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Om Prakash Yadav
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कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है ।
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हाँ, तुम्हे देखा है हमने !!!
महकती रात के आंचल से पिघलती चांदनी  जब जर्रे जर्रे में समा कर सिमटने लगी हो  दूर कहीं बादलों, नदियों, पहाड़ों के पीछे सुनहला सूरज जब अगड़ाईंयां लेने लगा हो  पहर जब महताब की मखमली चांदनी  आफ़ताब की किरणों से मिलने लगी हो  वो नूर भोर का कभी देखा है किसी ने... हा...
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अधूरा इश्क !!!
अधूरे इश्क के बाद बचा उजाड़ जिस्म दर्द, उदासी और तन्हाई की पैरहन पहने अब ख़ामोश रहने लगा है, बहुत खामोश जैसे बसंत आने का ख्वाब आंखों में लिए  कोई पेड़ अपनी आखिरी सांस तक  जिस्म पर दो-तीन सूखी पत्तियां पहने  चुपचाप खड़ा रहता है इक उम्मीद में...  लेकिन बसंत आने म...
अधूरा इश्क !!!
अधूरा इश्क !!!
poemsonnature.blogspot.com
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हाँ, लौटना कठिन होता है !!!
दिन ,माह, बरस बीत गए  तुम लौट कर नहीं आये  हाँ, लौटना कठिन होता है ! कितने दिनों से उदास चांदनी खिड़की से अंदर झांकती है  तुम्हे खोजती है, नहीं पाती है  चुपचाप लौट जाती है  हाँ, लौटना कठिन होता है !! कुछ ख्वाब दिल में उतरते हैं हर शाम बस यूँ ही अकस्मात् तुम्...
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बेइंतहा मोहब्बत कीजिए !!!
मोहब्बत कीजिए ! बेइंतहा मोहब्बत कीजिए ! खुले आसमान में उड़ते उन्मुक्त पंछियों की तरह आजाद मोहब्बत कीजिए ! साहिल से बार बार टकराती लहरों की तरह जोरदार मोहब्बत कीजिए ! खिड़कियों को सहलाती, उनकी पीठ थपथपाती नर्म हवा की तरह पवित्र मोहब्बत कीजिए ! सुर्ख पत्तों को ...
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पुरसुकून सांस लेता है सांस छोड़ने वाला !!!
फरिस्ता है इश्क में खुद को मिटाने वाला  अक्सर हँसता है आसुंओं में नहाने वाला ! मैं कब से मुड़ मुड़ के तनहा राहे देखता हूँ लौट कर कब आता है छोड़कर जाने वाला ! पल भर में ही वो नजरों से गायब हो गया   सितारा जिसे था मैं प्यार से चूमने वाला ! हमेशा जान हथेली पर लेक...
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कुछ रिश्ते साथ छोड़ देते हैं !!!
मुश्किलें बहुत बढ़ जाती हैं वक़्त बेहद नाजुक हो जाता है  जिम्मेदारियां थक जाती हैं आहों भरी सदायें निकलती हैं  नम आँखें भी बंजर हो जाती हैं  रातें दर्द से फफक कर रो पड़ती हैं  पल दर्द की पनाहों में जा बैठता है  खिड़कियां, दरवाजे, राहें खो जाती हैं  दो रूहों की ...
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मोहब्बत की खुशबू !!!
ये जो तुम इधर उधर पलट मुझे देखते हो  किसी किताब के कवर पेज की तरह और कैद कर देते हो किसी अलमारी में न जाने क्या सोच समझ कर, बिना पढ़े जैसे कोई नीरस, बेकार कचरे का ढेर   मगर जो हो फुरसत तो निकालना मुझे बंद अलमारी से और रखना अपनी हथेली पर  और खोलना मुझे वर्क द...
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तुम जो छोड़ जाओगी घर को..!!!
न चूड़ियों की खनखन होगी न पायलों की छनछन होगी  तुम जो छोड़ जाओगी घर को  न बालियों की चमचम होगी ! दरवाजा चरमराकर रह जायेगा  दरो-दीवारों की रंगत उतर जायेगी रात चाँद खिड़की पर क्यों आएगा  रात भर घर में रौशनी न होगी  न सहर में फूलों पर शबनम होगी !        तुम जो छो...
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आओ कभी यूँ ही, अचानक !!!
आओ कभी यूँ ही, अचानक न कोई फ़ोन , न कोई मैसेज न कोई बहाना, न कोई कहासुनी,  बस यूँ ही ,कभी अचानक  जैसे टूट पड़ता है कोई सितारा यूँ ही अचानक, किसी रात !  वही पीली साड़ी, हाथ 2 कंगन, माथे पर छोटी सी कत्थई बिंदी  न साजो-सामान से लिपा चेहरा न ही सृंगार से लदा तुम्ह...
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तुम जो बसी हो मुझे, सम्पूर्ण !!!
हाँ, मैं नही समझ पाता तुम्हे तुम्हारे जेहन में उठते
ख्यालों को जो शाख से लगे किसी पत्ते
की तरह कभी इस ओर तो कभी उस ओर लुढ़क
जाते हैं.... हाँ मेरी आँखें नही पढ़ पाती
हैं तुम्हारे चेहरे पर लिखे
भावों को जो हर पल बदल जाते हैं..... हाँ नहीं समझ पाता हूँ मैं तुम्ह...
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