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Raghwendra Singh Kushwaha
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डा.राम मनोहर लोहिया की पुण्य तिथि पर विशेष
जीवनवृत्त आरम्भिक जीवन एवं शिक्षा डॉ॰ राममनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को  उत्तर प्रदेश  के  फैजाबाद  जनपद में (वर्तमान-अम्बेदकर नगर जनपद)  अकबरपुर  नामक स्थान में हुआ था। उनके पिताजी श्री हीरालाल पेशे से अध्यापक व हृदय से सच्चे राष्ट्रभक्त थे। ढाई वर्...
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जीवनवृत्त आरम्भिक जीवन एवं शिक्षा डॉ॰ राममनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जनपद में (वर्तमान-अम्बेदकर नगर जनपद) अकबरपुर नामक स्थान में हुआ था। उनके पिताजी श्री हीरालाल पेशे से अध्यापक व हृदय से स...
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पूरी दुनिया में कुनियोजित विकास के नारों से कई तरह की विसंगतियाँ पैदा हो गई है ,जिससे आनेवाले दिनों की स्थिति और बदतर होनेवानी है .भारत की परिस्थिति तो जग जाहिर है.विश्व गुरु कहा जानेवाला यह देश आज कहाँ खड़ा है?यह गंभीर प्रश्न...
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मानव सभ्यता के प्रारंभ से ही बल,बुद्धि,धन,रूप आदि के नाम पर इन सब चीजों में कमजोर व्यक्ति का किसी न किसी रूप में शोषण होता रहा है. कालांतर में इन्हीं कारणों से कई तरह की असमानताओं का प्रादुर्भाव हुआ.असमानतासे असंतोष बढ़ता है...
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तेरा भी इतिहास बनेगा तेरी ख़ामोशी ही तेरी बदहाली का कारण है तेरे हुंकार में ही सारी मुसीबतों का निवारण है . तू इंतजार मत कर किसी फ़रिश्ते का न वो आया है न आएगा तेरी बगावत ही नया इन्कलाब लाएगा . हर कोई ...
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आत्मीयता--osho
आत्मीयता :हम सभी इसे चाहते हैं--और हम सभी इससे बचते हैं। क्यों? सभी आत्मीयता से डरते हैं। यह बात और है कि इसके बारे में तुम सचेत हो या नहीं। आत्मीयता का मतलब होता है कि किसी अजनबी के सामने स्वयं को पूरी तरह से उघाड़ना। हम सभी अजनबी हैं--कोई भी किसी को नहीं ...
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आत्मीयता :हम सभी इसे चाहते हैं--और हम सभी इससे बचते हैं। क्यों? सभी आत्मीयता से डरते हैं। यह बात और है कि इसके बारे में तुम सचेत हो या नहीं। आत्मीयता का मतलब होता है कि किसी अजनबी के सामने स्वयं को पूरी तरह से उघाड़ना।...
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मैं नास्तिक क्यों हूँ? - शहीद भगत सिंह
भगतसिंह (1931) मैं नास्तिक क्यों हूँ? यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में प्रकाशित हुआ । इस लेख में भगतसिंह ने ईश्वर कि उपस्थिति पर अनेक तर्कपूर्ण सवाल खड़े किये हैं और इस संसार के निर्माण , मनुष...
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भगतसिंह (1931) मैं नास्तिक क्यों हूँ? यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में प्रकाशित हुआ । इस लेख में भगतसिंह ने ईश्वर कि उपस्थिति पर अनेक तर्कपूर्ण सवाल खड़े कि...
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विडम्बना लोग मानते हैं कि भगवान की मर्जी बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता पर मैं नहीं मानता रोज़ बहुत कुछ ऐसा होता है जिसे भगवान तो क्या भला आदमी भी पसंद नहीं करता । चोर उचक्के अमीर बन रहे हैं अच्छे भले फटेहाल हो रहे हैं काली...
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मेरे सपनों में अक्सर ऐसी एक दुनिया आती है जहाँ सब लोगों में प्रेम है और हर जगह शांति है. ...
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तेरा भी इतिहास बनेगा
 तेरा भी इतिहास बनेगा           -  राघवेन्द्रसिंह कुशवाहा            तेरी ख़ामोशी ही  तेरी  बदहाली का कारण है  तेरे  हुंकार में ही  सारी  मुसीबतों का निवारण है . तू इंतजार मत कर  किसी फ़रिश्ते का  न वो आया है न आएगा तेरी  बगावत ही  नया इन्कलाब लाएगा . हर कोई ...
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तेरा भी इतिहास बनेगा - राघवेन्द्रसिंह कुशवाहा तेरी ख़ामोशी ही तेरी बदहाली का कारण है तेरे हुंकार में ही सारी मुसीबतों का निवारण है . तू इंतजार मत कर किसी फ़रिश्ते का न वो आया है न आएगा तेरी बगावत...
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भगतसिंह (1931) मैं नास्तिक क्यों हूँ? यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में प्रकाशित हुआ । इस लेख में भगतसिंह ने ईश्वर कि उपस्थिति पर अनेक तर्कपूर्ण सवाल खड़े कि...
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