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Rajesthani bhjan songs
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गाँव का दर्द
गांव हुए हैं अब खंढहर से,  लगते है भूल-भुलैया से। किसको अपना दर्द सुनाएँ, प्यासे  मोर पप्या ? आंखो की नज़रों की सीमा तक, शहरों का ही मायाजाल है, न कहीं खेत दिखते, न कहीं खुला आसमान। मुझे लगता है कोई राह तकता, वो पानी का पनघट और झूले। हरियाली तो अब टीवी मे द...

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शीत की प्रीत
आज शीत ने फिर मुझ से  प्रीत की है  क्यो उससे फिर अनुराग बढ़ता जा रहा है यौवन स्नेह सी बांध रही है यह शीत लहर मुझे     ओर फिर से चहतों का विस्तार बढ़ता जा रहा है     धुंध धीरे धीरे अपने आगोश मे ले रही   जेसे बाहो की परिधि हो मेरी माशूका की  आज सूरज और सर्द में...

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कोम की चेतावनी
तुम बेशक हो सरताज तो हम यहाँ बुनियाद हैं, हमसे ही है यह सरताज जो सदियों से आबाद है।  रोटियों का दर्द लेकर जी रही है यह क़ौम, कब तलक करते रहेगे, व्यर्थ की फ़रियाद ? और कितना इस क़दर भरते रहोगे ज़ेब को, तुम्हारा कुछ हो न हो पर कोम तो बर्बाद हो रही। तुमने चाहा ...

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राजस्थान री रीत
बता राजस्थान  "बाँ " थारी रीत कठै।                                              
सीस कटियोड़ा धड़ लड़ रहया एडा पूत कठै। 
गाया खातर गाँव गाँव मे बलिदानी जुंझार कठै।                           
फेरा सू अधबीच मे उठतों "बो" पाबू राठोर कठै ।   
कठै है अब "बा" भामाशाह साहूकार री रीत। 

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राजस्थान री रीत
बता राजस्थान  "बाँ " थारी रीत कठै।                                              
सीस कटियोड़ा धड़ लड़ रहया एडा पूत कठै। 
गाया खातर गाँव गाँव मे बलिदानी जुंझार कठै।                           
फेरा सू अधबीच मे उठतों "बो" पाबू राठोर कठै ।   
कठै है अब "बा" भामाशाह साहूकार री रीत। 

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एक छोटी से कोशिश की है 

घर में शादी का कार्ड देखते ही मन में एक अलग सा ही उत्साह बन जाता है पड़ोस मे सिंह साब के छोटे लड़के की शादी है, आज कल एक चलन ही हो गया है सभी को कार्ड देने का। कार्ड देखकर हमें अपनी शादी के दिन याद आ गए। फिर हमने अपनी भावनाओ को रोका और कार्ड को पढने लग गये,चाहे वर और वधु खुबसुरत हो ना हो कार्ड सुन्दर सा छपवाया जाता है, उसमे भी किसी पहुचे हुए आदमी या फिर किसी नेताजी को मुख्य अथिति के रूप मे बड़े बड़े शब्दों मे लिखा रहता है, हमने श्रीमती से पूछा किसकी शादी का कार्ड है तो वो जुंझलाकर बोली की आप अनपढ़ तो हो नहीं जो कार्ड नहीं पढ़ सकते हो, अगले दिन ही श्रीमती जी सुबह सुबह ही सज धज के तेयार हो गये शादी मे जाने के लिए हमने कहा की शादी सायं की आप के पेरों मे तो अभी ही घूघरू लग गये है।

http://nimbijodhan.blogspot.in/2013/06/blog-post_9.html

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सही लिखा है महावीर सा आपने आदमी मर जाता है तब ही  उसकी ख्वाइसे  मरती है जीते जी कभी पूरी नहीं होती है
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