Profile cover photo
Profile photo
navin rangiyal
17 followers
17 followers
About
Posts

Post has attachment
ऑलमोस्ट डाइड,
कभी- कभी इस बेनूर सी जिंदगी में चुपके से जीना पड़ता है इतना धीमे की पता भी न चले की सांस का आरोह- अवरोह है भी या नहीं हम अपनी ही देह को निस्तेज  और निढाल पड़ा देखते हैं दूर कहीं सुमसाम में हवा में हम ऐसे रह गए यहाँ जैसे छोड़ दी गई जगह कोई न नगर, न खरपतवार कोई ...
Add a comment...

Post has attachment
जैसे नीला समंदर अपने भरे गले से गा रहा हो.
किसी ऊँची जगह पर चढ़ना और मेहदी हसन की ग़जल सुनना, कमोबेश दोनों का एक ही हासिल है, कम अज कम मेरे लिए तो। ऐसा सुख जिसे हम किसी ऊंचाई पर पहुँच कर भोगते हैं- जैसे पहाड़ पर चढ़ने का सुख। जगजीत सिंह ज्यादातर गज़लों में दुःख गाते हैं। वे एक राग रुदन के साथ तुम्हे अंधे...
Add a comment...

Post has attachment
जिसे आप देख रहे वो व्यापारी, जिसे मैं देख रहा वो अन्नदाता
- खेतों में बीज बो कर धान उगाने वाला अन्नदाता अन्न की बर्बाद नहीं कर सकता. वो अन्न का एक दाना भी अपने पैरों के नीचे नहीं आने देता है. किसानों की आड़ में एक अदृश्य अराजक अपने काम को अंजाम दे रहा है. - और अगर मैं गलत हूं- वो किसान ही है जो सड़कों पर अन्न बर्बाद...
Add a comment...

Post has attachment
मिट्टी दा बावा नय्यो बोलंदा
मिट्टी दा बावा नय्यो बोलंदा,  वे नय्यों चालदां, वे नय्यों देंदा है हुंगारे अकेलेपन की कोई जगह नहीं होती. वह एक एब्स्ट्रैक्ट अवस्था है. एक उदास अंधेरे का विस्तार. कभी न खत्म होने वाली अंधेर गली. इन अंधेर गलियों को हर आदमी कभी न कभी अपने जीते जी भोगता है. जो ...
Add a comment...

Post has attachment
- गायें जो तुम्हारे जीवन में हैं,
- गायें जो तुम्हारे जीवन में हैं, बचपन में माँ उपले बनाती थी। गाय के गोबर के कंडे। फिर घर की दीवारों और ओटले पर उन्हें थेफती थी। घर की कई दीवारें उपलों से भर जाती। जब उपले सूख जाते तो उनका इस्तेमाल घर का चूल्हा जलाने के लिए होता था। उपले थेपते माँ के हाथ उस...
Add a comment...

Post has attachment
जस्टिन ड्रयु बीबर और हम सब
शास्त्रीय संगीत की महफिलों को सजाने के लिए जर्जर और लगभग ढह चुके सभागारों के लिए भी मिन्नतें करना पड़ती हैं। नेताओं के हाथ- पांव जोड़कर उन्हें अतिथि बनाया जाता है। जैक लगाकर टैंट हाउस वालों से दरी और लाल कुर्सियां जुगाड़ना पड़ती हैं। टिकट तो दूर प्रवेश पत्र भी ...
Add a comment...

Post has attachment
जहाँ रुदन था अंतिम
फिर भी तुम नहीं लिख सके नहीं पहुँच सके वहां जहां गर्दन पर नली के ठीक ऊपर सांस के आरोह-अवरोह के बीच तेज़ और चमकदार धार रखी है धूप की तरह उजली और गर्म उस वक़्त कहीं नहीं होती हैं आँखेँ बैगेर लड़खड़ाए कुछ ही क्षण में रक्त अख्तियार कर लेता है खंजर पृथ्वी ने भी देखा...
Add a comment...

Post has attachment
स्थिति
पत्थर दुनिया की सबसे ईमानदार स्थिति  नींद सबसे धोखेबाज़ सुख  तुम मेरी सबसे लंबी प्रतीक्षा  मैं तुम्हारी सबसे अंतिम दृष्टि मौत सबसे ठंडी लपट।   रात सबसे गहरा साथ  छतें सबसे अकेली प्रेमिकाएं  पहाड़ बारिशों के लिए रोए  तो रोने की आवाज़ क्या हो मैं हूँ तो मेरा होन...
Add a comment...

Post has attachment
रोड़ भैरव
जाओ !  आगे निकल जाओ पैर रखकर सर के ऊपर से   नीचे मत देखो  तुम खड़ी भी रह सकती हो जब तक मन करे मेरे सिरहाने तकलीफें लादकर सीने पर मेरे तुम चाहोगी तो सिर्फ सुख की बातें करेंगे चाहो तो साफ़ कर लो जूतें हमारे माथे से रगड़ कर मिट्टी ही घर रही हैं अपना और सफर भी मिट...
Add a comment...

Post has attachment
तुम्हारी रातें
तुम्हारी रातें  सबसे सुंदर रातें हों  उनमे हिज़्र तो कभी न हो  घिरे उतना ही अँधेरा नींदों को तलब जितनी तुम्हारे तकियों का मेरे तकियों से कोई राब्ता न हों  उन्हें भीगने की आदत न लगें  जिस्म में करवटों के सिलसिलें न रहें  तमाम हकीकतों को हाशिये पर रखकर तुम्हार...
Add a comment...
Wait while more posts are being loaded