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Virendra Kumar Sharma
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चीन की बांसुरी बजाने ही गए थे ये वहां
भारतीय सौभाग्य के लिए राहू (राहुल नहीं शनिचर की तरह वक्र चलने वाला राहु )अपनी वक्र चाल से चीनी दूतावास जा पहुंचा, पूछने के- उनके लिए क्या प्रोग्राम है। जबकि ये ज़नाब न देश की  सीमाओं के बारे में कुछ जानते हैं न भारत की  भू-भौतिक ,भू -भौगोलिक पारस्थितियों के ...

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वातायन बोले तो झरोखा आसपास
वातायन बोले तो झरोखा आसपास  ट्रम्प -मोदी की पांचवीं मुलाक़ात कुछ लोगों को पचाये नहीं पच रही है।  कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला कहतें हैं -मेरे दादा ने भी देसी घी खाया था -मेरी हथेली सूंघ के  देख लो। मनमोहन सिंह जी ने भी कितनों को आतंकी घोषित करवाया ...

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आत्मा के अस्तित्व को नकारना स्वयं अपने 'होने' अपने 'रीअल -सेल्फ' सच्चिआनंद स्वरूप को नकारना है। जैसे स्वर्ण और स्वर्णाभूषणों में कोई फर्क नहीं है दोनों स्वर्ण ही हैं ऐसे ही आत्मा स्वर्ण का एक कण है परमात्मा स्वर्ण है। परमात्मा सूर्य है तो आत्मा उसकी एक किरण है।
https://www.facebook.com/virendra.sharma.5496/posts/1711368918878011 Virendra Sharma June 19 at 10:59pm  ·  क्या आत्मा महज़ एक विचार है .आत्मा का कोई अस्तित्व नहीं है ?शरीर के साथ सब कुछ चुक जाता है ?पुनर -जन्म की अवधारणा भ्रामक है ? आज एक ब्लॉग पोस्ट पढ़ी ...

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क्या आत्मा महज़ एक विचार है .आत्मा का कोई अस्तित्व नहीं है ?
क्या आत्मा महज़ एक विचार है .आत्मा का कोई अस्तित्व नहीं है ?शरीर के साथ सब कुछ चुक जाता है ?पुनर -जन्म की अवधारणा भ्रामक है ? आज एक ब्लॉग पोस्ट पढ़ी उसका लब्बोलुआब यही था कि आत्मा एक विचार मात्र है और शरीर के क्षीण होने पर अंतिम संस्कार के वक्त हवा ,पानी ,अ...

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याद दिलाना ज़रूरी है ऐसी ही बातें घि-घियाके मनीष तिवारी जनरल वी के सिंह के बारे में कह चुके हैं
http://www.firstpost.com/india/congress-leader-sandeep-dikshit-calls-bipin-rawat-sadak-ka-goonda-bjp-demands-apology-from-sonia-gandhi-3543103.html भारतीय शौर्य के प्रतीक सेना -प्रमुखों के बारे में कांग्रेस के स्वनाम -धन्य -ताड़का चाची (सोनिया )पूजकों द्वारा...

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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं। उर्वारुकमिव बंधनां मृत्योर्मुक्षीय माम्रतात ||
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं  पुष्टिवर्धनं।  उर्वारुकमिव बंधनां मृत्योर्मुक्षीय   माम्रतात ||  यह महामृत्युंजय मंत्र ऋगवेद से उत्पन्न है। इसके उच्चारण मात्र से मृत्यु का भय  हर जाता है। मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी यह मंत्र सरल कर देता है। महामृत्युंजय के मन्...

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स्वयं ब्रह्मा की भी अपनी एक आयु है टेन्योर है फिर ब्रह्मज्ञानियों की कौन कहे ? पुनरपि जनमम् पुनरपि मरणम ,पुनरपि जननी जठरे शयनम
     ज्ञान तिहारो आधो अधूरो मानो या मत मानो ,      प्रेम में का  आनंद रे उधौ ,प्रेम करो तो जानो।        प्रेम की भाषा न्यारी है ,            ये ढ़ाई अक्षर प्रेम एक सातन पे भारी है।       कहत नहीं आवै सब्दन में ,      जैसे गूंगो गुड़ खाय स्वाद पावै मन ही मन मे...

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मुसाफिर तो मुसाफिर है ,उसका घर नहीं होता ,.....
ग़ज़ल :मुसाफिर . मुसाफिर तो मुसाफिर है ,उसका घर नहीं होता , यूं सारे घर उसी के हैं ,वह बे -घर नहीं होता , ये दुनिया खुद मुसाफिर है ,सफर कोई घर नहीं होता , सफर तो आना जाना है ,सफर कमतर नहीं होता । मुसाफिर अपनी मस्ती में ,किसी से कम नहीं होता , गिला उसको नहीं...

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अनुक्त जानाति अपि पंडिता
अनुक्त जानाति अपि पंडिता  अर्थात जो कहा नहीं गया है उसे भी जाना जा सकता है ,मसलन हमारे शरीर में आकाश तत्व का( स्पेस का )भाग शेष चार अन्य से बड़ा है। हमारे अंदर बाहर दोनों जगह मौजूद है महाराणा प्रताप का रणकौशल ,शिवाजी की वीरता और शत्रु के हाथ न आने वाली महारत...
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