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Kaushal Lal
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रात की रुमानियत
------------------------------------- जैसे जैसे रात भींग रही है। एक ख़ामोशी की पतली चादर पसारती जा रही है। टिमटिमाते तारे जैसे  उसे देखकर अपनी आँखे खोलता और बंद करता है। बीच बीच में सड़कों पर दौड़ती गाडी की रौशनी जैसे पुरे क्षमता से इन अंधरो को ललकारती है और इ...
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वक्त ......बस यूँ ही ....
जिंदगी की व्यस्तता वक्त को कोसती हुई चलती है। और वक्त ...वो क्या ....वो तो अपनी रफ़्तार में है। कोई फर्क उसे नहीं पड़ता...सतत...बिना रुके....अनवरत अपनी उसी रफ़्तार में जिसमे प्रकृति ने उसका सृजन करते समय उसे तय कर दिया। बिना किसी क्षोभ  ...किसी द्वेष ...कोई रा...
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ढहते बूत
विचार उत्क्रमित हो रहा है....मूर्तियां विध्वंसित..। जय और पराजय के उद्वेग के आरोह और अवरोह में  क्षणिक मतैक्य के वशीभूत हो बेचारे निर्जीव शिलाओं को ढाह रहे या ईर्ष्या के बृहद अदृश्य बुत को रच कर उसमे  जान फूंक रहे है। जिसको भविष्य में ढाहने में शायद सक्षम भ...
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लोकतंत्र और सरकार
           ऐसा करना क्या ठीक रहेगा ? जनता हमारे बारे में क्या धरना बनाएगी?             क्यों ...ऐसा क्यों सोच रहे हो? यही तो तुमलोगो में कमी है। हमेशा सकारात्मक सोचो। जैसा सोचोगे वैसा ही होगा।               लेकिन हमें तो जनता ने वोट नहीं दिया न ...।        ...
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सर्व पकोड़ा रोजगार अभियान
            चाय की चुस्कियों में चार साल निकल गए....। लेकिन चाय की चुस्कियों से ही कही क्षुदा मिटती है क्या .....? सबने एसिडिटी का शिकायत करना शुरू किया । लेकिन ये तो अड़े हुए है....चाय से काम चल जाएगा । किंतु एक तो राजस्थान में वैसे ही गर्मी ज्यादा होता है ...
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नव वर्ष मंगलमय हो......
          सब कुछ यथावत रहते हुए भी , खुश होने के कारण तलाश करते रहे। बेशक आप इस बात से वाकिफ है कि कैलेंडर पर सिर्फ वर्ष नए अंकित होंगे , लेकिन वो स्याही और पेपर यथावत जो चलते आ रहे है वही रहेंगे। फिर भी एकरसता के मंझधार में फसने से बेहतर है कि इन लम्हो को ...
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नव वर्ष मंगलमय हो.......
                  सब कुछ यथावत रहते हुए भी , खुश होने के कारण तलाश करते रहे। बेशक आप इस बात से वाकिफ है कि कैलेंडर पर सिर्फ वर्ष नए अंकित होंगे , लेकिन वो स्याही और पेपर यथावत जो चलते आ रहे है वही रहेंगे। फिर भी एकरसता के मंझधार में फसने से बेहतर है कि इन ल...
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