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surya prakash
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…तो यूं मैं काफिर से मुसलमान हो गया!
सुबह के करीब 4 बजे थे, मैं नाइट शिफ्ट में ऑफिस में था। इस बीच एक  न्यूज वेबसाइट पर मैं गया तो मुख्य खबर से ठीक नीचे एक विज्ञापन देखा, जो इस बात का प्रचार था कि आप कैसे मुसलमान बन सकते हैं और इसके क्या फायदे हैं। उत्सुकता में मैंने इस पर (IslamReligion.com) ...

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गांधी हत्या: पटेल ने दी थी संघ को क्लीन चिट
आरएसएस के लोगों पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगाने, मुकरने और फिर मानहानि केस में डटने का फैसला लेकर राहुल गांधी ने बहुत समझदारी का परिचय नहीं दिया है। एक कुशल राजनेता के लक्षण यह होते हैं कि पहले तो वह बोलता ही तौल कर है और गलती से कुछ गड़बड़ हो जाए त...

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गिलगित-बाल्टिस्तान: पाकिस्तानी उत्पीड़न का स्थान
जम्मू-कश्मीर में भारत सरकार और सेना की भूमिका के मद्देनजर स्थानीय लोगों के मानवाधिकारों की अक्सर बात की जाती रही है। एक तबका तो ऐसा है, जो जम्मू-कश्मीर की तथाकथित आजादी के नाम पर अलगाववादियों को भी बौद्धिक समर्थन देता रहा है। लेकिन, हर सिक्के के दो पहलू होत...

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ऐसे पत्रकारों को तो लोग ‘दलाल’ ही कहेंगे!
पत्रकार की भूमिका क्या है? एक पत्रकार के नाते इस सवाल का जवाब मुझे हमेशा यही मिला है कि जहां भी आप हो, वहां से हर मसले को निरपेक्ष दृष्टि से देखना। लेकिन, जब कोई पत्रकार किसी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता अधिक हो जाए और उसका अपने पेशे से सरोकार सिर्फ अपनी विचार...

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माया जी! यह बुद्ध का संदेश तो नहीं है...
घृणा, घृणा करने से कम नहीं होती, बल्कि प्रेम से घटती है, यही शाश्वत नियम है। यह कहना था भगवान बुद्ध का। बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह की ओर से मायावती की तुलना ‘वेश्या’ से किए जाने के बाद उबले बीएसपी के ज्यादातर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जिस तरह की प्रतिक्रिया द...

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यहीं खत्म होना था बुरहान का सफर
मौत। हर इंसान का अंत एक दिन इसके साथ ही होता है, लेकिन जीवन भर उसके कामों के हिसाब से ही मौत के बाद उसे जाना जाता है। कई बार तो उसके कामों के आधार पर ही तय होता है कि उसे कौन सी मौत मिलेगी। तो हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी को जो मौत मिली, वह उसके क...

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बाबासाहेब आंबेडकर ने हिंदू समाज की जाति-व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह एक ऐसी बहुमंजिला इमारत की तरह है, जिसमें कोई सीढ़ी नहीं है। उनका कहना था कि यह व्यवस्था ऐसी है, जिसमें ऊपर का व्यक्ति नीचे नहीं आ सकता और नीचे का व्यक्ति ऊपर नहीं आ सकता, उन्ह...

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आखिर हम खोया जम्मू-कश्मीर कब लेंगे?
जेएनयू में पिछले दिनों कुछ छात्रों ने जब कश्मीर की कथित आजादी को लेकर नारेबाजी की तो एक बार फिर समूचे देशवासियों का ध्यान राष्ट्र के इस महत्वपूर्ण हिस्से की ओर गया। आमतौर पर जम्मू-कश्मीर की चर्चा दिल्ली या अन्य हिस्सों में तभी होती है, जब कोई विवाद होता है ...
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