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Liver Cirrhosis Treatment
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Curative Herbal Medicine For Chronic Liver Disseases i.e Chronic Liver Disease Like Liver cirrhosis ,Jaundice,Fatty Liver,Alcoholic cirrhosis,Hepatitis-ABC & E,HIV,AIDS, Liver Toxicity,Liver Cleansing etc etc.
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Read testimony of one of our patient of cirrhosis.....

Physical health improves.
Metabolic rate Enhances.
Anti-oxidant potential is seen to be higher.
Immune system boosts.
Fibroscan result proves that fibrosis/cirrhosis regress after the intake of savliv drops….!
And now , at present  she is on regular intake of savliv drops  &  no need to Recheck further. She is back to life and absolutely healthy now…! 


http://www.harshulayurpharma.com/appreciation/details/68
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गर्मियों का मौसम आगया है इसमें दूषित पानी मछरो के काटने और विभिन्न कारणों से विभिन्न तरह के बुखार अपना प्रकोप दिखाने लगते हैं. इन बुखारो को नियंत्रित करने के लिए सामान्यतः peracitamol और अन्य बुखार को नियंत्रण करने वाली औषधियां दी जाती हैं जिनका असर लीवर के ऊपर होता है और लीवर बीमार होने लगता है एक नया रोग जन्म लेता है जिसे पीलिया कहते हैं. इसमें आँखे पीली, शरीर का रंग पीला दिखाई देने लगता है यह आँखों एवं शरीर का पीला रंग खून के अन्दर रेड सेल के टूटने पर एक पदार्थ बनता है जिसको billirubin कहते हैं, खून में billirubin की मात्र बढ़ने से खून का रंग पीला होने लगता है खून के रंग के ही कारण हमारे शरीर गुलाबी रंग लिए हुए होता है वह रंग बदलकर पीला दिखाई देने लगता है. प्रायः लोग इस पीले रंग से डरने लगते हैं और पीली चीजों का सेवन बंद कर देते हैं जैसे ख़ास तौर से हल्दी को बंद कर दिया जाता है. भोजन की थाली से हल्दी का परहेज सबसे अधिक होता है. जबकि आयुर्वेदिक शास्त्र भावप्रकाश में हल्दी को यकृत विकार में उपयोगी लिखा है पता नहीं कहा से समाज में हल्दी के परहेज की गलत धारणा चल चुकी है जबकि हल्दी पीलिया रोग में भावप्रकाश के अनुसार एक औषधि का काम करती है.
पीलिया रोग (jaundice) में seerum billirubin जिसका मानक 1% तक नार्मल होता है से बढ़ने लगता है यह billirubin बढ़ता है तो लीवर में से अन्य toxic enzyme SGPT, SGOT, Alkaline Phosphate आदि भी बढ़ने लगते हैं. यदि serum billirubin का मानक 20% से ऊपर जाने लगता है तो जीवन खतरे में मानने लगते हैं इस स्थिति में रोगी के शरीर का रंग पीला आँखे अत्यधिक पीली किसी भी चीज़ का ना पचना हर समय जी का मचलना उलटिया होना और शरीर में खाज होना लक्षण दिखाई देने लगते हैं. इस स्थिती में लीवर या यकृत अत्यंत बीमार होता है , allopathic चिकित्सा के अनुसार माना जाता है कि शरीर को विश्राम देना ही मुख्य उपचार है क्यूंकि इस स्थिती में उपचार के लिए कोई allopathic औषधी भी नहीं है जबकि आयुर्वेद में यकृत विकार पर औषधियों का भण्डार है. आयुर्वेद के प्रणेता ऋषियों ने इस घातक बीमारी पर गहन अध्ययन किया होगा और आयुर्वेदिक शास्त्रों में वर्णित सेंकडो औषधियां आयुर्वेदिक ग्रंथो में उपलब्ध हैं और सफलता पूर्वक पीलिया (jaundice) या लीवर के कई अन्य बीमारियों में सफलतापूर्वक उपचार कर रही हैं जिनमे से एक हमारे द्वारा निर्मित SAVLIV DROP है जिसको इस प्रकार के रोगी को देने पर serum billirubin एवं अन्य toxic enzyme अविलम्ब नियंत्रण में आते हैं. रोगी को आरही समस्याओं जेसे जी मचलना, उलटी होना, और बदन की खुजली में अविलम्ब राहत पहुँचती है और रोगी स्वस्थता की ओर आने लगता है यदि लीवर खाली बढ़ा हो उसमे CIRRHOSIS ना हुई हो केवल अभी पीलिया रोग से ही पीड़ित हो तो पीलिया एक महीने के अंदर ठीक हो जाता है.
For Contact-
Head Office Address
Harshul Ayur Pharma
Contact Person: Vimal Kumar
Address: Bambagher , Ramnagar -244715 (Nanital) Uttrakhand, India
Phone: +91-251720
Mobile: +91-9837057416
email: harshulayurpharma@gmail.com, savlivdrops@gmail.com
Delhi Branch Address-
Mr. Sanjay Kaushik
Plot No.-86, PKT-5, Sec-24,
Rohini Delhi-85
Cont-+91-8826386662
Our Websites: www.harshulayurpharma.com, www.liverascites.com, www.cirrhosis.in
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आज के समय में मिलावट की समस्या आम हो चली है , बाज़ार में किसी भी शुद्ध खाद्य पदार्थ का उपलब्ध होना काफी मुश्किल है I इसके अतिरिक्त चारोंओर जंक फ़ूड ही जंक फ़ूड , रहने खाने के तरीके ही बदल गए हैं , थाली में फाइबर फ़ूड गायब हो चूका है I बाज़ार में उपलब्ध मिल का आटा बिल्कुल चोकर या फाइबर रहित है I इसी के कारण दिन प्रति दिन लीवर से सम्बंधित बीमारियों के रोगी बढ़ते ही जा रहे है I लीवर को रुग्ण करने में शराब अलकोहल, सिगरेट एवं औषधियों के दुस्प्रभाव भी कारक कम नहीं हैं I
यूँ तो प्रारंभ में जब लीवर की कोई बीमारी प्रारंभ होती है तो कोई विशेष परेशानी नहीं होती I मुख्यत प्रारम्भ में भूख ,गैस एसिडिटी , कब्ज आदि साधारण से लक्षण दिखायी देते हैं I जिन्हें हम अनदेखा करके ध्यान नहीं देते I इन साधारण समस्याओं के समय जब आप अपने लीवर के टेस्ट करवायेगे तो सब नार्मल होंगे लेकिन समस्या बनी रहेगी I जब लीवर कुछ अधिक बीमार होगा तो फिर लीवर फंक्शन टेस्ट में एंजाइम जैसे S.G.P.T, S.G.O.T,G.G.P.T, Alkaline phosphate, Serum Bilirubine आदि बढ़ने लगते हैं I
इस स्थिति में उचित निदान और उपचार के अभाव में रोग बढ़ने लगता है I अल्ट्रा साउंड करवाने पर लीवर का साइज़ बढ़ा हुआ आता है जिसको हेपेटाइटिस भी कहते हैं I धीरे धीरे लीवर के काम करने की क्षमता घटने लगती है और लीवर प्रोटीन का पाचन नहीं कर पाता तो एकदम वजन घटना प्रारम्भ हो जाता है जो कि प्रोटीन टेस्ट में दिखाई देता है I प्रोटीन इसका लेवल 7 नार्मल होता है , इसके दो अवयव होते हैं I 1. एलबुमिन 2. ग्लोब्लिन I लीवर की बिमारियों में एल्ब्यूमिन घटने लगता है और ग्लोब्लिन बढ़ने लगता है I जो लीवर बढ़ा हुआ आता था अब कोर्स्र इकोटेचर, इरेगुलर सरफेस या सिकुढ़ा हुआ आने लगता है i यह लीवर की भयानक बीमारीका रूप ले लेता है और मरीज के पेट में पानी भरने लगता है , डॉक्टर मरीज की आयु की घोषणा करने लगते हैं कि अब तुम्हारी आयु इतने .....सीमित समय की शेष है i इलाज केवल लीवर ट्रांसप्लांट ही बचा हैI
उपचार में मरीज को रेस्ट देना और परहेज करवाना हॉस्पिटल में एडमिट मुख्य उद्देश्य होता है i मरीज को यह लगता रहे कि मेरा उपचार बहुत अच्छे तरीके से हो रहा है , प्रतिदिन टेस्ट करवाये जाते हैं और उसकी जेब पर डांका डाला जाता है I यदि पेट में पानी बढ़ जाता है वह सुई लगाकर निकाल दिया जाता है , जिससे मरीज के पेट में कुछ तनाव काम होकर आराम मिलता है I
SAVLIV drops उपरोक्त सभी परिस्थितियों में काम करती है I
1. यह पेशाब को बढ़ाकर पेट में भरे हुए पानी को कम करने लगती है I
2. नए पानी को बनने से रोकती है
3. सीरम बिलिरुबिन के लेवल को कम करती है I
4. एल्ब्यूमिन लेवल को बिना बाहर से चढ़ाये धीरे धीरे बढ़ाती है I
5. ग्लुब्लिन लेवल को सही कर ए जी रेश्यो को बढ़ाती है I
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एक प्रश्न मुझे हमेशा उद्वेलित करता रहता कि हमारा लीवर एवं किडनी जैसे महत्त्व पूर्ण अंग अधिक आवश्यक हैं अथवा शुगर लेवल का मेंटेन रहना ? अधिकतम शुगर कंट्रोल करने वाली औषधियों का दुष्प्रभाव लीवर और किडनी पर होता है I जिसके कारण अधिकतर देखा गया है कि Serum ceatinin लेवल बढ़ने लगता है और किडनी बीमार होनी प्रारम्भ हो जाती है I daibetese बीमारी में विकट समस्या उस समय आ जाती है जब शुगर लेवल तो नार्मल होता है लेकिन घाव ठीक नहीं होते , इस स्थिति में शारीर की प्रतिरोधक क्षमता नगण्य हो जाती है और किसी भी प्रकार के एंटी-बोयोतिक असर नहीं करते हैं तो केवल अंग भंग करने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं रहता I इस परिस्थिति में savliv drops एंटी –ओक्सिडेंट का प्रमुख श्रोत कारण शारीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर घाव ठीक करने में सहयोग करती है I यदि इसके साथ बेल पत्र , तुलसी , काली मिर्च 4 , 2 , 1 भाग के अनुसार पीस कर गोली बनाकर देने से निश्चित ही लाभ मिलता है और अंग भंग की समस्या टाली जा सकती है I
https://harshulayurpharmacom.wordpress.com/…/23/savliv-drops
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माननीय अभिताभ बच्चन शतायु हों I अक्सर सुनने में आता है कि अभिताभ जी का लीवर केवल पच्चीस प्रतिशत कार्य कर रहा हैI आप उनकी सक्रियता देखते हैं ही, उनको भी लीवर सिरोसिस है , ऐसा सुनने में आता है I जब कोई मरीज जो कि सिरोसिस से पीढ़ित है और उसे asitis के लक्षण यानि कि पेट में पानी भरने लगता है तो विद्वान चिकित्सक उसको उसकी आयु बताने लगते हैं कि अब आपकी केवल तीन मास ,या छः मास या एक साल आयु शेष है I ऐसे मरीज जब मुझसे बात करते हैं तो मैं उनसे मजाक में पूछता हूँ कि आपने क्या उन चिकित्सक महोदय से पूछा कि आपकी कितनी आयु शेष है I मरीज मुस्कराने लगता है
हानि लाभ , जीवन मरण , यश अपयश विधि हाथ ऐसा रामचरित मानस में संत श्री तुलसी दास जी ने कहा है
मृत्यु तो कटु सत्य है जिसने तो होना ही है , लेकिन कोई किसी की मृत्यु की भविष्यवाणी नहीं कर सकता I पिछले दिनों मैं जब मुंबई गया तो मेरे एक मरीज के पुत्र श्री सतीश खरप ने कहा मैं आपको इसलिए सम्मान देता हूँ ,क्योंकि आपके कारण मैं अपनी माता जी के साथ सात वर्ष अधिक रह पाया और आगे बताया कि जिस समय savlivdrop मुझे प्राप्त हुई थी उस समय डॉक्टर ने केवल आधे घंटे की उनकी आयु बतायी थी I
इसी प्रकार की घटना तब घटी जब मैं अपने पुत्र से मिलने के लिए देहरादून गया I क्योंकि मैं राष्ट्रीयस्वयं सेवक संघ का स्वयमसेवक हूँ इसलिए देहरादून आने पर राष्ट्रीयस्वयं सेवक संघ के प्रांतीय कार्यालय पर अवश्य जाता हूँ I मैंने वहाँ पर परम पूजनीय डा o नित्यानंद जी को गुरु रामरॉय मेडिकल कोलेज से वापिस कर कह दिया था कि अब इनकी स्रेवा कार्यालय पर ही कर लें I डा o नियानंद जी मेरे मार्ग द्रष्टा रहे थे I उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी Iउनके हाथ पैरों में सुजन कहना तो उचित न होगा बल्कि पानी भरा हुआ था I सब कुछ कार्य पलंग पर ही हो रहा था I उनको तकियों का सहारा देकर बैठा रखा था और एक स्वयंसेवक उन्हें दलिया खिला रहा था I जब स्वयं सेवक दलिया खिलाकर कमरे से बाहर आये तो मैंने उन्हें SAVLIV DROPS दी और डा o साहब को प्रतिदिन देने का आग्रह किया I और मैं वापिस गया I
मैं पुन : तीन पश्चात् गया तो पालथी मार कर बैठे हुए डॉoसाहब बैठे अपने हाथ से दलिया खा रहे थे उस समय डाoसाहब की आयु लगभग 92 वर्ष की थी i इस घटना के पश्चात् डॉo साहब ने लगभग दो वर्ष का जीवन चलते फिरते व्यतीत किया और इसके पश्चात् दो माह पूर्व वे हम सब से विदा लेकर वह कर्म योगी इस संसार से विदा हो गया I इसी कारण से मेरा कहना है कि कोई किसी की आयु नहीं बता सकता चाहे वह डॉक्टर हो या ज्योतिष I
www.harshulayurpharma.com
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हर्षुल आयुर फार्मा ने दिसम्बर 2007 में अपनी वेबसाइट www.harshulayurpharma.com प्रसारित की जिसको देखकर डॉ. सरवन बाबू चिदंबरम प्रभावित हुए और उन्होंने सन 2009 में ईमेल के माध्यम से savliv drops पर कार्य करने की इच्छा प्रकट की. उनका मेल मिलने के पश्चात मै विमल कुमार और मेरे पुत्र शिवम् अगरवाल चेन्नई जाकर डॉ. सरवन बाबू से मिले और savliv drops पर अनुसंधान कार्य करने के लिए सहमति हुई और डॉ. सरवन बाबू ने एक प्रोजेक्ट बनाकर सरकारी सहायता के लिए Department of Science & Technology भारत सरकार दिल्ली के समक्ष प्रस्तुत किया. जिसको विमल कुमार की चिकित्सीय योग्यता की कोई डिग्री ना होने के कारण Department of Science & Technology की कमिटी ने अस्वीकृत कर दिया जिसको अगली मीटिंग के लिए डॉ. सरवन बाबू ने जो की डिपार्टमेंट टॉक्सिकोलॉजी, रामचंद्र यूनिवर्सिटी के हेड हैं ने कमिटी के समक्ष पुनः प्रोजेक्ट दिया जिसको कमिटी ने पुनः अस्वीकृत कर दिया.
अब सारी आशा धूमल हो गई थी क्यूंकि अनुसंधान पर आने वाला खर्चा हर्षुल आयुर फार्मा अकेले वेहन करने में असमर्थ था और सरकारी सहायता के लिए प्रोजेक्ट स्वीकृत नहीं हो रहा था इसी मध्य एक घटना घटी कि एक पेट (कुत्ते का पिल्ला) संस्थान में कार्यरत डॉ. सरवन बाबू के सहयोगी वेटनरी चिकित्सक एवं अनुसन्धान कर्ता के पास अत्यंत गंभीर हालत में हेपेटिक कोमा की स्थिति में आया. डॉ. वेंकटेश के पास savliv drops का सैंपल रखा था तो उन्होंने उसी सैंपल में से एक खुराक उस पिल्लै को दे दी और उनके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा जब वह पिल्ला 15 मिनट बाद कोमा से बाहर आगया और तीन माह तक उसका इलाज किया तो वह पूर्णतयः स्वस्थ हो गया उक्त घटना को Department of Science & Technology के साइंटिस्ट जी. डॉ. समाथानम को अवगत कराई तो वह प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके.
अगली मीटिंग के लिए मुझे साक्षात्कार के लिए तेजपुर यूनिवर्सिटी में बुलाया गया जहां पर Department of Science & Technology की सहायता स्वीकृत करने वाली कमिटी के समक्ष मै प्रस्तुत हुआ और कमिटी मेरे लीवर से सम्बंधित साधारण ज्ञान देखकर काफी प्रभावित हुई और इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी. 19 जुलाई 2012 को इस प्रोजेक्ट पर कार्य प्रारंभ हुआ और 11 फरवरी 2016 को यह प्रोजेक्ट सम्पूर्ण होने पर DST की मीटिंग में संतोष ज़ाहिर किया गया और कार्यवाही में ख़ुशी ज़ाहिर की गई कि savliv drops का कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है.
मीटिंग में savliv drops से सम्बंधित मिनट नीचे दिए गए हैं.
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For Purchase SAVLIV DROPS in Kashipur
Contact-
KAKKAD MEDICAL STORE
MAIN CHAURAHA
KASHIPUR
CONT-091-9759002011
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For Purchase SAVLIV DROPS in Haldwani
Contact-
EASH MEDICAL STORE
Near Sanjeevni Hospital,
Nababi Road,
Haldwani
Mb-+91-9719203001
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For Purchase SAVLIV DROPS in KARNATAKA BELGAM
CONTACT-
JIRALI AYURVEDIC STORE,
P.B ROAD
NEAR MARUTI TEMPLE
SAKHARWADI
NIPPANI-591237
DIST- BELGAM
KARNATAKA
CONT-07760163716
09449200116
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