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चमत्कार को नमस्कार - क्रमांक ९ (स्वतंत्रता प्राप्ति का चमत्कार)

भारत चमत्कारों का देश है - यहाँ प्रायः हर चीज में चमत्कार घटित होने की प्रबल सम्भावना होती है |

यद्यपि भारत के सभी पौराणिक कथा ग्रंथों में एक से बढ़ कर एक चमत्कारों का लोमहर्षक वर्णन है - तदापि - वर्तमान काल में तथाकथित स्वतंत्रता प्राप्ति के समय को एक रेफरेंस पॉइंट मान लिया जाय तो पहला चमत्कार नेहरु ने ट्रांसफर ऑफ पॉवर एग्रीमेंट १९४२-१९४७ पर हस्ताक्षर कर के किया - जो उस समय गाँधी को भनक तक नहीं लगी - और आज तक ६४ वर्ष बाद भी भारत में किसी को मालूम ही नहीं पड़ा | कुल्हड़ में गुड़ फोड़ना (कानों कान किसी को खबर न पड़ना) एक मुहावरा है परन्तु उपरोक्त घटना से बढ़िया उदाहरण कहीं नहीं मिलेगा |

दूसरा चमत्कार है - जो यह गाना बतला रहा है : "दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल - साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल" | १८५७ के ग़दर से लेकर १९४७ तक अनगिनत शहीदों ने भारत को आजाद कराने के लिए जान की कुर्बानियां दीं - वो सब साबरमती के संत के चमत्कार के सामने व्यर्थ हो गयी ? वर्तमान हुक्मरान तो केवल इसी चमत्कार में विश्वास रखते हैं और जनता को भी इसमें विश्वास करने का आग्रह (दुराग्रह ?) करते हैं |

अभी और भी चमत्कारी चीजें बतलानी है - जुड़े रहिये .........
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