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Parmatmprakash Bharill
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life is not a short term, it is a long term assignment leaving a deep impact on life after this life, can't &must not waste life by involving ourselves in today's challenges only,solve them or they will disappear with the time. plan your activities for ever, keeping a long life ahead in mind,even life after this life .
life is not a short term, it is a long term assignment leaving a deep impact on life after this life, can't &must not waste life by involving ourselves in today's challenges only,solve them or they will disappear with the time. plan your activities for ever, keeping a long life ahead in mind,even life after this life .

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स्वर्णजयन्ती गीत : लो स्वर्णजयन्ती बर्ष आगया ज्ञानतीर्थ जिनधाम का
टोडरमल स्मारक भवन  का स्वर्णजयन्ती गीत - परमात्म प्र का श भारिल्ल लो स्वर्णजयन्ती बर्ष आगया  ज्ञान तीर्थ   जिनधाम   का जिसने जग में  अलख जगाया   वीतरागवि ज्ञान    का वास यहां   भावी सिद्धों  का    ध्यान हो आतमराम  का वीरकुन्द  वा   टोडरमल  गुरुदेव  कहान महा...
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jaipur,wednesday, 2 dec. 2015, 7.37 am एक राजा का राज्य छिन गया, दूसरे राजा ने उसपर आक्रमण करके उसे हरा दिया, तो वह विलाप करता है. इसे अन्याय कहता है, अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों का हनन बतलाता है. क्या उसका यह विलाप सही है? क्या सचमुच उसके साथ अन्याय हुआ है...
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हम महामूर्ख हें या महाधूर्त?
 
हम महाअज्ञानी हें या महामक्कार? 

हम महाभोले हें या महाधोखेबाज? 

हम महाजड़ हें या महाझूंठे?

हम स्वयं धोखा खागए या दुनिया को धोखा देते रहे?
आज तय तो करना होगा न!

“टक्कर कांटे की है, मुकावला बराबरी का है, कह नहीं सकते कि कौन जीतेगा- कौन हारेगा, यह भी हो सकता है वह भी हो सकता है.”
अरे! अब यहतो कौन नहीं जानता है कि या तो यह होगा या वह होगा. मात्र इसके लिए आप जैसे इतने बुद्धिमान लोगों को कष्ट करने की क्या जरूरत थी?

- परमात्म प्रकाश भारिल्ल 

(विहार चुनाव परिणामों और उनकी भविष्यवाणियों के सन्दर्भ में एक विवेचन )

विस्तृत विवेचन के लिए नीचे लिंक पर क्लिक कीजिये -
http://parmatmprakashbharill.blogspot.in/2015/11/blog-post_7.html
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हम महामूर्ख हें या महाधूर्त? हम महाअज्ञानी हें या महामक्कार? हम महाभोले हें या महाधोखेबाज? हम महाजड़ हें या महाझूंठे?
jaipur, monday, 8th naov.2015, 3.07 am हम महामूर्ख हें या
महाधूर्त ? हम
महाअज्ञानी हें या महामक्कार ? हम महाभोले हें या महाधोखेबाज ? हम महाजड़
हें या महाझूंठे ? - परमात्म
प्रकाश भारिल्ल   बात विहार के चुनाबों की चल रही है. दो महिने से ये सभी महानलोग बस एकही ...
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जैन दर्शन की अनुपम जीवनशैली सल्लेखना विगत दिनों व्यर्थ ही विवादों में घिर गई. तथ्यों की नासमझी या गैरसमझ किस प्रकार दुष्परिणामों के रूप में प्रतिफलित हो सकती है इस बात का ज्वलंत उदाहरण है सल्लेखना (संथारा) के सम्बन्ध में उठ खड़ा हुआ यह विवाद.

सल्लेखना क्या है, सल्लेखना का उद्देश्य और प्रक्रिया क्या है, इसका क्या महत्व है और जीवन की सफलता और सम्पूर्णता में इसका क्या योगदान है? इन सभी सबालों के जबाब पाने के लिए पढ़ें यह विवेचनापूर्ण तार्किक आलेख.

साथ ही पढ़िए कि सल्लेखना को यदि आत्महत्या करार दिया जाता है तो कौनकौनसी कानूनी विसंगतियां उत्पन्न हो सकती हें. 

- परमात्म प्रकाश भारिल्ल 


सम्पूर्ण आलेख पढने के लिए क्रप्या नीचे लिंक पर क्लिक करें -
http://parmatmprakashbharill.blogspot.in/2015/11/blog-post_8.html
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सल्लेखना : वर्तमान परिपेक्ष्य
सल्लेखना   :   वर्तमान परिपेक्ष्य -      परमात्म प्रकाश भारिल्ल तथ्यों की नासमझी या गैरसमझ किस प्रकार दुष्परिणामों के रूप में प्रतिफलित हो सकती है इस बात का ज्वलंत उदाहरण है सल्लेखना (संथारा) के सम्बन्ध में आया राजस्थान हाईकोर्ट का निर्णय. किस प्रकार अनजाने...
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अरे! दुनिया के सभी प्राणी तो हर कीमत पर जीवित रहना चाहते हें और मृत्यु से डरते हें, पर जिसे जीवन का ही मोह न रहा उसे भला म्रत्यु से मोह कैसे होगा, म्रत्यु की आकांक्षा कैसे होगी?
विस्तृत विवेचन के लिए क्रप्या नीचे लिंक पर क्लिक करें -
http://parmatmprakashbharill.blogspot.in/2015/11/blog-post_64.html
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जिसे जीवन का ही मोह न रहा उसे भला म्रत्यु से मोह कैसे होगा?
जिसे जीवन का ही मोह न रहा उसे भला म्रत्यु से मोह कैसे होगा? - परमात्म प्रकाश भारिल्ल  अरे! दुनिया के  सभी प्राणी तो हर कीमत पर जीवित रहना चाहते हें और मृत्यु से डरते हें ,  पर जिसे जीवन का ही मोह न रहा उसे भला म्रत्यु से मोह कैसे होगा ,  म्रत्यु की आकांक्षा...
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जन्म पाना, जीवित रहना और म्रत्यु हमारे हाथ में नहीं. हम मात्र व्यामोह करते हें व उस व्यामोह का त्याग हम कर सकते हें, बस उसी व्यामोह के भाव के अभाव का नाम ही सल्लेखना है.
- परमात्म प्रकाश भारिल्ल 
विस्तृत विवेचन के लिए क्रप्या नीचे लिंक पर क्लिक करें -
http://parmatmprakashbharill.blogspot.in/2015/11/blog-post_6.html
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यह अनागत को आमंत्रण नहीं, आगत का स्वागत है.
यह अनागत को आमंत्रण नहीं ,  आगत का स्वागत है. - परमात्म प्रकाश भारिल्ल  जन्म पाना ,  जीवित रहना और म्रत्यु हमारे हाथ में नहीं.  हम मात्र व्यामोह करते हें व उस व्यामोह का त्याग हम कर सकते हें ,  बस उसी व्यामोह के भाव के अभाव का नाम ही सल्लेखना है . यह सर्वोत...
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