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Vivek VK Jain
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Vivek VK's posts

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हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच 1947 में हुआ बंटवारा आज भी जारी है
कई सालों से मैं बड़े फ़ख्र से ख़ुद को दक्षिण एशियाई मूल का बताती थी. लाखों लोगों की तरह मेरे मां-बाप भी उसी ज़मीन पर पैदा हुए थे, जिसे अब हिंदुस्तान के नाम से जाना जाता है. बंटवारे के वक़्त मेरे अब्बा का परिवार पाकिस्तान चला आया था. मेरे दादा सिविल सर्विस में ...

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मातृभाषा
विनोदकुमार शुक्ल की फटी कमीज़ जिससे बेतरतीब से निकले धागे झाँक रहे हैं जिसे कवितायेँ सिल नहीं पाई, वो मैं हूँ. प्रेमचंद के चेहरे का पोपलापन उनकी बीमारी की नुमाइश कहानियां जिसे कह नहीं पाई जो अस्सी बरस बाद भी गूगल-डूडल हो जाता है लेकिन रहता पोपला ही है, वो मै...

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This Is Why Our Generation Doesn’t Believe In Settling Down
We are a crazy generation.  We self-acknowledge that fact, the older generations call us crazy, and the younger generations might be trying to be an inch crazier. And maybe each new up and coming generation will think the same thing about themselves or even...

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इकबाल : वो आलातरीन शायर जिसने मुल्क ही नहीं, हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब के भी टुकड़े कर डाले
अल्लामा इकबाल के बारे में हिंदुस्तान में राय अलग-अलग हो सकती है. एक तबका यह कहता है कि वे अपने दौर के सबसे महान शायर थे और दूसरा यह कि हिंदुस्तान की तकसीम उन्हीं की देन है. हर एक की अपनी-अपनी कैफ़ियत है. सही या ग़लत कहने वाले हम कौन होते हैं? इकबाल के पूर्वज ...

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बिछोह
उन खतों को जिनमें मेरी खुशबू बसी है सिरहाने रख वो मेरी छुअन महसूस करती है. एक टैडी कत्थई सा, सीने से लगा माथे को चूमता हूँ जैसे उसकी मांग में भरा सिन्दूर होंठों से लगाया हो. शोक का एक गीत बज उठता है काली रात में मधुकामिनी के फूल खुशबुएँ बिखेरते रो देते हैं....

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बम कांड के बाद भगत सिंह ने अदालत से कहा…
हमारे ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसलिए यह आवश्यक है कि हम भी अपनी सफाई में कुछ शब्द कहें. हमारे कथित अपराध के संबंध में निम्नलिखित प्रश्न उठते हैं: (1) क्या वास्तव में असेंबली में बम फेंके गये थे, यदि हां तो क्यों? (2) नीचे की अदालत में हमारे ऊपर जो आरोप ल...

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फ़रोग फ़रोखज़ाद | Forough Farrokhzad
अभिवादन सूर्य का / फ़रोग फ़रोखज़ाद    एकबार फिर से मैं अभिवादन करती हूँ सूर्य का मेरे अंदर जो बह रही है नदी मेरी अंतहीन सोच के घुमड़ते मेघों का सिलसिला बाग में चिनार की अनगढ़ बढ़ी हुईं क्यारियाँ गर्मी के इस मौसम में भी सब मेरे साथ - साथ चल रहे हैं। खेतों मे...

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आओ मिलकर फेलियर फेस्टिवल मनायें, आत्महत्या न करें।
मेरे प्रिय हिन्दी माध्यम और अपने अपने विषयों में कमज़ोर छात्रों, मैं यह पत्र या लेख इसलिए नहीं लिख रहा हूं कि मैं इसकी योग्यता रखता हूं। बल्कि इसीलिए लिख रहा हूं क्योंकि ऐसे विषयों पर लिखने के लिए जिस योग्यता और अध्ययन की ज़रूरत होती है, वो मेरे पास नहीं है...

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आओ मिलकर फेलियर फेस्टिवल मनायें, आत्महत्या न करें।
मेरे प्रिय हिन्दी माध्यम और अपने अपने विषयों में कमज़ोर छात्रों, मैं यह पत्र या लेख इसलिए नहीं लिख रहा हूं कि मैं इसकी योग्यता रखता हूं। बल्कि इसीलिए लिख रहा हूं क्योंकि ऐसे विषयों पर लिखने के लिए जिस योग्यता और अध्ययन की ज़रूरत होती है, वो मेरे पास नहीं है...

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पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा | केदारनाथ अग्रवाल
इसी जन्म में , इस जीवन में , हमको तुमको मान मिलेगा. गीतों की खेती करने को , पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा. क्लेश जहाँ है , फूल खिलेगा , हमको तुमको ज्ञान मिलेगा. फूलों की खेती करने को , पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा. दीप बुझे हैं जिन आँखों के , उन आँखों को ज्ञान मिलेगा....
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