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Amar Nath
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अर्जक संघ और उसकी नीतियां : श्री राम बाबू कन्नौजिया संपादक "अर्जक साप्ताहिक" बात चीत डॉ. लाल रत्नाकर द्वारा

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इतिहास का धर्म
इतिहास का धर्म ------------------------ -डॉ.लाल रत्नाकर डॉ. लाल रत्नाकर का चित्र  अगर मैं इतिहास लिखूं तो लिखूं किसके लिए क्या वह मेरा लिखा इतिहास पढेंगे ? क्योंकि वह तो पाखंडियों का लिखा हुआ इतिहास पढ़ने के आदी हो गए हैं जिसमें उनके खिलाफ लिखा गया है और जा...

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लालू प्रसाद यादव को फसाने के मायने !
लालू प्रसाद यादव को फसाने के मायने ! -------------------------------------------------------------- भारतीय राजनीति में जो भी हो लालू प्रसाद को कितना सीरियस लिया जाता है यह एक अलग बात है। लेकिन कुछ लोग बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि लालू प्रसाद यादव को सुना जात...

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बुद्ध हूं
मैं बुद्ध हूं  मैं बाबा साहब अंबेडकर हूं  मैं माननीय कांसी राम हूं  मैं महात्मा फुले हूं  मैं पेरियार हूं  मैं ललई सिंह हूं  मैं रामस्वरूप वर्मा हूं  मैं मैं हूं  जागो उठो खड़े हो जाओ  मैं पिछड़ा हूं  मैं दलित हूं  और मैं मुसलमान भी हूं  मैं अफसर हूं  मैं श...

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पराजय भी हमारे लिए एक पाठ ही होती है
डॉ. लाल रत्नाकर  कई बार हम परास्त हो जाते हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे हम खत्म हो गए हैं जबकि ऐसा होता नहीं हमारी पराजय भी हमारे लिए एक पाठ ही होती है यह भी हमारे अंदर कहीं ना कहीं कोई ना कोई ऐसी कमी है जो लोगों को पसंद नहीं आ रही है इस बीच में जब अपने पुराने...

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भरोसे के लायक नहीं हैं ?
हम भी तो चाहते हैं की वह सहज हों ! जबकि हम उनके लिए इस ओर बने हैं हमेशा खड़े रहकर सहयोग करते रहे हैं पर वो है की मानते ही नहीं शिवा उनके जो उन्हें फूटी आँखों नहीं देखना चाहते यह उन्ही के चक्कर काट रहे होते हैं ! उस स्वान की तरह जिसे यह विशवास न जाने क्यों हो...

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वतन पर हो ज़रा कुर्बान !
तुम्हारे जज्बात की क्या ? तुम्हारे सौगात की क्या ? हमें तो फख्र है इसपर, तुम्हे ऐसे एतबार से क्या ? वतन पे बे-इंतहा कब्जा ? चमन पे डालकर पर्दा ? चलो उस जश्न में शामिल हों जहाँ मातम है फख्र उनका ? उसे हसे हसाये रूबरू होकर उन्हें अब आजमाएं तो ! जो नित वतन पर ...

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एहसास ही तो है जिंदगी ,
एहसास ही तो है जिंदगी , अन्यथा जी तो बहुतेरे लोग रहे हैं ! सदियों से और आगे सदियों तक जीते रहेंगे और अहसास के बिना ! हमारे लोग जी तो रहे हैं, पर अहसास अपने आप में उन्हें उन्हें अहसास ही नहीं होता ! जीवन का ! और उनके आगे ! हमने सपने  गढ़े  तो बहुत थे पर उसका ...

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सर्वमिदम अपने दादा मम्मी और नाना के साथ !
सर्वमिदम अपने दादा मम्मी और नाना के साथ ! साथ में प्रग्नेश भी (प्रग्नेश इनकी बुआ के बेटे हैं)
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