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ऋषभ देव शर्मा
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हिंदी सेवी : कवि : समीक्षक : अध्यापक
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गढ़ी हुई भारतीयता और भारतीय साहित्य का रिश्ता थोडा झीना है, सघन नहीं है.  - डॉ देवराज http://vakrokti-hindi.blogspot.com/2016/02/001.html
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(भूमिका) वृद्धावस्था विमर्श और हिंदी कहानी
भूमिका  विभिन्न हाशियाकृत समुदायों के मानवाधिकारों की चिंता के बीच इधर कुछ दशकों से विश्व भर में उत्तर आधुनिक संदर्भ में वृद्धों की समस्याएँ एकदम नए रूप में सामने आई हैं. परिवार की पहले जैसी संकल्पना तो अब भारत तक में नहीं बची है. यों, वृद्धों को अनुत्पादक ...

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(संपादकीय) कोमलचित कृपाल रघुराई
अशोक वाटिका में जब हनुमान पहली बार सीता के समक्ष आते हैं तो उनकी पहचान के प्रति आश्वस्त होने पर सीता जाने कब से बँधे पड़े अपने मन को उनके समक्ष खोल देती हैं. राम-लक्ष्मण की कुशलता पूछने के बाद वे इतने दिन तक अपनी उपेक्षा रूपी निष्ठुरता को राम के लिए स्वाभावि...

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(संपादकीय) करहिं सदा सेवक पर प्रीति
सुंदरकांड में कई स्थलों पर तुलसी बाबा ने राम के स्वभाव की चर्चा की है. विभीषण से प्मिलने पर हनुमान उन्हें बताते हैं कि सेवक के प्रति प्रीति रखना राम का स्वभाव है. यहाँ हमें सेवक का अर्थ भक्त समझना चाहिए – ऐसा भक्त जिसके लिए राम ही एकमात्र शरण हैं. अभी उस दि...

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भारतीय संस्कृति : आज की चुनौतियाँ
भारतीय संस्कृति भारतवर्ष में बसे हुए विभिन्न मानव समुदायों की हजारों वर्षों की उस साधना का परिणाम है जो उन्होंने जीवन को उत्कृष्ट, उदात्त और श्रेष्ठ बनाने के लिए की. मनुष्य को उसके आदिम स्तर से उठाकर दिव्यता से भर देने के लिए जुड़े जो प्रयास अलग-अलग देशकाल म...

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भाषा देश की चेतनाधारा को विकसित करती है
संकल्प, राजभाषा विशेषांक, 2016-17, अंक 18, मिश्र धातु निगम लिमिटेड  रक्षा मंत्रालय, कंचनबाग, हैदाराबद - 500008 पृष्ठ 25-29  

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संतोष अलेक्स के कविता संग्रह 'हमारे बीच का मौन' की भूमिका
भूमिका हल्की बूँदाबाँदी में चहल कदमी   संतोष अलेक्स (1971) बहुभाषाविद अनुवादक
और रचनाकार हैं. ‘हमारे बीच का मौन’ यों तो उनका दूसरा कविता संग्रह है, लेकिन यह
उनकी तीसवीं प्रकाशित पुस्तक है. स्वभाव से विनम्र और मृदुभाषी संतोष निरंतर अनुवाद
और सृजन में लगे रहत...

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(संपादकीय) सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोहं रामवल्लभां
लंबी सांस्कृतिक परंपरा से प्राप्त किसी कथा को महाकाव्य का आधार बनाते समय रचनाकार के समक्ष अनेक विकल्प हो सकते हैं. तब तो और भी अधिक जब वह कथा लोक और शास्त्र में अनेकानेक भिन्न-भिन्न पाठों के रूप में विद्यमान रामकथा हो. बाबा तुलसी ने स्वविवेक के बल पर इन पाठ...

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(भूमिका) रामकिशोर उपाध्याय की काव्यकृति 'दीवार में आले'
भूमिका  रामकिशोर उपाध्याय अपने इस कविता संग्रह ‘दीवार में आले’ के माध्यम से एक ऐसे सुपरिचित संवेदनशील कवि के रूप में अपनी पहचान को गहराते हुए सामने आते हैं जिसके निकट वैयक्तिक और निजी अनुभूतियाँ भी तभी सार्थक और व्याख्येय हैं जब वे किसी सामान्य और सामाजिक ...
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