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Dr. Suresh Rai (सरल)
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अपने हाथ मे कलम रखता हूं
अच्छे व बुरे का ईल्म रखता हूं

सच्चे हालात उकेरता हूं सदा
जब कागज का धरम रखता हूं

जगह दिलों मे यूं मिली है मुझे
सबसे लहजा मैं नरम रखता हूं

राज कई दिल मे दफन हैं मेरे
कस्मे वादों की शरम रखता हूं

फल की आश न लुभाती मुझे
जारी मैं अपने करम रखता हूं

मिला के हाथ मिलने वालों से
अपने रिश्तों को गरम रखता हूं

अपनापन जहाँ झलकता है
मैं उस दर पर कदम रखता हूं

हकीम कहते हैं मुझे जख्म वाले
अपने शब्दों मे मरहम रखता हूं

डॉ. सुरेश राय 'सरल'
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पहली दस्तक
पहली दस्तक दी दिल में वो ही मेरे पास नही हमने उनको कितना चाहा उनको ये एहसास नही नदिया दरिया सागर देखे बुझती मेरी प्यास नही बिन पाये ही खोया तुमको होता मुझको विश्वास नही मिलना फिर मुझ से तुम तोडना मेरी आस नही एक दिन ऐसा न आये यदि तुम नही तो साँस नही सुरेश ...
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मैं कोई साया तो नही था
छोड़ देता तन्हा अँधेरे में तुझे कैसे मैं कोई साया तो नही था तूने अपना समझा न कभी मगर मैं पराया तो नही था सुरेश राय 'सरल'
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क्या कहूँ क्या छोडूं यार
क्या कहूँ क्या छोडूं यार वादा कैसे मैं तोडूं यार .... बढ़ चला हूँ आगे इतना खुद को कैसे मोडूं यार ..... सीसे से भी नाजुक है दिल कैसे मैं तोडूं यार.... अना के चूहे कतर गए वो रिश्ते कैसे मैं ओढूं यार .... बिना गाँठ जो मुमकिन हो बंधन कैसे फिर जोडूं यार.... संग च...
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रख होठों में मुस्कान भैये
काहे रहता परेशान भैये खुद पर कर एहसान भैये धीरे धीरे ही चलता जा होगा सफ़र आसान भैये पूरे तो सबके होते नही हर एक अरमान भैये खुद से जो तू हार गया हो जाएगा गुमनाम भैये औरों को गर जान लिया खुद को अब पहचान भैये जीवन 'सरल' हो जाएगा रख होठों में मुस्कान भैये सुरेश ...
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"सच्ची दौलत "
पुरवाई है मां का आंचल हाथ पिता का साया सा लेकर रुप मात पिता का ईश्वर धरती पे आया सा देखी जब भी सूरत इनकी अक्स खुदा का पाया सा ये तो नेमत है कुदरत की इनमे ब्रम्हांड समाया सा अनमोल वक्त है जीवन का संग जो इनके बिताया सा धिक्कारे जो बुजुर्गों को जन्म ऐसे सुत का...
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ममता की खान है अम्मा कुदरत की शान है अम्मा इंसान के स्वरुप मे आयी धरा पर भगवान है अम्मा पिता जी का मान है अम्मा परिवार की जान है अम्मा सब के मन की बात सुन ले बिना कहे वो कान है अम्मा बच्चों का जहॉन है अम्मा गीता और कुरान है अम्मा कानों मे सदा अमृत घोले ऐसी ...
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