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Aparna Khare
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आ रही हूँ मैं
देखो खुश हो न मेरा भी प्रोग्राम बन रहा है तुम तक आने का तुम नहीं आ सकते तो क्या मैं ही आ जाती हूँ मिलने से मतलब तुम आओ या मैं सब कुछ वैसा का वैसा  ही चल रहा है  जैसा तुम छोड़ के गए थे मैं ही कुछ  या यु कहो बहुत  ज्यादा लड़खड़ा गई हों तुम्हारे बगैर तुम्हारे ...

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मौत को चुनौती
मौत आओ मैं तुम्हारा  वरण करना चाहती हूँ हिम्मत है तो आँखे मिलाओ सामने आओ लेकिन मैं जानती हूँ तुम नहीं आओगी डराती हो दुनिया भर को किंतु मुझे नहीं डरा पाओगी लोग रोते है चीखते है चिल्लाते है यहाँ तक कि तुमसे बचकर  छिप जाना चाहते है तब तुम लेती हो  उनसे और मजे ...

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कहाँ हो तुम?
दोस्त कहाँ हो मोबाइल की स्क्रीन पर हर समय तुम्हारा चमकता चेहरा याद दिलाता है तुम बस आ ही रहे होंगे सच तुम बिन हर लम्हा खाली ख़ाली लगता है कुछ भी नहीं बदला बस मेरा ही वक़्त बदल गया है तुम बिन मैं या मेरे बिन सोचो एक डरावना ख्वाब सा लगता था लेकिन पल पल मैं इस...

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तुमसे ही तो जिन्दा थी
तुम अचानक  आ जाओ और  मुझे देख लो शायद  पहचान भी नहीं पाओगे तुम सोच रहे होंगे  क्यों???? सच कहूं  तुम्हारे जाने से मेरा भूत, भविष्य, वर्तमान सब उलट पुलट हो गया मेरी सारी खुशियां  तुम्हारे साथ चली गई मेरे जीने का जज्बा  लुप्त सा हो गया यहाँ तक की  मेरा आत्म व...

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मेरी मौत के बाद तुम  सब रोना मत वो ही करना जो मुझे पसंद है मेरी लाश को नीचे उतार कर उसके सिरहाने एक लालटेन जला देना सब चारोओर बिठा कर जगजीत सिंह की गज़ले लगा देना सच उनकी गज़ले मुझे बहुत सुकून देती है जब तैयार करने का वक़्त आये तो मुझे मत नहलाना क्योंकि जिं...

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statue
कब से बैठी हूँ  यूँ ही मूर्तिवत तुम स्टेचू कह कर  पता नहीं  कहाँ चले गए अब आकर  ओवर कहो तो उठू लेकिन तुम तो  शायद भूल गए किसी को  यूं बैठाकर भी  आये हो अब मेरी नजरों में भी  पुराने नज़ारे है वो पल जो हमने  साथ साथ गुजारे है जो एक एक कर  आते है तुम्हारी याद ...

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स्तब्ध हूँ समय की रेख से! अपनी किस्मत की  उड़ान से! कहाँ जाऊंगी? क्या करुँगी? कुछ नहीं पता जो निर्धारित लकीरे थी वो तो मिट गई रह गया शून्य अंधकार, अकेला लंबा, नुकीला रास्ता अब इसे कैसे  पार करना है कुछ नहीं पता? बस चलना है तयशुदा रास्तो से  अलग एक नए रास्ते...

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स्तब्ध हूँ समय की रेख से! अपनी किस्मत की  उड़ान से! कहाँ जाऊंगी? क्या करुँगी? कुछ नहीं पता जो निर्धारित लकीरे थी वो तो मिट गई रह गया शून्य अंधकार, अकेला लंबा, नुकीला रास्ता अब इसे कैसे  पार करना है कुछ नहीं पता? बस चलना है तयशुदा रास्तो से  अलग एक नए रास्ते...

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मर मर जीते रहे अजीब सी जिंदगी जीते रहे चाहा जो पाना उसे ईश्वर ने  न माना मनमानी करती रही किस्मत अपनी चाले चलती रही मैं वक़्त का प्यादा बन बस घर बदलता रहा अजीब सी जिंदगी जीता रहा मरता रहा  जीता रहा कठपुतली हूँ शायद जो वक़्त के जोर से चलता हूँ सोचता कुछ हूँ क...

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किससे करूँ शिकायत, किसका इंतज़ार करूँ
तुम्हारे जाने से  थम गई है  मेरी दुनिया अब सब कुछ मुझे रुका रुका सा लगता है साँसे जैसे अटकी हो जिस्म में मेरे बस कुछ यूँ महसूस होता है बात बात पे  रोने का  जी करता हूं डबडबाई रहती है  मेरी आँखे आँखों में  तुमको भर लेने का  जी करता है सोचती हूँ  किस से करूँ ...
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