथुले कुछ बुलबुले, शब्‍द ही तो मात्र शब्‍द नि:शब्‍द ।।

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मच्छर
मच्छर छोटे बड़े मंझलें  करते हैं बहुत तंग नहीं देते सोने छोटे बड़े मंझलें मच्छर।

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सपने
छोटे छोटे सपने कुछ कुछ बेगाने थोड़े थोड़े अपने।

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ना कोई शिकायत
ना कोई शिकायत ना कोई गिला, एकाकी था, हूँ आज भी अकेला । होना,घटना, है सब प्रभु इच्‍छा, आना जाना दुनिया इक मेला।

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अधुरेे पन्‍नेे
‪#‎ अधूरे_पन्ने‬ (जीवन यात्रा पर प्रकाशनाधीन पुस्तक से) वैसे मैं ओझा डाउ तंत्र मंत्र की बातों पर विश्वास कम ही करता। लेकिन पिछले वर्ष अस्वस्थ होने के कारण दवा और दुआ का दौर निरंतर चलता रहा है । वर्ष अप्रैल 2014 में गंभीर रूप से अस्वस्थ हुआ था दुसरे शब्दों म...

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अधुरे पन्‍ने
‪#‎ अधूरे_पन्ने‬ (जीवन यात्रा पर प्रकाशनाधीन पुस्तक से) सुबह उठते ही गुनगुना पानी और टहलने, योगा करने का आदेश ये मीरा के दैनिक कामों में शामिल है। पानी पिया और एक दो चक्‍कर इधर उधर लगाए। फिर व्‍टस एप्‍प पर नमस्‍कार का दौर शुरू । फेसबुक पर अपडेट देखना । समय ...
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