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Surinder Ratti
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Surinder Ratti

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हक़
हक़  कुदरत तूने जो किया, तेरा पूरा हक़ है  मगर बन्दे सबको तेरी, सोच पे शक है  तू जाग के भी सोता रहा रात-दिन  अब वक़्त है सड़ती लाशों को गिन  राहत की बातें खालिस बक-बक है  शिवाले की मूर्ति ने जो नज़ारा देखा क्या सही होगी इससे हाथों की रेखा  जिनको दौलत मिली उनका ल...
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Surinder Ratti

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गीत न. ३
गीत न. ३ लहरों के सीने पे वो कुछ लिख आया धुंधला था संदेसा कोई समझ न पाया आहों की गली से सांसें गुज़रती हैं हौले-हौले कदम आगे धरती हैं अपने घर में जैसे कोई हो पराया इन सुर्ख नज़रों से लहू न सूखे पल हंसी के चुराये सपने भी लूटे जी भर के कोसा और खूब रुलाया अब गर्...
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जुड़वा भाई
जुड़वा भाई  कभी दो भाई ऐसे देखें हैं  जो पास होकर भी दूर हैं  पहला बाहर वाला  हर वक़्त दुनियां के सामान  ऐशो-आराम में खोकर ज़हन में कूड़ा भरता गया   दूजा अंदर वाला  उसे देख जलता गया  वो नज़ारा था, वो  वहम था, जो देखा था  क्या था   उसमें    सुख-दुःख, दर्द-ग़म थे  ...
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परिवार
परिवार  उन लहरों का मचलना, मिलन करें किनारों से ये ज़िन्दगी भी पनपती, खिलती है परिवारों से   इन रिवाज़ों के भवंर का, कुछ तो होता है असर  दे सदा आबाद कुनबे, ऊँचे बड़े मीनारों से    नाते-रिश्तों की ज़ंजीरें, मज़बूत हैं फौलाद सी  महक उठती प्यार की, दिल के गलियारों ...
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Surinder Ratti

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तीन घंटे का पर्चा
तीन घंटे का पर्चा  चंद सांसों का खेल  कुछ कल थीं, कुछ आज हैं,  कुछ कल आयेंगी  ये सांसें एक नज़राना हैं  जिसका हम हर दिन लुत्फ़ उठा रहे हैं  हर सुबह के साथ नयी  दास्तां लिखते रहे हयात की जानिब से  काँटों को ढोने  के सिवा  कुछ न हुआ हासिल  आज कुछ लम्हों ने  थोड़...
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