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दिनेशराय द्विवेदी (Dineshrai Dwivedi)
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क्या बतलाएँ दुनिया वालो! क्या-क्या देखा है हमने ...!
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दिनेशराय's posts

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ब्राह्मणवादी अहंकार
 लेखक आनंद तेलतुंबड़े अनुवाद: रेयाज उल हक   इं डिया टुडे के वेब संस्करण डेलियो.इन पर 27 नवंबर को बेल्जियम के घेंट यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर एस.एन. बालगंगाधर का एक लेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था “व्हिच इनटॉलरेंस इज ग्रोइंग इन इंडिया?”. यह उस गुस्से के जवा...

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यह महज असहिष्णुता नहीं है, ... अरुन्धति रॉय
सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए मिले राष्ट्रीय सम्मान को(नेशनल अवार्ड फॉर बेस्ट स्क्रीनप्ले) लौटाते हुए अरुंधति रॉय यहां उन सब बातों को याद कर रही हैं जिन पर हमें नाज करना चाहिए और उन सब
पर भी, जिनसे हमें शर्म आनी चाहिए और जिसके खिलाफ उठ खड़े होना चाहिए. हा लांकि...

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प्रगतिशील होने का पाखंड !
राष्ट्रवादी ढोंगी विकास के नारों की खाल ओढ़ प्रगतिशील नहीं हो सकते। -भँवर मेघवंशी ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- “भाई मैं जंतर मंतर में भरोसा नहीं करता, मैं लोकतंत...

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पुरस्कार वापसी से उठे सवालों के जवाब : अब सवाल पूछने की बारी हमारी है -अनिल पुष्कर
जि न लोगों ने यह सवाल पूछा है कि १९८४ के दंगों में पुरस्कार क्यूँ नहीं लौटाए? हाशिमपुरा दंगों में पुरस्कार क्यों नहीं लौटाए? बाबरी मस्जिद ढहाने में पुरस्कार क्यों नहीं लौटाए? मुम्बई सीरियल ब्लास्ट में मारे गये लोगों पर पुरस्कार क्यों नहीं लौटाए? २००२ के गुज...

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भगतसिंह आज भी भारत की जनता के मार्गदर्शक हैं - शैलेन्द्र चौहान
“सोये हुए शेरों उठो, और बगावत खड़ी कर दो”  भ गत सिंह को भारत के सभी विचारों
वाले लोग बहुत श्रद्धा और सम्मान से याद करते हैं। वे उन्हें देश पर
कुर्बान होने वाले एक जज़बाती हीरो और उनके बलिदान को याद करके उनके आगे
विनत होते हैं। वे उन्हें देवत्व प्रदान कर तु...

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भगतसिंह आज भी भारत की जनता के मार्गदर्शक हैं - शैलेन्द्र चौहान
“सोये हुए शेरों उठो, और बगावत खड़ी कर दो”  भ गत सिंह को भारत के सभी विचारों वाले लोग बहुत श्रद्धा और सम्मान से याद करते हैं। वे उन्हें देश पर कुर्बान होने वाले एक जज़बाती हीरो और उनके बलिदान को याद करके उनके आगे विनत होते हैं। वे उन्हें देवत्व प्रदान कर तुष्ट...

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छोटे-छोटे मालवाहक तिपहिया वाहनों से लेकर बड़े ट्रकों तक में गणेश को लाने का सिलसिला सुबह से शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। इन गणपति वाहनों के आगे-पीछे स्कूटरों, बाइकों और कारों, जीपों में “गणपति बप्पा मोरिया” की हांक लगाते हुए चलते रहे लोग। काम पर जाने वाले लोग इनसे किसी तरह बचते हुए काम पर गए और लौटे। अब गणपति अपने सृजक के हाथों से निकलकर वर्ग सत्ता के सीढ़ीदार ढांचे की सीढ़ियां चढ़ रहे लोगों के हाथों में आ गए थे। उनमें से कौन उसी सीढ़ी पर जमा रहना चाहता है और कौन है जो ऊपर की सीढ़ी पर चढ़ जाना चाहता है और कौन है जो अथक प्रयास के बाद भी सीढ़ी से लुढ़क सकता है, यह स्पष्ट दिखाई दे रहा था। उनमें से हर कोई चाहता था कि एक सीढ़ी ऊपर तो चढ़ ही जाए, ऐसा न भी हो तो भी कम से कम अपनी सीढ़ी पर तो बना रहे।

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बालक चपल बहुत धरा पर
सहसमुख विषधर फुफकारे कितना ही हो जाए काबिज जमना जल पर डरें लोग लुगाई सब सारा गाँव डर जाए दूर दूर भागें सारे कोई पास न जाए खेल खेल में जब गेंद उछल कर भागे जा गिरे जमना जल में खूनी विषधर के आगे तब बालक कोई कूदे जमना जल हिल जाए झपटे बार बार विषधर पर बालक हाथ न...

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राखी - "हम सब साथ साथ हैं"
रा खी
स्नेहपूर्ण मृदुल त्यौहार है। एक युग था जब इसे रक्षा के त्यौहार के रूप में मनाया
जाता था। लेकिन उस रूप में उस का महत्व तभी तक रह सकता है जब कि समाज में रक्षक और
अरक्षित दोनों हों और रक्षा का दायित्व निभाने को तैयार हों। राखी को भाई-बहन के
मधुर सम्बन्धो...
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