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Anuj Gujjar
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ये तो उम्र का तकाजा है
ये तो उम्र का तकाजा है जो अब सर्दी जुकाम रहता है, वर्ना फरवरी के महीने में हमें इश्क हुआ करता था...!!
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कभी हो मुखातिब तो कहूँ क्या मर्ज़ है मेरा,
कभी हो मुखातिब तो कहूँ क्या मर्ज़ है मेरा, अब तुम ख़त में पूछोगे तो खैरियत ही कहेंगे...
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रस्सी जैसी जिंदगी...तने-तने हालात
रस्सी जैसी जिंदगी...तने-तने हालात..... एक सिरे पे ख़्वाहिशें...दूजे पे औकात....!
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भीगी हुई इक शाम की दहलीज़ पे बैठे
भीगी हुई इक शाम की दहलीज़ पे बैठे हम दिल के सुलगने का सबब सोच रहे हैं
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तज़ुर्बा कहता है मोहब्बत से किनारा कर लूँ
तज़ुर्बा कहता है मोहब्बत से किनारा कर लूँ और दिल कहता है ये तज़ुर्बा दोबारा कर लूँ
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आए तो यूँ कि जैसे
आए   तो   यूँ   कि   जैसे   हमेशा   थे   मेहरबान भूले   तो   यूँ   कि   गोया   कभी   आश्ना   न   थे
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हम भी चोट खाए है
एक मुख्त्शर* इश्क में हम भी चोट खाए है राह-ए-मोहब्बत में हम भी किसी के आजमायें हुए है चोट खाकर कई जख्मो को सहे है हम कहते जिसे बेवफाई ,उन घावों को हम भी सहलायें हुए है सीने  में दर्द को सहकर इस कदर बे-दर्द हुए है हम वक़्त को मरहम बनाकर उन ज़ख्मों को हम भी छुप...
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दाग दुनिया ने दिए जख़्म ज़माने से मिले / 'कैफ़' भोपाली
दाग दुनिया ने दिए जख़्म ज़माने से मिले हम को तोहफे ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे वो फलाने से फलाने से फलाने से मिले ख़ुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले माँ की आगोश में कल मौत की ...
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कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा 'कैफ़' भोपाली
कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा मेरा दरवाजा हवाओं ने हिलाया होगा दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क कोई ख़त ले के पड़ौसी के घर आया होगा इस गुलिस्ताँ की यही रीत है ऐ शाख़-ए-गुल तू ने जिस फूल को पाला वो पराया होगा दिल की किस्मत ही में लिक्खा था अँधेरा शायद ...
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कहीं से कुछ भी
वक़्त रहते संभाल लो मुझे कहीं तुम मुझे खो दो और तुम्हे खबर भी न हो ! ****** मेरे पीठ पे जो जख्म हे वो दोस्तो कि निशानी हे…, वरना सिना तो आज भि दुश्मनो के इंतज़ार  मे बेठा हे….! ****** अपने शब्दों में ताकत डालें आवाज में नहीं बारिश से फूल उगते हैं, तूफ़ान स...
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