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डॉ. शिवकुमार राजौरिया
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आज़ादी
                                                                                                                    कल देर रात तक काम करने के कारण  सचिन 
की नींद देर से खुली , अधखुली आँखों से ही उसने पास में रखे अपने फोन को
उठाकर टाइम चैक किया  ओह ! आठ बज ग...
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यतीम
आज
मिस्टर मेहता का घर रोशनी से सराबोर था , हो भी
क्यों ना उनके इकलौते बेटे विवेक  का विवाह
जो है। सारा घर खुशियों से महक रहा था। विवेक अपना प्रेम विवाह जो कर रहा है।  पहले उसकी माँ सरला  इस बात के लिए राजी नहीं थी। उसे कतई पसंद नहीं
था कि कोई और बिरादरी की ...
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मनहूस
कल देर रात तक चली पार्टी
के बाद अमन को घर पहुँचते-पहुँचते रात के दो बज गए थे। घर आकर वह उसी हाल में सो
गया जिस हाल में पार्टी से घर आया था। सारा दिन ऑफिस में भागा दौड़ी फिर पार्टी ने
उसे पूरी तरह थका दिया था। जैसे ही वह बिस्तर पर लेटा उसे नींद आ गई। सुबह-सुब...
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मनहूस
कल देर रात तक चली पार्टी
के बाद अमन को घर पहुँचते-पहुँचते रात के दो बज गए थे। घर आकर वह उसी हाल में सो
गया जिस हाल में पार्टी से घर आया था। सारा दिन ऑफिस में भागा दौड़ी फिर पार्टी ने
उसे पूरी तरह थका दिया था। जैसे ही वह बिस्तर पर लेटा उसे नींद आ गई। सुबह-सुब...
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अतीत
 वर्षों पहले जीवन
में हुए हादसे ने सुनंदा के बसे-बसाए घर को तहस-नहस कर दिया था| हादसों की चोट ने
हँसती-मुस्कुराती सुनंदा के चेहरे पर ना मिटनेवाली उदासी भर दी थी|  एक सड़क हादसे में उसके पति रोहन की मृत्यु हो गई
थी| उस सड़क हादसे में सुनंदा और उसकी तीन साल की ...
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अतीत
वर्षों पहले जीवन में हुए हादसे ने सुनंदा के बसे-बसाए
घर को तहस-नहस कर दिया था| हादसों की चोट ने हँसती-मुस्कुराती सुनंदा के चेहरे पर
ना मिलनेवाली उदासी भर दी थी|  एक सड़क हादसे
में उसके पति रोहन की मृत्यु हो गई थी| उस सड़क हादसे में सुनंदा और उसकी तीन साल
की ब...
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संघर्ष
चौबीस साल की सोनल की आँखें आज भी उन
चार दीवारों के बीच कुछ खोजती, उनसे बातें करती रहती | उसके मन में एक सवाल था , एक कशमकश थी जिसका   जवाब उसे आज तक नहीं मिल सका था | सोनल को इस मानसिक रोगी अस्पताल में आए हुए करीब एक साल बीत चुका था | इस एक साल में उसने मुश...
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यात्रा
                                                                                                   अनुराग हैदराबाद के नामपल्ली रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में   बैठकर प्रेमचंद का मशहूर उपन्यास गोदान बड़ी तल्लीनता से पढ़ रहा था| स्टेशन पर चारों
ओर लोगों की भीड़ ...
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