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Surinder Ratti
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Surinder Ratti

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गीत न. ३
गीत न. ३ लहरों के सीने पे वो कुछ लिख आया धुंधला था संदेसा कोई समझ न पाया आहों की गली से सांसें गुज़रती हैं हौले-हौले कदम आगे धरती हैं अपने घर में जैसे कोई हो पराया इन सुर्ख नज़रों से लहू न सूखे पल हंसी के चुराये सपने भी लूटे जी भर के कोसा और खूब रुलाया अब गर्...
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Surinder Ratti

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जीने की आदत
जीने की आदत बिन पिये ही जीने की आदत बना ले अपने रूठे-टूटे दिल को तू मना ले मरकज़ मन्ज़िल का देख दिन-रात उस बिखरी हुई सोच को जमा ले   ये ज़िन्दगी कश के सिवा कुछ और भी है अगर उड़ाना है तो अपने ग़मों को उड़ा ले   उनको बर्बादियों के ताने-बाने बुनने दे तू संगदिलों में...
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Surinder Ratti

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सियासी लीडर
सियासी लीडर   क्या लीडर सच्चा होता है, अपनी अवाम का । या फिर भूखा दौलत का, नहीं किसी काम का ।।      नक़ाब-पे-नक़ाब ओढ़ के, निकले अपने घर से, बखूबी रोल अदा करे वो, शातिर बेईमान का ।     उनकी सियासी चालों से, हम तो नहीं वाक़िफ़, खामोशियों में था इशारा, लोगों के क़त...
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Surinder Ratti

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ग़ज़ल - १४
ग़ज़ल - १४ याद उसकी बड़ी सुहानी थी। बस मेरे पास इक निशानी थी।। रात भर जाग के गिने तारे, सुबह तक साँस भी बचानी थी। प्यार की मार भी अनोखी है, और हमको किमत चुकानी थी। बंद देखा हरेक दरवाज़ा, उनको हमसे नज़र चुरानी थी। हो मिलनसार तो बहुत अच्छा, फिर मुहब्बत फकत निभानी ...
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Surinder Ratti

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मासूम ख़लक़त
मासूम ख़लक़त ग़रज़ की मारी दुनियाँ हर अदा कीमत करती है। मुसीबत के वक़्त ही खुद को याद करती है ।। यूँ तो तरकश में लाखों तीर सजा रक्खे हैं, तलाश इक मौके की मिलते ही वार करती है।  जज़्बात, वफ़ा, प्यार भी तो सारे हथियार हैं, जाल बुनकर धोखे से सबका शिकार करती है। ज़िन्द...
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Surinder Ratti

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ग़ज़ल - १३
ग़ज़ल - १३   बात झूठी भी खरी होने लगी। वो कहावत अब सही होने लगी।। रास्ते ये प्यार के, मंज़िल हसीं, उनसे मुझको दिल्लगी होने लगी।   ख्वाहिशें उस चाँद की बढ़ने लगीं, तू-तू मैं-मैं रोज़ ही होने लगी।   रात सारी गुफ़तगू में थी मगर, सुब्ह चुप-चुप थी, दुखी होने लगी।   ...
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ग़ज़ल - १३   बात झूठी भी खरी होने लगी। वो कहावत अब सही होने लगी।। रास्ते ये प्यार के, मंज़िल हसीं, उनसे मुझको दिल्लगी होने लगी।   ख्वाहिशें उस चाँद की बढ़ने लगीं, तू-तू मैं-मैं रोज़ ही होने लगी।   रात सारी गुफ़तगू में थी मगर,...
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मन की आवाज़
मन की आवाज़ अच्छे सपनों को परवाज़ दीजिये जो काम सोचा उसे पूरा कीजिये कोई तुम्हारा नसीब नहीं बदल सकता खुद कुआँ खोद के पानी पीजिये ये शब के तारे कुछ पल ही चमकेंगे ये अब्र भी थोड़ी देर को बरसेंगे अपने हौसलों को ज़िंदा कीजिये     मुहोब्बत के साये में धोखा पाओगे जो ...
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Surinder Ratti

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कटी पतंग
कटी पतंग बचपन पतंगों की बहार सा लाड, प्यार, दुलार सा हुड़दंग, शरारत, मस्ती नन्हे होंठों पे मुस्कान हस्ती कौन आया कौन गया क्या खाया क्या पकाया क्या टुटा क्या फूटा न चोट का डर, न दर्द की खबर फिर आया जवानी का अनोखा व्यव्हार बात-बात पे गुस्सा प्रतिकार खिलने लगे ...
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Surinder Ratti

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गीत न. २
गीत न. २ जाने कब आता है, जाने कब जाता है। निरमोहिया है वो, बहुत सताता है।। समझ के भी रोज़-रोज़ नासमझी करे, ऐसी हरकतों से होते दिल के घाव हरे , मीठी-मीठी बातों से उल्लू बनता है नैनो की भाषा जाने इशारों को पहचाने, खता पे खता करे बात कभी न माने , खुद हँसता रहता ...
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Surinder Ratti

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गीत - १
गीत - १ चल तू भी उसी डगर पे जहाँ तेरी हो सुनवायी दुःख के बदल सब छुप जायें दिल कहे अब शांति पायी आस के पैर नहीं अब टिकते वो रहनुमां थे नहीं दिखते कई बार एहसास हुआ ये बेवजह उदासी छायी ये समां भी महंगा इतना समझाऊँ मैं उसको कितना छोड़ दे मुझे अकेला काहे तूने चोट...
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गीत - १ चल तू भी उसी डगर पे जहाँ तेरी हो सुनवायी दुःख के बदल सब छुप जायें दिल कहे अब शांति पायी आस के पैर नहीं अब टिकते वो रहनुमां थे नहीं दिखते कई बार एहसास हुआ ये बेवजह उदासी छायी ये समां भी...
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सियासत  खामोश रहने की हिदायत  देते सब हालात  कहा गिरवी रख छोड़े हमने  अच्छे वो ख्यालात  मन मुआफ़िक़ हर काम करें  मतलब से करे वो बात  हर बात धुएं में उड़ाते  कब मिलेगी निजात  आज़ादी की परवाज़ काश  पहले सी फिर होती...
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