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Praveen Ksehri
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सुप्रीम कोर्ट मे ... सेना से जज लाना होगा !
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हमने खाई है कसम आज शहीदों के लिए
सुप्रीम कोर्ट मे ... सेना से जज लाना होगा

आतंकवादीयो से प्रेम ...... सैनिको से पीड़ा
नफरती सोच से न्यायालय को बचाना होगा

चेक पोस्ट पर तैनात सैनिको के फायर खोलने को
न्यायालय मे .................... जायज ठहराना होगा

देश की रक्षा-सुरक्षा के लिए सैनिक को तीहाड़ जेल
ऐसे न्यायालय और मानवाधिकार को मिटाना होगा

आका आतंक के, जो सुप्रीम कोर्ट मे बैठे .. छुप कर
उनका भी सहीं चेहरा, जनता के सामने लाना होगा

अगर आतंकवाद को मिटाना है हमें तो
सख्त कानून कोई, आज बनाना होगा

न्यायालय मे कानून की जगह
न्याय को लेकर .. आना होगा

जनता, देश, सेना और सैनिक के स्वभिमान मे
एक साथ मिलकर ............ हाथ उठाना होगा

चेक पोस्ट पर ...........फायर खोलने वाले
तीनो सैनिको को जेल से बाहर लाना होगा

सैनिको के प्रति सच्चा सम्मान दिखाना होग
सुप्रीम कोर्ट मे ..... सेना से जज लाना होगा

😄😄😄😄
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संकेतों में बतला देना !
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अंत समय मे जख्मी सैनिक कहता है
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतों में बतला देना।

यदि हाल मेरी माता पूछें तो, जलता दीप बुझा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, दो आंसू तुम छलका देना।

यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, राखी तोड़ दिखा देना।

यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना।

यदि हाल मेरा पापा पूछे तो, हाथों को सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना।

यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सीने से उसको लगा लेना।

यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सैनिक धर्म बता देना।।

😄😄😄
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सैनिक तेरी बात, सियासत और सुप्रीम कोर्ट मे नही सुनी जायेगी !
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रात को कोर्ट खोलकर
आतंकवादियो-गद्दारो पर सर धुनी जायगी
सैनिक तेरी बात
सियासत और सुप्रीम कोर्ट मे नही सुनी जायेगी।

क्या हुआ जो तू शहीद हुआ,
तू तो मरने के लिए ही था!!
फिर बातें होंगी कश्मीर की-पत्थरबाजों की,
फिर तुझे कोई सजा सुनाई जायेगी।
फिर चलेगी सियासत की यही लाल-फीताशाही,
फिर वही नीति नक्सली चलायी जायेगी।

क्या हुआ जो तेरी माँ की चुनरी,
अश्कों से भीग जाएगी!
जिन कंधों पे झूले खूब बचपन में,
उन्हीं पर तेरी अंतिम सवारी जाएगी!

क्या हुआ जो राखी लिए बैठी बहना,
फिर न तेरी राह तकने जाएगी!
क्या हुआ जो संगिनी की,
सिन्दूरी माँग सूनी हो जाएगी!

क्या हुआ जो तेरी लाडो,
अब न गुड़िया लाने को कहेगी!
क्या हुआ जो बेटे की,
आस अधूरी रह जाएगी!

क्या हुआ जो तुझसे,
बिछड़ गया परिवार तेरा!
क्या हुआ जो बगिया का,
फूल मुरझा गया!!

चन्द दिन कुछ अश्क बहाये जायेंगे,
अखबारों के पहले पृष्ठ तेरे नाम किये जायेंगे,

कैण्डिल मार्चों का कुछ दौर चलाया जाएगा,
फिर वही काली चदरिया ओढ़ ली जाएगी!
और फिर सब कुछ भुला के,
कातिलों संग दावतों में रोटियाँ तोड़ी जायेंगी

एक बार फिर तेरी शहादत बेकार जायेगी,
और सियासती दौर में संवेदनाएँ हार जायेंगी।

आतंकवादियो-गद्दारो पर सर धुनी जायगी
लेकिन सैनिक तेरी बात
सियासत और सुप्रीम कोर्ट मे नही सुनी जायेगी।

😄😄😄

देश पर जो शहीद हुए, उन्हे नमन।
लेकिन जो देशभक्त सैनिक जेल मे है
उसपर चुप क्यो है पत्थर के सनम।।

😃😃😃
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🕉

●|| ह्रदय स्पर्श ||●

जब तक चलेगी जिंदगी की सांसे,
कहीं प्यार कहीं टकराव मिलेगा ।
कहीं बनेंगे संबंध अंतर्मन से तो,
कहीं आत्मीयता का अभाव मिलेगा

कहीं मिलेगी जिंदगी में प्रशंसा तो,
कहीं नाराजगियों का बहाव मिलेगा
कहीं मिलेगी सच्चे मन से दुआ तो,
कहीं भावनाओं में दुर्भाव मिलेगा ।

कहीं बनेंगे पराए रिश्तें भी अपने तो
कहीं अपनों से ही खिंचाव मिलेगा ।
कहीं होगी खुशामदें चेहरे पर तो,
कहीं पीठ पे बुराई का घाव मिलेगा।

तू चलाचल राही अपने कर्मपथ पे,
जैसा तेरा भाव वैसा प्रभाव मिलेगा।
रख स्वभाव में शुद्धता का 'स्पर्श' तू,
अवश्य जिंदगी का पड़ाव मिलेगा ।

😄😄😄
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विद्या वाद-विवाद के लिए नहीं है !
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गंगा पार होने के लिए पंडित जी एक नौका में बैठे, धीरे-धीरे नौका सामने वाले किनारे की ओर बढ़ रही थी।

पंडित जी ने नाविक से पूछा “क्या तुमने भूगोल पढ़ी है ?”

भोला- भाला नाविक बोला “भूगोल क्या है ? इसका मुझे कुछ पता नहीं।”

पंडितजी ने पंडिताई का प्रदर्शन करते कहा, “तुम्हारी पाव भर जिंदगी पानी में गई।”

फिर पंडित जी ने दूसरा प्रश्न किया, “क्या इतिहास जानते
हो? महारानी लक्ष्मीबाई कब और कहाँ हुई तथा उन्होंने कैसे लडाई की ?”

नाविक ने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की तो पंडित जी ने विजयीमुद्रा में कहा “ये भी नहीं जानते तुम्हारी तो आधी जिंदगी पानी में गई।”

फिर विद्या के मद में पंडित जी ने तीसरा प्रश्न पूछा “महाभारत का भीष्म-नाविक संवाद या रामायण का केवट और भगवान श्रीराम का संवाद जानते हो ?”

अनपढ़ नाविक क्या कहे, उसने इशारे में ना कहा, तब पंडित जी मुस्कुराते हुए बोले “तुम्हारी तो पौनी जिंदगी भी पानी में गई।”

तभी अचानक गंगा में प्रवाह तीव्र होने लगा। नाविक ने सभी को तूफान की चेतावनी दी, और पंडित जी से पूछा “नौका तो तूफान में डूब सकती है, क्या आपको तैरना आता है ?”

पंडित जी घबराहट में बोले “मुझे तो तैरना-वैरना नहीं आता है ?”

नाविक ने स्थिति भांपते हुए कहा ,“तब तो समझो आपकी पूरी जिंदगी पानी में गयी।”

कुछ ही देर में नौका पलट गई। और पंडित जी बह गए।

#विद्या वाद-विवाद के लिए नहीं है और ना ही दूसरों को नीचा दिखाने के लिए है। लेकिन कभी-कभी ज्ञान के अभिमान में कुछ लोग इस बात को भूल जाते हैं और दूसरों का अपमान कर बैठते हैं। याद रखिये, समस्याओं के समाधान में "ज्ञान" का प्रयोग होना चाहिए।

ज्ञान को शस्त्र बना कर हिंसा करने के लिए नहीं कहा गया है, जो पेड़ फलों से लदा होता है उसकी डालियाँ झुक जाती हैं।

#ज्ञान प्राप्ति होने पर सज्जनों में शालीनता आ जाती है। इसी तरह , विद्या जब विनयी के पास आती है तो वह #शोभित
हो जाती है। इसीलिए संस्कृत में कहा गया है, ‘विद्या विनयेन शोभते।’

😄😄😄
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मिया-बीवी का झगड़ा !
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बीवी गुस्से मे बोली - बस, बहुत कर लिया बरदाश्त, अब एक मिनट भी तुम्हारे साथ नही रह सकती।

पति भी गुस्से मे था, बोला "मैं भी तुम्हे झेलते झेलते तंग आ चुका हुं।

पति गुस्से मे ही दफ्तर चला गया, पत्नी ने अपनी मां को फ़ोन किया और बताया के वो सब छोड़-छाड़ कर बच्चो समेत मायके आ रही है, अब और ज़्यादा नही रह सकती इस जहन्नुम मे।

मां ने कहा - बेटी बहु बन के आराम से वही बैठ, तेरी बड़ी बहन भी अपने पति से लड़कर आई थी, और इसी ज़िद्द मे तलाक लेकर बैठी हुई है, अब तुने वही ड्रामा शुरू कर दिया है, ख़बरदार जो तुने इधर कदम भी रखा तो... सुलह कर ले पति से, वो इतना बुरा भी नही है।

मां ने लाल झंडी दिखाई तो बेटी के होश ठिकाने आ गए और वो फूट-फूट कर रो दी, जब रोकर थकी तो दिल हल्का हो चुका था,
पति के साथ लड़ाई का सीन सोचा तो अपनी खुद की भी काफ़ी गलतियां नज़र आई।

*मुहं हाथ धोकर फ्रेश हुई और पति के पसंद की डीश बनाना शुरू कर दी, और साथ स्पेशल खीर भी बना ली, सोचा कि शाम को पति से माफ़ी मांग लुंगी, अपना घर फिर भी अपना ही होता है।

पति शाम को जब घर आया तो पत्नी ने उसका अच्छे से स्वागत किया, जैसे सुबह कुछ हुआ ही ना हो, पति को भी हैरत हुई। खाना खाने के बाद पति जब खीर खा रहा था तो बोला डिअर, कभी कभार मैं भी ज़्यादती कर जाता हुं, तुम दिल पर मत लिया करो, इंसान हुं, गुस्सा आ ही जाता है"।

पति पत्नी का शुक्रिया अदा कर रहा था, और पत्नी दिल ही दिल मे अपनी मां को दुआएं दे रही थी, जिसकी सख़्ती ने उसको अपना फैसला बदलने पर मजबूर किया था, वरना तो जज़्बाती फैसला घर तबाह कर देती।

अगर माँ-बाप अपनी शादीशुदा बेटी की हर जायज़ नाजायज़ बात को सपोर्ट करना बंद कर दे तो रिश्ते बच जाते है।

😄😄😄
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रीढ़ की हड्डी में गैप !
🌹🌹🌹🌹🌹🌹

पीठ में बहुत दर्द था...
डाॅक्टर ने कहा
अब और
मत झुकना
अब और अधिक झुकने की
गुंजाइश नहीं रही

झुकते-झुकते
तुम्हारी रीढ़ की हड्डी में
गैप आ गया है

सुनते ही हँसी और रोना
एक साथ आ गया...

ज़िंदगी में पहली बार
किसी के मुँह से
सुन रही थी
ये शब्द
"मत झुकना..."

बचपन से तो
घर के बड़े, बूढ़ों
माता-पिता
और समाज से
यही सुनती आई है,
"झुकी रहना..."

नारी के
झुके रहने से ही
बनी रहती है गृहस्थी...

नारी के
झुके रहने से ही
बने रहते हैं संबंध

नारी के
झुके रहने से ही
बना रहता है
प्रेम...प्यार...घर...परिवार

झुकती गई,
झुकते रही,
झुकी रही,
भूल ही गई...
उसकी कहीं कोई
रीढ़ भी है...

और ये आज कोई
कह रहा है
"झुकना मत..."

परेशान-सी सोच रही है
कि क्या सच में
लगातार झुकने से
रीढ़ की हड्डी
अपनी जगह से
खिसक जाती है ?

और उनमें कहीं गैप,
कहीं ख़ालीपन आ जाता है ?

सोच रही है...

बचपन से आज तक
क्या क्या खिसक गया
उसके जीवन से
कहाँ कहाँ ख़ालीपन आ गया
उसके अस्तित्व में
कहाँ कहाँ गैप आ गया
उसके अंतरतम में

बिना उसके जाने समझे...

उसका
अल्हड़पन
उसके सपने
कहाँ खिसक गये

उसका मन
उसकी चाहत
कितने ख़ाली हो गये

उसकी इच्छा, अनिच्छा में
कितना गैप आ चुका

क्या वास्तव में नारी की
रीढ़ की हड्डी
बनाई है भगवान ने
समझ नहीं आ रहा...

...🙏🙏🙏🙏...
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महाभारत कालीन युग, अभी कहां बीता !
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प्रपोज डे,
का दुःखद पोज डे।

प्रदेश भर में, देश भर में
बेटी बचाओ, बेटी बचाओ
गॅाव-गॅाव, शहर-शहर में

बेटी बचाओ अभियानों की
बड़ी भारी सफलता दिखने लगीं है।
पैदाबार इस कदर बढ़ी बेटियों की
कि होते ही पैदा,
कचरे में, झाड़ियों में, पॉलीथिन के रैपर में ,
फिकने लगीं हैं।।

प्यार के खुमार में
परिणाम आते है नित्य
नबजात बच्ची,
कचरे में पड़ी मिलतीं
कभी जिंदा तो कभी मृत

जीवन की हकीकत को
वयां करती आधुनिक फ़रेब
छद्मवेश पुरूषों, महिलाओं की हैवानियत,
बीभत्स करतूतें देख,

मेरी चट्टान से भी मजबूत छाती, हिल जाती है।
क्योंकि अखबार की पिछली ख़बर
अभी बासी भी नहीँ हुई थी,
कि एक औऱ नबजात कचरे में मिल जाती है।।

काश ?
प्यार मे होती मर्यादा
प्यार मे होता प्यार की खनक
काश ?
नबजात बच्ची को भी
मिल जाता कोई जनक,

तो यह भी, बन सकती थी सीता।
कहने भर को 21वीं सदी में जा रहे हैं, हम?
मगर हमारे भीतर,
महाभारत कालीन युग, अभी कहां बीता।।
अभी कहाँ बीता।।।

😄😄😄😄
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ये चलती फिरती उम्र, फिर नहीं आएगी !
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जब उम्र बढ़ जाएगी, इत्र की जगह,
आयोडेक्स की खुशबू आएगी;
कहता हूँ अब भी मिल लो यारों,
ये घड़ियाँ पलटकर नहीं आएंगी।

अभी तो आँखो में नूर बाकी है,
फिर खूबसूरती नज़र नहीं आएगी,
अभी तो यार होंगे अपने साथ,
फिर केवल छड़ी ही नज़र आएगी।

आवाज़ सुन लो दोस्तों की,
फिर कानों में मशीन नज़र आएगी;
हँस लो, खिलखिला कर आज,
फिर नकली बत्तीसी झलक दिखाएगी।

जब दोस्त बुलायें, चले जाओ,
फिर डॉक्टर से, फुर्सत नहीं मिल पाएगी,
सम्हल जाओ, समझ जाओ यारों,
ये चलती फिरती उम्र, फिर नहीं आएगी।

😄😄😄
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मृत्यु भोज पर कविता

जिस आँगन में पुत्र शोक से
बिलख रही माता,
वहाँ पहुच कर स्वाद जीभ का
तुमको कैसे भाता ?

पति के चिर वियोग में व्याकुल
युवती विधवा रोती,
बड़े चाव से पंगत खाते
तुम्हें पीर नहीं होती,

मरने वालों के प्रति अपना
सद व्यहार निभाओ,
धर्म यही कहता है बंधुओ
मृतक भोज मत खाओ,

चला गया संसार छोड़ कर
जिसका पालन हारा,
पड़ा चेतना हीन जहाँ पर
वज्रपात दे मारा,

खुद भूखे रह कर भी परिजन
तेरहबी खिलाते,
अंधी परम्परा के पीछे
जीते जी मर जाते,

इस कुरीति के उन्मूलन का
साहस कर दिखलाओ,
धर्म यही कहता है बंधुओ,
मृतक भोज मत खाओ।

😄😄😄
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