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sushil kumar
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हरिपुरधार की रोमांचक यात्रा --- भाग - 2
पहाड़ी रास्तों पर बाइक से चलते हुए हम पूरी तरह से प्रकृति का आनंद ले रहे थे। पर मन में एक भय था कही आगे रास्ता बंद ना हो। 35 कि.मी. आगे जा कर संगडाह नामक क़स्बा आता है। संगडाह तक हमें बर्फ नहीं मिली थी। अभी 25 कि.मी. का सफर और बाकी था। ऊपर की तरफ से  कई गाडी ...

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हरिपुरधार---भाग पहला
हरिपुरधार - जैतक किला ----रेणुका जी  मैंने एक एडवेंचर क्लब (कारवाँ क्लब के नाम से) पटियाला में खोला है। उसी के सिलसिले में मैंने एक दिन अपने दोस्त संदीप भाई (जाट देवता) को फ़ोन किया और उनसे दो दिन के लिए कोई अच्छी सी जगह बताने को बोला। तब उन्होंने हरिपुरधा...

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हरिपुर धार इस यात्रा से पहले मैंने कभी भी हरिपुरधार का नाम नहीं सुना था। मैंने एक एडवेंचर क्लब (कारवाँ क्लब के नाम से) पटियाला में खोला है। क्लब के कारण ही मैंने एक दिन अपने दोस्त संदीप भाई (जाट देवता ) को फ़ोन किया और उनसे दो दिन के लिए कोई अच्छी सी जगह बता...

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पिछले लेख में मैंने लुटरु महादेव और अर्की के किले के बारे में बताया था। जखोली में भद्रकाली मंदिर से निकल कर हम कुनिहार की तरफ चल पड़े। पहले हमारा वापिसी का प्लान दूसरे रास्ते से था। लेकिन लुटरु महादेव गुफा में कुछ व्यक्ति कुनिहार में एक और शिव गुफा की बात कर...

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अर्की--लुटरु महादेव  लुटरु महादेव ( एक ऐसा शिवलिंग जहाँ पर सदियों से सिगरेट रखी जाती है, जो खुद सुलगती है और धुंआ ऐसे उड़ता है जैसे कोई कश लगा रहा हो। ) एक ऐसी छुपी हुई जगह जिस के बारे में मैंने अपने ऑफिस में एक बन्दे से सुना था आज से एक साल पहले। फिर इस जगह...

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योगी जी बहुत बढ़िया, आप के साथ हम ने चरण पादुका के दूसरी तरफ के रास्ते की भी यात्रा कर ली।

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मणिमहेश कैलाश यात्रा -- भाग - 2
इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।   सुबह हम 5.30 बजे हम अगले पड़ाव हड़सर की तरफ चल पड़े। भरमौर से हड़सर 9 km की दुरी पर है। 20 मिनट में हम हड़सर पहुँच गए। हड़सर आखिरी पड़ाव है, इस के आगे 14 km यात्रा पैदल करनी होती है।  किसी जमाने में यह यात्रा पैद...

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मणिमहेश कैलाश यात्रा - भाग - 1
देश की ज्यादातर पहाडि़यों में कहीं न कहीं शिव का कोई स्थान मिल जाएगा, लेकिन शिव के निवास के रूप में सर्वमान्य कैलाश पर्वत के भी एक से ज्यादा प्रतिरूप पौराणिक काल से धार्मिक मान्यताओं में स्थान बनाए हुए हैं। तिब्बत में मौजूद कैलाश-मानसरोवर को सृष्टि का केंद्...

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यात्रा तुंगनाथ केदार ----भाग दूसरा
उखीमठ से 10.30 बजे के करीब हम तुंगनाथ के लिए निकल पड़े। उखीमठ से 35 कि.मी. की दुरी पर चोपता नामक स्थान है। चोपता के बारे में   चोपता एक ऐसी खूबसूरत जगह है, जहाँ पहुँच कर मन को शांति और विश्राम मिलता है। चोपता को गाँव और कस्बे में से किसी खाँचे में नहीं डाल स...
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