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Manohar Chamoli
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मैं, बाल लेखन और वैज्ञानिक नज़रिया
मैं, बाल लेखन और वैज्ञानिक नज़रिया -मनोहर चमोली ‘मनु’ अपनी लेखन यात्रा को पीछे मुड़कर देखता हूं तो पाता हूँ कि एक दैनिक अखबार में मेरा एक पत्र काॅलम में पत्र छपा था जो डाक देर से मिलती है पर आधारित था। तब मैं कक्षा बारह का छात्र था। बस यहीं से मैंने लिखना आरं...

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Nandan child magzine feb 2017 manohar chamoli manu
'छोटी जो बड़ी वो' मनोहर चमोली ‘मनु’ रिनछिन के पेंसिल बाॅक्स में मिटनी, छिलनी और पेंसिल थी। रिनछिन ने दो और नई पेंसिल खरीदी। नई पेंसिलों को भी उसने बाॅक्स में रख दिया। एक नई पेंसिल बोली‘‘मैं लाली हूं। ये हरियन हैं। आज से हम भी इस बाॅक्स में रहेंगे।’’ मिटनी ...

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Folk and child literature लोक और बाल साहित्य manohar chamoli manu
लोक और बाल साहित्य  -मनोहर चमोली ‘मनु’ उत्तराखण्ड का बाल साहित्य भी कला, संस्कृति और परंपरा की तरह अनूठा है। बेजोड़ भी है। यह लिखित से अधिक मौखिक-वाचिक परंपरा में अधिक समृद्ध रहा है। तब, जब पढ़ने का रिवाज़ ही खतरे में बताया जा रहा है। तब, जब वर्तमान उत्तराखण्ड...

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Doon Literature Festival 2016 24-25 December 2016 साबित हुआ कि मरा नहीं है सब कुछ

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Doon Literature Festival 2016 24-25 December 2016
साबित हुआ कि मरा नहीं है सब कुछ  -मनोहर चमोली ‘मनु’  साल दो हजार सोलह का अंतिम सप्ताह ‘दून साहित्य महोत्सव’ के नाम से लंबे समय तक याद किया जाएगा। द्रोण नगरी में यह पहला ऐतिहासिक मौका था जब जनपक्षीय सरोकार के पक्षधर कलमकार दो दिन जुटे। साहित्यका, पत्रकार, छा...

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children litrature वाहवाही का बाल साहित्य -मनोहर चमोली ‘मनु’
वाहवाही का बाल साहित्य -मनोहर चमोली ‘मनु’ बाल साहित्यकार अपने वय वर्ग में अपने लिए कितने ही भक्त बना लें, आखिरकार उनका नाम लिवाने वाली रचना ही उनकी होगी। रचना ही बोलती है। लेकिन अपनी रचना तो सबको प्यारी लगती है। अपनी गाय के सींग सभी को सबसे पैने नज़र आते हैं...

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उड़ान अनोखी -मनोहर चमोली ‘मनु’ child literature
उड़ान अनोखी  मनोहर चमोली ‘मनु’ एक तितली रो रही थी। जुगनू ने पूछा तो वह कहने लगी‘‘मैं आसमान में उड़ना चाहती हूं। सुना है आसमान से धरती नारंगी जैसी दिखाई देती है।’’ जुगनू हँसने लगा। कहने लगा-‘‘उड़ती तो हो। अब और किस तरह उड़ना चाहती हो?’’  तितली ने सिसकते हुए कह...

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child literature बाल साहित्य बनाम बचकाना साहित्य
बाल साहित्य बनाम बचकाना साहित्य -मनोहर चमोली ‘मनु’ आज भी साहित्यकारों में अधिकतर वे हैं जो यह मानते हैं कि बच्चों को सच्चा सामाजिक बनाने वाला साहित्य ही उत्तम साहित्य कहा जा सकता है। जो उन्हें सद्मार्ग की ओर ले जाए, वही बाल साहित्य सार्थक है, श्रेष्ठ है। बत...

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बाल साहित्य बच्चों को समझना होगा child literature
समझ रहा है साहित्य बालमन को ! -मनोहर चमोली ‘मनु’ एक अध्यापक मित्र हैं। वे बरसों से कक्षा छह से बारह के छात्रों को पढ़ा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने फेसबुक में एक वक्तव्य दिया। वक्तव्य के साथ उस बालक को फोटों भी दी गई थी। यहां उस बालक का नाम और पहचान छिपाने क...
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