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Rahul Hemraj
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काम का दबाव, कितना सही?
फेसबुक पर मित्र ने एक वीडियो शेयर किया था। एक युवा मोटिवेशनल गुरु बड़े ही आकर्षक तरीके से बता रहे थे कि 'प्रेशर' यानि काम का दबाव कोई नकारात्मक शब्द नहीं है जैसी की आम धारणा है। ये तो इस बात का प्रूफ है कि हमारे पास इतना काम है कि हम उसे  कैसे करें  और   पह...
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एक रास्ता यह भी
दोस्तों के बीच उस दिन चर्चा का विषय था कि हमें किसी की राय से कोई फर्क पड़ना भी चाहिए या नहीं? हमें किसी की सुननी भी चाहिए या जो हमने सोचा है उसी पर चलते चला जाना चाहिए? शीर्षक दिया था हमने, "ओपिनियन मैटर्स?" एक ने कहा कि किसी की क्या राय है इससे मुझे फर्क ...
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अपना साज अपनी राग
करीब दस दिन पहले की बात है अचानक से वो किताब मुझसे टकरा गयी। सोचा नहीं था पर इन्तजार तब से था जब से मैंने उसके लेखक विश्व-प्रसिद्ध जीव वैज्ञानिक ब्रूस लिप्टन का इंटरव्यू पढ़ा था। वे विस्तार से खुलासा कर रहे थे कि हमारा जीवन, तौर-तरीका, आदतें हमारी आनुवांशिक...
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मैं ही मेरा दोस्त
आज बात एक दुविधा की, लेकिन उससे पहले उसके बैकग्राउण्ड की। बैकग्राउण्ड ये कि जैसे शरीर की अपनी जरूरतें हैं वैसे ही मन की भी अपनी जरूरतें हैं। उसके बिना वो नहीं रह सकता। और ऐसे देखें तो स्वीकार किया जाना शायद व्यक्ति की पहली मानसिक जरुरत है। स्वीकार किया जाना...
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एक मोहब्बत भरा दिल
एक ताजमहल और बनने को है, और इस बार इसे बनाने वाले हैं 81 वर्षीय रिटायर्ड पोस्टमास्टर साहब श्री  फैजुल हसन कादरी। चौंक गए ना आप, पर ऐसा ही है। संयोग तो नहीं होगा कि उनकी महरूम बेगम का नाम भी  ताजमुली ही था। खुदा को शायद मालूम रहा होगा कि ये मोहब्बत किसी दिन ...
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मैं खुश रहूँगा
'अरे! आप', उसने कहा था। हम दोनों अक्सर किताबों पर होने वाली हमारी मासिक गोष्ठी में मिला करते थे। कुछ देर इधर-उधर की बातें हुईं और फिर किताबों पर आकर ही ठहर गई। हम कोई साज बजा लें आखिर राग अपना ही अलापने लगते हैं। लेकिन इस बातचीत का एक तीसरा पक्ष भी था। उसके...
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आस्था का विज्ञान
कई वर्षों बाद अपने एक पुराने मित्र से मिलना हुआ। वे अपनी माता जी से अगाध प्रेम करते हैं, ये बात मैं शुरू से जानता था। उनकी माता जी को अपने अन्तिम वर्षों में लकवा मार गया था। उन वर्षों में मेरे मित्र ने उनकी उतने ही लगन से सेवा की जितने जतन से उन्होंने कभी उ...
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बच्चों की सीख
और उसने कहा, "यदि मैं थोड़ा बहुत भी असंतुष्ट नहीं होऊँगा तो कुछ भी पाने की कोशिश ही नहीं करूँगा? मैं अपने जीवन में प्रगति करता चला जाऊँ इसके लिए जरुरी है कि मेरे मन में थोड़ी-बहुत ही सही, असंतुष्टि बनी रहे।" ये पहला मौका नहीं था जब मुझे ऐसा कुछ सुनने को मिल...
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कैसे थमे ये सिलसिला?
फिर एक बाबा के कारनामे सामने आए हैं। पहले वो, फिर उनके और अब ये, सिलसिला थमता ही नहीं। कितने लोग ठगे जाते हैं, कितनी जिन्दगियाँ बरबाद होती हैं? लाखों लोग अपने जीवन का आधार उनके प्रति अपनी श्रद्धा को बना लेते हैं। ये श्रद्धाएँ जब टूटती हैं तो इन लोगों के साथ...
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आत्मा बची रही
"यदि ऐसा ही होना है तो होने दो।", यही कहा था शालिनी ने उस मनोचिकित्सक को जो न जाने क्या-क्या सोच कर कैसी-कैसी तैयारी करके आया था। उसे शालिनी को खबर देनी थी कि हो सकता है उसे अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गवाँ देने पड़े।  ऐसा क्या हुआ था?, कुछ खास नहीं। ये बात...
आत्मा बची रही
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rahulhemraj.blogspot.com
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