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Smita Singh
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मैं नारी हूँ
मेरा मैं खुद ही परिचय हूँ दुनिया जिसकी आभारी है मैं सर्वश्रेष्ठ कृति ईश्वर की, प्रकृति जिस पर
बलिहारी है मैं पुरुष की मां के रूप में हूँ, बेटी या बहन स्वरूपा
हूँ मैं ही काली मैं ही चंडी, मैं सौम्य रूप में दुर्गा
हूँ मैं त्याग की मूरत भी हूँ जो, दुनिया को रक...
मैं नारी हूँ
मैं नारी हूँ
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'जब किसी के पहलू में होगे तो मेरी याद आएगी'
वो मोहब्बतों के पल और वो फिक्र भरी शामें तुम दूर हो गए तो क्या वो याद नहीं आएंगी! जब तुमसे कोई जिद करेगा, जब कोई तुम पे मरेगा हसरत भरी निगाहों से तेरी तरफ देखेगा याद करना न चाहो भले पर याद मेरी आएगी जब शाम ढलेगी और चाय बनेगी कोई प्यार से कॉफ़ी का मग हाथों मे...
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मेरा वादा है... हम फिर मिलेंगे
लगता है जैसे एक साथ विश्व के सारे शब्द शून्य हो गए हों...  जहां ह्रदय की उम्मीदें गुणा होकर शून्य हुई जा रही हैं  सूरज की मद्धम होती किरणें अगली सुबह तक प्रतीक्षा करेंगी  स्मृतियों के धागे बिछोह की आग में जलकर ख़ाक होने को सज्ज हैं  क्यों हुई थी वो तत्परता, ...
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बारिश तो उस बरस भी हुई थी
बारिश तो उस बरस भी हुई थी,  जब मेरे हाथों में तूने अंजलि भर-भर कर पानी डाला था,  बारिश आज भी हुई है और हर तरफ पानी है,  लेकिन मेरी हथेलियां सूखी पड़ी हैं  इन बूंदों से खेलना तो तुमने ही सिखाया  फिर अकेले कैसे खेलूं, ये क्यों नहीं बताया  हवाओं के चलने के साथ ...
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हो तो कुछ भी सकता है
ज़रूरी नहीं कि रोने को हर बार कोई कन्धा ही हो  अपने घुटनों में टूटकर बिखर जाना भी दिल को हल्का करता है  कोई हाथ थामकर आपको दिलासा दे, ये हमेशा तो नहीं होगा  खुद संभलकर लड़खड़ाते कदम उठाने से भी रास्ता कट ही जाता है  वादा किया जो ताउम्र फिक्र करने का उसने, सपना...
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हो तो कुछ भी सकता है
ज़रूरी नहीं कि रोने को हर बार कोई कन्धा ही हो  अपने घुटनों में टूटकर बिखर जाना भी दिल को हल्का करता है  कोई हाथ थामकर आपको दिलासा दे, ये हमेशा तो नहीं होगा  खुद संभलकर लड़खड़ाते कदम उठाने से भी रास्ता कट ही जाता है  वादा किया जो ताउम्र फिक्र करने का उसने, सपना...
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...ये तुमको भी पता होगा
किसी को पाकर खोना क्या होता है  किसी का होकर न होना क्या होता है  हंस-हंसकर रोना क्या होता है...  ये तुमको भी पता होगा जी-जीकर मरना क्या होता है  न चाहकर कुछ करना क्या होता है  दर्द रह-रहकर उभरना क्या होता है  ये तुमको भी पता होगा अपने हाथों कोई आग नहीं लगा...
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...ये तुमको भी पता होगा
किसी को पाकर खोना क्या होता है  किसी का होकर न होना क्या होता है  हंस-हंसकर रोना क्या होता है...  ये तुमको भी पता होगा जी-जीकर मरना क्या होता है   न चाहकर कुछ करना क्या होता है   दर्द रह-रहकर उभरना क्या होता है   ये तुमको भी पता होगा अपने हाथों कोई आग नहीं ...
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तुम होकर भी नहीं हो
मैं जानती हूँ इन रास्तों पर तुम्हारा होना तो दूर  निशाँ मिलना भी मुश्किल है  पर तकती रहती हूँ एकटक उसी तरफ  शायद तुम आ जाओगे इस भ्रम में हूँ ये खुशफहमी नहीं हो सकती  क्योंकि सत्य जानती हूँ मैं  तुम किसी अलग राह पर निकल पड़े हो  पर ये मेरी इबादत है जो ईश्वर क...
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वक़्त
वक़्त, जो किसी के लिए नहीं रुकता बस हौसलों का मोहताज होता है,  ताकि वो बन-बिगड़ सके कोशिशों के दरम्यान  और करवट ले सके ज़िन्दगी  उम्र के तमाम पथरीले रास्ते वक़्त ने भी तय किए हैं  वक़्त बदलते देर नहीं लगती,  ठोकरों पर रुककर वो पीछे नहीं देखता  बस आगे बढ़ जाता है ...
वक़्त
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