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Divanshu Goyal
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After long time a poem describing struggle between reality and dreams........"बच्चे की नींद" ...!! Hv a look!
गहराती रात में,
टिमटिमाती दो आँखें,
एक में सपने,
एक भूख.............
बच्चे की नींद
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बच्चे की नींद
गहराती रात में, टिमटिमाती दो आँखें, एक में सपने, एक भूख, अंतर्द्वंद दोनों का, समय के विरुद्ध, एक आकाश में उड़ाता है, एक जमीं पे लाता है, एक पल के लिए, सपने जीत चुके थे मगर, भूख ने अपना जाल बिखेरा, ला पटका सपनों को, यथार्थ की झोली में, सब कुछ बिकाऊ है यहाँ, स...
बच्चे की नींद
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Dedication, Dignity & Honesty- My Role Model
I am writing about <a title="#MyRoleModel Activity" href="http://myrolemodel.blogadda.com" target="_blank">#MyRoleModel</a> as a part of the activity by <a title="Gillette India" href="http://www.rewardme.in/tag/gillette-cricket" target="_blank">Gillette In...
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One of my poems..closest to my heart!!
रेल की पटरियां
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रेल की पटरियां
रेल की दो पटरियां, अनवरत चलती हुई, जीवन की जटिलताओं से दूर, मानो ज़िद हो गंतव्य तक पहुँचने की, रुकावटें अनेक पड़ती हैं, मोड़ अनेक मुड़ते हैं, हर मोड़ पे आके कांधा देती, एक तीसरी पटरी, मानो ज़िद हो अपना वादा निभाने की, कभी जेठ की गर्मी से, कभी फूस की सर्दी से, समझ...
रेल की पटरियां
रेल की पटरियां
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A poem which tries to depict the struggle between self and his Targets.
Keeping his morale high and steady!

http://divanshugoyalsparsh.blogspot.in/2014/01/haarnaabtumaanlena.html 
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हार न अब तू मान लेना
राह में पाषाण युग है, श्वान भूँकते अनवरत हैं, परिस्थितियों की वक्र रेखा, सर्पदंश यहाँ अनगिनत हैं, काल का तू पी हलाहल, समय की हुंकार लेना, कंटकों पर चलने वाले, हार न अब तू मान लेना। भ्रम का धूमकेतु अडिग है, विषमताओं का पाश है, सत्य से हो रहा प्रवंचन, विचलित ...
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हार न अब तू मान लेना
राह में पाषाण युग है, श्वान भूँकते अनवरत हैं, परिस्थितियों की वक्र रेखा, सर्पदंश यहाँ अनगिनत हैं, काल का तू पी हलाहल, समय की हुंकार लेना, कंटकों पर चलने वाले, हार न अब तू मान लेना। भ्रम का धूमकेतु अडिग है, विषमताओं का पाश है, सत्य से हो रहा प्रवंचन, विचलित ...
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