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स्वदेशी उपचार
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सत्यानाशी / Satyanashi  परिचय – सम्पूर्ण भारत के राज्यों में सत्यानाशी के पौधे बंजर भूमि, सड़क के किनारे या खुले क्षेत्रो में उगते है | इसे भटकटैया, भडभांड, घमोई आदि नामों से भी जाना जाता है | संस्कृत में इसे स्वर्णक्षीरी नाम से पुकारा जाता है | अधिकतर लोग…
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लोध्र (लोध) क्या है – यह एक आयुर्वेदिक औषध द्रव्य है जिसका उपयोग अनेक आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है | उत्तरी एवं पूर्वी भारत के राज्य जैसे आसाम, बंगाल एवं बिहार आदि में विशेषतया: पाया जाता है | दक्षिणी भारत में छोटा नागपुर एवं मालाबार तक इसके पेड़…
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अकरकरा – इस आयुर्वेदिक औषध द्रव्य से कम लोग ही परिचित है | आयुर्वेद के आर्ष संहिताओं में भी इस द्रव्यों का वर्णन उपलब्ध नहीं होता | इसका सर्वप्रथम वर्णन गद निग्रह एवं भाव प्रकाश में देखने को मिलता है , इसीलिए इसे अरब देश या अल्जीरिया जैसे देशों से आया…
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पुनर्नवाष्टक क्वाथ – आयुर्वेद चिकित्सा में क्वाथ औषधियों का उपयोग रोग के शमनार्थ पुरातन समय से ही किया जाता रहा है | क्वाथ रूप में औषधि का सेवन तीव्र स्वास्थ्य लाभ देता है, तभी क्वाथ आयुर्वेद की प्रशिद्ध औषधियां होती है | पुनर्नवाष्टक क्वाथ का उपयोग भी…
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अविपत्तिकर चूर्ण – हाइपर एसिडिटी एवं अजीर्ण रोग में आयुर्वेद पद्धति का सबसे विश्वनीय चूर्ण है | अधीक अम्लीय पदार्थो के सेवन एवं आहार में अम्लता की अधिकता के कारण शरीर में हाइपर एसिडिटी जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है | हाइपर एसिडिटी के कारण सीने में जलन,…
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रास्नासप्तक क्वाथ परिचय – यह एक आयुर्वेदिक प्रशिद्ध क्वाथ है जिसका उपयोग गंभीर आमवात की समस्या में किया जाता है | आयुर्वेद चिकित्सा में क्वाथ औषधियों का उपयोग प्राचीन समय से ही होता आया है | क्वाथ शरीर पर जल्दी असर दिखाते है एवं रोग का शमन भी जल्दी करने…
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सिंहनाद गुग्गुलु (Singhnad Guggulu) – आयुर्वेद की यह दवा वातदोषों के उपचारार्थ उपयोग में ली जाती है | इसका प्रयोग आमवात , वातरक्त, रुमाटाइड पेन एवं संधिशूल में किया जाता है | शरीर में आमवर्द्धि एवं वात की वर्द्धि होने से आमवात, गठिया एवं संधिशूल जैसे रोग…
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अर्जुन छाल का परिचय, औषधीय गुण एवं इसके सेवन से होने वाले फायदे परिचय – आयुर्वेद चिकित्सा में अर्जुन वृक्ष का उपयोग हृदय सम्बन्धी विकारों में किया जाता है | यह शीत वीर्य औषध द्रव्य होता है जो स्वाद में कैसैला होता है | अर्जुन के वृक्ष प्राय: सम्पूर्ण भारत…
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दालचीनी (Cinnamon in Hindi) – भारतीय रसोई में भोजन का स्वाद एवं रूचि बढ़ाने के लिए दालचीनी का उपयोग प्रमुखता से किया जाता है | लेकिन दालचीनी को एक मसाला ही मानना गलत होगा क्योंकि, आयुर्वेद चिकित्सा में पुराने समय से ही दालचीनी का उपयोग रोगों के चिकित्सार्थ…
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कुलथी क्या है – दक्षिण भारत में कुलथी का प्रयोग बहुतायत से किया जाता है | इसकी दाल बनाकर एवं अंकुरित करके अधिक प्रयोग में लेते है | आयुर्वेद में कुलथी को मूत्र विकार नाशक एवं अश्मरीहर माना जाता है | इसका पौधा तीन पतियों वाला होता है | जिसमे सितम्बर से…
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