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Shashi Padha
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              दृश्य -पटकथा - पात्र                       ( संस्मरण ) ( नेपथ्य से)  मेरी आवाज़ में मेरे मध्यवर्गीय माता
पिता का घर। प्रत्येक वस्तु अपने स्थान पर करीने से लगी हुई । छोटा सा आँगन , गुलाब-गेंदा
आदि सभी मौसमी फूलों से शोभित छोटी सी बगिया , तुलसी क...

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बस यूँ ही -----7       1 रस्ता पथरीला हो तो मैं पगडन्डी ढूँढ लेती हूँ चलते-चलते प्रकृति भी हमसफर हो जाती है |     2 अब नहीं दिखाई देती उसकी पहाड़ी झरने सी मुस्कान धूप सोख गई या बह गई किसी तेज़ धार में वही जाने |    3  रख दिया ताक पर तुम्हारा दिया अपमान, अवहेल...

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तस्वीरें बोलती हैं -- 3                                                    जिजीविषा  अमरीका में पतझड़ द्वारे आन खड़ी  है | यहाँ 
पर भारत की तरह छ: ऋतुएँ तो नहीं होती किन्तु गर्मी के बाद पतझड़ आ ही जाती
है |  प्रकृति का नियम
है , आएगी ही | पतझड़ का स्वागत यहाँ ब...

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भली थी इक लड़की कितनी  भली थी नाज़ बिछौने पली थी माँ अँगना में खेलती जूही की कली थी पिता हथेली पे रखी    गुड़-मिश्री डली थी अल्हड़ हिरना झूमती थोड़ी सी पगली थी भावी की गलियों में स्वप्न संजोए चली थी ब्याही तो बेगाने घर धू-धू कर जली थी बस इतना ही सुना
कहीं   चंगी...

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तस्वीरें बोलती हैं
------- 2                                        भारत-
म्यांमार सीमा क्षेत्र अस्सी के दशक की बात
है, भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में बहुत तनाव की स्थिति
थी| मणिपुर–नागालैंड के जंगली प्रदेशों में उग्रवादियों ने आतंक फैला रखा था
|   देश मे...

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आज मन अधीर है आज मन अधीर है | काँपती कोमल धरा अब मन में गहरी पीर है | दिशा- दिशा में हो रहा शोर चीत्कार आज आँख खोलूँ तो वहीं संहार हाहाकार आज शान्ति के देवता के पाँव में जंजीर है | हरित धरा का ओढ़नी रक्त रंजित हो गई उठ रहा धुआं कहीं माँग सूनी हो गई  बह रहा ह...

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हिन्दी
विश्वजीत हो छन्द
हो , गीत हो , स्वर
हो , संगीत हो जो
रचूँ , जो कहूँ हिन्दी
मन का मीत हो भावना
में तू बहे कल्पना
में तू सजे मन के   तार – तार में प्राण
वीणा सी बजे जहाँ
रहूँ , जहाँ बसूँ हिन्दी
से चिर प्रीत हो  | स्रोत
तू ज्ञान का आधार उत्थान
का देस -
...

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नवगीत
गर्मी के दिन कुछ अलसाये कुछ कुम्हलाये आम्रगन्ध भीजे , बौराये काटे ना कटते ये पल छिन निठुर बड़े हैं गर्मी के दिन धूप-छाँव अँगना में खेलें कोमल कलियाँ पावक झेलें उन्नींदी अँखियां विहगों की पात-पात में झपकी ले लें रात बिताई घड़ियां गिन-गिन  बीतें ना कुन्दन से ...

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