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Siddha Yoga Meditation and Awaken Kundalini Programme, Chattarpur Mandir, Mahrouli, New Delhi 10-03-2011 (Part - 3/3)
अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर के संस्थापक व संरक्षक समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के पावन सानिध्य में, भारत भर में आयोजित हुए शक्तिपात दीक्षा कार्यक्रमों की एक झलक - छत्रपुर मन्दिर, महरौली, नई दिल्ली, दिनांक: 10 मार्च, 2011 (भाग - 3/3)

गुरुदेव सियाग सिद्धयोग, मंत्र जप व ध्यान पर आधारित एक अद्भुत योग है। यह योग (सिद्धयोग) नाथमत के योगियों की देन है। इसमें सभी प्रकार के योग जैसे भक्तियोग, कर्मयोग, राजयोग, क्रियायोग, ज्ञानयोग, लययोग, भावयोग, हठयोग आदि सम्मिलित हैं, इसीलिए इसे सिद्धयोग या महायोग भी कहते हैं। सिद्धयोग में वर्णित शक्तिपात दीक्षा द्वारा कुण्डलिनी जागरण से साधक के त्रिविध ताप आदि-दैहिक (Physical), आदि-भौतिक (Mental) व आदि-दैविक (Spiritual) नष्ट हो जाते हैं तथा साधक जीवन मुक्त हो जाता है। समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग सिद्धयोग को मूर्तरूप दे रहे हैं।

सद्गुरुदेव सियाग से दीक्षित साधकों को सघन मंत्र जप व नियमित ध्यान से भौतिक जीवन की सभी प्रकार की समस्याओं, शारीरिक व मानसिक रोगों तथा नशों से सहज में मुक्ति मिल रही है। विद्यार्थियों की एकाग्रता व याद्दाश्त में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। भौतिक विज्ञान ने वर्तमान में जितना विकास किया है, उससे आगे का विकास इस सिद्धयोग आराधना द्वारा किया जाना संभव है। यदि विश्व के वैज्ञानिक विश्व ब्रह्माण्ड की असंख्य समस्याओं व अनसुलझी पहेलियों को हल करना चाहें तो ध्यान और समाधि अवस्था में संबंधित समस्याओं का हल होना संभव है। मनुष्य ईश्वर की सर्वोच्च कृति है, उसमें असीम ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत भण्डार भरा पड़ा है। इस सिद्धयोग से अपने भीतर की चेतना को जाग्रत कर उसका सदुपयोग लिया जा सकता है।
मनुष्य के पूर्ण विकास का नाम ही ईश्वर है। मनुष्य, जीवन की सभी समस्याओं, रोगों तथा नशों से मुक्त होता हुआ, अपने असली स्वरुप अर्थात् ईश्वर के तद्रूप कैसे हो सकता है? गुरुदेव सियाग सिद्धयोग में, मनुष्य शरीर रूपी सुन्दर ग्रंथ को पढ़ने का एक दिव्य विज्ञान, एक सरल और सहज तरीका है-मंत्र जप और ध्यान। प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या? सद्गुरुदेव सियाग की दिव्य वाणी में संजीवनी मंत्र जप के साथ, इनकी तस्वीर से 15 मिनट ध्यान करके देखें!

सद्गुरुदेव सियाग की तस्वीर से ही क्यों लगता है-‘ध्यान’? इस सत्य को जानने के लिए, ध्यान करके देखें!

गुरुदेव सियाग को सगुण साकार एवं निर्गुण निराकार की सिद्धि हो गई, इसी कारण से गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है और सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान होता है। महर्षि श्री अरविन्द के अनुसार किसी व्यक्ति को ये दोनों सिद्धियाँ यदि एक ही जीवन में, एक ही आदमी में हो जाए तो मानव मात्र का कल्याण हो जाएगा। यही कारण है कि गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है।
गुरुदेव का उद्देश्य है, – ‘‘मानवता में सतोगुण का उत्थान और तमोगुण का पतन करने संसार में अकेला ही निकल पड़ा हूँ। मुझ पर किसी भी जाति-विशेष, धर्म-विशेष तथा देश-विशेष का एकाधिकार नही है।’’

संपूर्ण मानव जाति को सिद्धयोग दर्शन से लाभान्वित करने हेतु समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग ने अपने कर कमलों से गुरुवार, 25 दिसम्बर 1997 को क्रिसमिश के दिन इस वेबसाईट www.the-comforter.org की शुरूआत की थी। इस वेबसाइट में सद्गुरुदेव सियाग के मिशन की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।
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Siddha Yoga Meditation and Awaken Kundalini Programme, Chattarpur Mandir, Mahrouli, New Delhi 10-03-2011 (Part - 2/3)
अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर के संस्थापक व संरक्षक समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के पावन सानिध्य में, भारत भर में आयोजित हुए शक्तिपात दीक्षा कार्यक्रमों की एक झलक - छत्रपुर मन्दिर, महरौली, नई दिल्ली, दिनांक: 10 मार्च, 2011 (भाग - 2/3)

गुरुदेव सियाग सिद्धयोग, मंत्र जप व ध्यान पर आधारित एक अद्भुत योग है। यह योग (सिद्धयोग) नाथमत के योगियों की देन है। इसमें सभी प्रकार के योग जैसे भक्तियोग, कर्मयोग, राजयोग, क्रियायोग, ज्ञानयोग, लययोग, भावयोग, हठयोग आदि सम्मिलित हैं, इसीलिए इसे सिद्धयोग या महायोग भी कहते हैं। सिद्धयोग में वर्णित शक्तिपात दीक्षा द्वारा कुण्डलिनी जागरण से साधक के त्रिविध ताप आदि-दैहिक (Physical), आदि-भौतिक (Mental) व आदि-दैविक (Spiritual) नष्ट हो जाते हैं तथा साधक जीवन मुक्त हो जाता है। समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग सिद्धयोग को मूर्तरूप दे रहे हैं।

सद्गुरुदेव सियाग से दीक्षित साधकों को सघन मंत्र जप व नियमित ध्यान से भौतिक जीवन की सभी प्रकार की समस्याओं, शारीरिक व मानसिक रोगों तथा नशों से सहज में मुक्ति मिल रही है। विद्यार्थियों की एकाग्रता व याद्दाश्त में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। भौतिक विज्ञान ने वर्तमान में जितना विकास किया है, उससे आगे का विकास इस सिद्धयोग आराधना द्वारा किया जाना संभव है। यदि विश्व के वैज्ञानिक विश्व ब्रह्माण्ड की असंख्य समस्याओं व अनसुलझी पहेलियों को हल करना चाहें तो ध्यान और समाधि अवस्था में संबंधित समस्याओं का हल होना संभव है। मनुष्य ईश्वर की सर्वोच्च कृति है, उसमें असीम ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत भण्डार भरा पड़ा है। इस सिद्धयोग से अपने भीतर की चेतना को जाग्रत कर उसका सदुपयोग लिया जा सकता है।
मनुष्य के पूर्ण विकास का नाम ही ईश्वर है। मनुष्य, जीवन की सभी समस्याओं, रोगों तथा नशों से मुक्त होता हुआ, अपने असली स्वरुप अर्थात् ईश्वर के तद्रूप कैसे हो सकता है? गुरुदेव सियाग सिद्धयोग में, मनुष्य शरीर रूपी सुन्दर ग्रंथ को पढ़ने का एक दिव्य विज्ञान, एक सरल और सहज तरीका है-मंत्र जप और ध्यान। प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या? सद्गुरुदेव सियाग की दिव्य वाणी में संजीवनी मंत्र जप के साथ, इनकी तस्वीर से 15 मिनट ध्यान करके देखें!

सद्गुरुदेव सियाग की तस्वीर से ही क्यों लगता है-‘ध्यान’? इस सत्य को जानने के लिए, ध्यान करके देखें!

गुरुदेव सियाग को सगुण साकार एवं निर्गुण निराकार की सिद्धि हो गई, इसी कारण से गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है और सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान होता है। महर्षि श्री अरविन्द के अनुसार किसी व्यक्ति को ये दोनों सिद्धियाँ यदि एक ही जीवन में, एक ही आदमी में हो जाए तो मानव मात्र का कल्याण हो जाएगा। यही कारण है कि गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है।
गुरुदेव का उद्देश्य है, – ‘‘मानवता में सतोगुण का उत्थान और तमोगुण का पतन करने संसार में अकेला ही निकल पड़ा हूँ। मुझ पर किसी भी जाति-विशेष, धर्म-विशेष तथा देश-विशेष का एकाधिकार नही है।’’

संपूर्ण मानव जाति को सिद्धयोग दर्शन से लाभान्वित करने हेतु समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग ने अपने कर कमलों से गुरुवार, 25 दिसम्बर 1997 को क्रिसमिश के दिन इस वेबसाईट www.the-comforter.org की शुरूआत की थी। इस वेबसाइट में सद्गुरुदेव सियाग के मिशन की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।
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अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर के संस्थापक व संरक्षक समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के पावन सानिध्य में, भारत भर में आयोजित हुए शक्तिपात दीक्षा कार्यक्रमों की एक झलक - छत्रपुर मन्दिर, महरौली, नई दिल्ली, दिनांक: 10 मार्च, 2011 (भाग - 1/3)

गुरुदेव सियाग सिद्धयोग, मंत्र जप व ध्यान पर आधारित एक अद्भुत योग है। यह योग (सिद्धयोग) नाथमत के योगियों की देन है। इसमें सभी प्रकार के योग जैसे भक्तियोग, कर्मयोग, राजयोग, क्रियायोग, ज्ञानयोग, लययोग, भावयोग, हठयोग आदि सम्मिलित हैं, इसीलिए इसे सिद्धयोग या महायोग भी कहते हैं। सिद्धयोग में वर्णित शक्तिपात दीक्षा द्वारा कुण्डलिनी जागरण से साधक के त्रिविध ताप आदि-दैहिक (Physical), आदि-भौतिक (Mental) व आदि-दैविक (Spiritual) नष्ट हो जाते हैं तथा साधक जीवन मुक्त हो जाता है। समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग सिद्धयोग को मूर्तरूप दे रहे हैं।

सद्गुरुदेव सियाग से दीक्षित साधकों को सघन मंत्र जप व नियमित ध्यान से भौतिक जीवन की सभी प्रकार की समस्याओं, शारीरिक व मानसिक रोगों तथा नशों से सहज में मुक्ति मिल रही है। विद्यार्थियों की एकाग्रता व याद्दाश्त में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। भौतिक विज्ञान ने वर्तमान में जितना विकास किया है, उससे आगे का विकास इस सिद्धयोग आराधना द्वारा किया जाना संभव है। यदि विश्व के वैज्ञानिक विश्व ब्रह्माण्ड की असंख्य समस्याओं व अनसुलझी पहेलियों को हल करना चाहें तो ध्यान और समाधि अवस्था में संबंधित समस्याओं का हल होना संभव है। मनुष्य ईश्वर की सर्वोच्च कृति है, उसमें असीम ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत भण्डार भरा पड़ा है। इस सिद्धयोग से अपने भीतर की चेतना को जाग्रत कर उसका सदुपयोग लिया जा सकता है।
मनुष्य के पूर्ण विकास का नाम ही ईश्वर है। मनुष्य, जीवन की सभी समस्याओं, रोगों तथा नशों से मुक्त होता हुआ, अपने असली स्वरुप अर्थात् ईश्वर के तद्रूप कैसे हो सकता है? गुरुदेव सियाग सिद्धयोग में, मनुष्य शरीर रूपी सुन्दर ग्रंथ को पढ़ने का एक दिव्य विज्ञान, एक सरल और सहज तरीका है-मंत्र जप और ध्यान। प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या? सद्गुरुदेव सियाग की दिव्य वाणी में संजीवनी मंत्र जप के साथ, इनकी तस्वीर से 15 मिनट ध्यान करके देखें!

सद्गुरुदेव सियाग की तस्वीर से ही क्यों लगता है-‘ध्यान’? इस सत्य को जानने के लिए, ध्यान करके देखें!

गुरुदेव सियाग को सगुण साकार एवं निर्गुण निराकार की सिद्धि हो गई, इसी कारण से गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है और सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान होता है। महर्षि श्री अरविन्द के अनुसार किसी व्यक्ति को ये दोनों सिद्धियाँ यदि एक ही जीवन में, एक ही आदमी में हो जाए तो मानव मात्र का कल्याण हो जाएगा। यही कारण है कि गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है।
गुरुदेव का उद्देश्य है, – ‘‘मानवता में सतोगुण का उत्थान और तमोगुण का पतन करने संसार में अकेला ही निकल पड़ा हूँ। मुझ पर किसी भी जाति-विशेष, धर्म-विशेष तथा देश-विशेष का एकाधिकार नही है।’’

संपूर्ण मानव जाति को सिद्धयोग दर्शन से लाभान्वित करने हेतु समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग ने अपने कर कमलों से गुरुवार, 25 दिसम्बर 1997 को क्रिसमिश के दिन इस वेबसाईट www.the-comforter.org की शुरूआत की थी। इस वेबसाइट में सद्गुरुदेव सियाग के मिशन की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।
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अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर के संस्थापक व संरक्षक समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के पावन सानिध्य में, भारत भर में आयोजित हुए शक्तिपात दीक्षा कार्यक्रमों की झलक - 30 जुलाई, 2009 जोधपुर आश्रम में शक्तिपात दीक्षा कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया जिसका ‘जी‘ जागरण एवं साधना टीवी चैनल पर सीधा प्रसारण किया गया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के हजारों साधकों ने भाग लिया।

गुरुदेव सियाग सिद्धयोग, मंत्र जप व ध्यान पर आधारित एक अद्भुत योग है। यह योग (सिद्धयोग) नाथमत के योगियों की देन है। इसमें सभी प्रकार के योग जैसे भक्तियोग, कर्मयोग, राजयोग, क्रियायोग, ज्ञानयोग, लययोग, भावयोग, हठयोग आदि सम्मिलित हैं, इसीलिए इसे सिद्धयोग या महायोग भी कहते हैं। सिद्धयोग में वर्णित शक्तिपात दीक्षा द्वारा कुण्डलिनी जागरण से साधक के त्रिविध ताप आदि-दैहिक (Physical), आदि-भौतिक (Mental) व आदि-दैविक (Spiritual) नष्ट हो जाते हैं तथा साधक जीवन मुक्त हो जाता है। समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग सिद्धयोग को मूर्तरूप दे रहे हैं।

सद्गुरुदेव सियाग से दीक्षित साधकों को सघन मंत्र जप व नियमित ध्यान से भौतिक जीवन की सभी प्रकार की समस्याओं, शारीरिक व मानसिक रोगों तथा नशों से सहज में मुक्ति मिल रही है। विद्यार्थियों की एकाग्रता व याद्दाश्त में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। भौतिक विज्ञान ने वर्तमान में जितना विकास किया है, उससे आगे का विकास इस सिद्धयोग आराधना द्वारा किया जाना संभव है। यदि विश्व के वैज्ञानिक विश्व ब्रह्माण्ड की असंख्य समस्याओं व अनसुलझी पहेलियों को हल करना चाहें तो ध्यान और समाधि अवस्था में संबंधित समस्याओं का हल होना संभव है। मनुष्य ईश्वर की सर्वोच्च कृति है, उसमें असीम ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत भण्डार भरा पड़ा है। इस सिद्धयोग से अपने भीतर की चेतना को जाग्रत कर उसका सदुपयोग लिया जा सकता है।
मनुष्य के पूर्ण विकास का नाम ही ईश्वर है। मनुष्य, जीवन की सभी समस्याओं, रोगों तथा नशों से मुक्त होता हुआ, अपने असली स्वरुप अर्थात् ईश्वर के तद्रूप कैसे हो सकता है? गुरुदेव सियाग सिद्धयोग में, मनुष्य शरीर रूपी सुन्दर ग्रंथ को पढ़ने का एक दिव्य विज्ञान, एक सरल और सहज तरीका है-मंत्र जप और ध्यान। प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या? सद्गुरुदेव सियाग की दिव्य वाणी में संजीवनी मंत्र जप के साथ, इनकी तस्वीर से 15 मिनट ध्यान करके देखें!

सद्गुरुदेव सियाग की तस्वीर से ही क्यों लगता है-‘ध्यान’? इस सत्य को जानने के लिए, ध्यान करके देखें!

गुरुदेव सियाग को सगुण साकार एवं निर्गुण निराकार की सिद्धि हो गई, इसी कारण से गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है और सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान होता है। महर्षि श्री अरविन्द के अनुसार किसी व्यक्ति को ये दोनों सिद्धियाँ यदि एक ही जीवन में, एक ही आदमी में हो जाए तो मानव मात्र का कल्याण हो जाएगा। यही कारण है कि गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है।
गुरुदेव का उद्देश्य है, – ‘‘मानवता में सतोगुण का उत्थान और तमोगुण का पतन करने संसार में अकेला ही निकल पड़ा हूँ। मुझ पर किसी भी जाति-विशेष, धर्म-विशेष तथा देश-विशेष का एकाधिकार नही है।’’

संपूर्ण मानव जाति को सिद्धयोग दर्शन से लाभान्वित करने हेतु समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग ने अपने कर कमलों से गुरुवार, 25 दिसम्बर 1997 को क्रिसमिश के दिन इस वेबसाईट www.the-comforter.org की शुरूआत की थी। इस वेबसाइट में सद्गुरुदेव सियाग के मिशन की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।
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